DA Image
2 जून, 2020|2:33|IST

अगली स्टोरी

निर्भया के दोषी मुकेश का फांसी चढ़ना तय, याचिका खारिज कर बोला सुप्रीम कोर्ट- राष्ट्रपति ने दस्तावेज देखकर फैसला लिया

delhi gang rape convict mukesh singh ht   file   photo

निर्भया गैंगरेप यानी निर्भया सामूहिक बलात्कार और हत्या मामले में दोषी मुकेश कुमार सिंह का अब फांसी चढ़ना तय हो गया है। निर्भया के दोषी मुकेश की दया याचिका खारिज करने के राष्ट्रपति के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस केस में कोर्ट का दखल जरूरी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति के समक्ष सारे दस्तावेज रखे गए और उन्होंने सब देखकर ही फैसला लिया।

सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया मामले पर कहा कि जेल में कथित पीड़ा का सामना करने को राष्ट्रपति के दया याचिका खारिज करने के खिलाफ आधार नहीं बनाया जा सकता। उच्चतम न्यायाल ने कहा कि दया याचिका के शीघ्र निपटारे का मतलब यह नहीं है कि राष्ट्रपति ने सोच-समझकर फैसला नहीं किया। उनके सामने सारे दस्तावेज प्रस्तुत किए गए और उन्होंने सब देखकर ही फैसला लिया। 

बता दें कि निर्भया के दोषी मुकेश की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई पूरी कर ली थी और फैसला सुरक्षित रख लिया था। दिल्ली में 2012 में हुए इस जघन्य अपराध के लिए चार मुजरिमों को अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। इन दोषियों में से एक मुकेश की दया याचिका राष्ट्रपति ने 17 जनवरी को खारिज कर दी थी जिसके खिलाफ इस दोषी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है।

यह भी पढ़ें- निर्भया के गुनहगार मुकेश ने सुप्रीम कोर्ट में लगाया गंभीर आरोप- तिहाड़ जेल में हुआ मेरा यौन शोषण

मंगलवार को न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने इस याचिका पर मुकेश कुमार सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अंजना प्रकाश और केन्द्र की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें सुनने के बाद कहा था कि इस पर निर्णय बुधवार को सुनाया जायेगा। केन्द्र ने मुकेश कुमार सिंह की याचिका खारिज करने का अनुरोध करते हुए पीठ से कहा कि इस तरह के जघन्य अपराध करने वाले के साथ जेल में दुर्व्यवहार दया का आधार नहीं हो सकता है। 
     
सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने इस आरोप को गलत बताया कि दोषी मुकेश कुमार सिंह को जेल में एकांत में रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय ने इस दोषी की दया याचिका के साथ सारा रिकार्ड राष्ट्रपति के पास भेजा था। मेहता ने कहा कि इस तरह के मामलों में न्यायिक समीक्षा का शीर्ष अदालत का अधिकार बहुत ही सीमित है और दोषी की दया याचिका पर फैसले में विलंब का अमानुषिक असर पड़ सकता था।

यह भी पढ़ें- निर्भया के दोषी मुकेश की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

सॉलिसीटर जनरल ने पीठ से कहा कि राष्ट्रपति को दया के बारे में खुद को आश्वस्त करना होता है और प्रत्येक प्रक्रिया को नहीं देखना होता। इससे पहले, दोषी मुकेश कुमार सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अंजना प्रकाश ने दावा किया कि उसकी दया याचिका पर विचार के समय राष्ट्रपति के समक्ष सारे तथ्य नहीं रखे गये।

इस पर पीठ ने मुकेश के वकील से सवाल किया कि वह यह दावा कैसे कर सकती हैं कि राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका पर विचार के समय सारे तथ्य नहीं रखे गये थे। पीठ ने सवाल किया, 'आप कैसे कह सकती हैं कि ये तथ्य राष्ट्रपति महोदय के समक्ष नहीं रखे गये थे? आप यह कैसे कह सकती हैं कि राष्ट्रपति ने सही तरीके से विचार नहीं किया?'

दोषी के वकील ने जब यह कहा कि राष्ट्रपति के समक्ष सारे तथ्य नहीं रखे गये थे तो सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि राष्ट्रपति के समक्ष सारा रिकार्ड, साक्ष्य और फैसला पेश किया गया था। मुकेश कुमार सिंह ने आरोप लगाया है कि राष्ट्रपति द्वारा उसकी दया याचिका अस्वीकार करने में प्रक्रियागत खामियां हैं और उसके मामले में विचार करते समय उसे एकांत में रखने सहित कतिपय परिस्थितियों और प्रक्रियागत खामियों को नजरअंदाज किया गया। 

मुकेश कुमार सिंह दया याचिका खारिज होने के बाद ही अदालत ने चारों मुजरिमों -मुकेश, पवन गुप्ता, विनय कुमार शर्मा और अक्षय कुमार, को एक फरवरी को सुबह छह बजे मृत्यु होने तक फांसी पर लटकाने के लिये आवश्यक वारंट जारी किये थे। इससे पहले अदालत ने चारों दोषियों को 22 जनवरी को फांसी देने के लिये वारंट जारी किये थे। 

23 वर्षीय निर्भया से दक्षिण दिल्ली में चलती बस में 16-17 दिसंबर, 2012 की रात छह व्यक्तियों ने सामूहिक बलात्कार के बाद उसे बुरी तरह जख्मी हालत में सड़क पर फेंक दिया था। निर्भया का बाद में 29 दिसंबर को सिंगापुर के एक अस्पताल में निधन हो गया था।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Nirbhaya case Supreme Court dismisses petition of Nirbhaya gangrape convict Mukesh