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19 जनवरी, 2020|4:50|IST

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निर्भया मामला: 7 साल 7 सवाल, पुलिस में तालमेल की कमी से होती है इंसाफ में देरी

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निर्भया कांड के बाद महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई नियम बनाए गए। इनमें एक प्रमुख सुझाव दिल्ली-एनसीआर में पुलिस के बीच समन्वय स्थापित करना था। हालांकि इस पर अमल करते हुए समय-समय पर पुलिस अधिकारियों की बैठकें होती रहीं। लेकिन पीड़िताओं को इसका कोई विशेष फायदा नहीं मिला।यह विडंबना ही है कि अब भी पीड़िता को कई दिनों तक एक थाने से दूसरे थाने के चक्कर लगाने पड़ते हैं, इससे न्याय मिलने में तो देरी होती ही है, पीड़ित महिला मानसिक रूप से भी टूट जाती है।

पुलिस समन्वय की कमी से महिला अपराध भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पिछले साल 15 नवंबर तक 1921 महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटनाएं हुईं थी जबकि इस साल 15 नवंबर तक 1947 महिलाएं दुष्कर्म का शिकार हुईं हैं। ऊषा मेहरा कमेटी ने जागरूकता अभियान चलाने की भी सिफारिशें की थी। पुलिस के स्तर पर दिल्ली-एनसीआर में यह अभियान भी दम तोड़ता नजर आया।

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तीन महीने के अंदर बैठक
बेहतर समन्वय बनाने के लिए दिल्ली-एनसीआर के पुलिस अधिकारियों की बैठकें होती रहती हैं। उच्च अधिकारियों की यह बैठक तीन महीने में एक बार होनी चाहिए, जबकि जिले स्तर के अधिकारियों के बीच हर महीने बैठक होनी चाहिए। लेकिन जिला स्तर की बैठकें तय समय पर नहीं हो पाती हैं। इससे कई बार घटनाओं को रोकने में दिक्कत आती है। कई बार दिल्ली और एनसीआर की पुलिस घटनास्थल को लेकर आपस में उलझी रहती है।

हाइवे पेट्रोलिंग की कमी
निर्भया मामले के बाद जस्टिस ऊषा मेहरा कमेटी ने हाइवे पर पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाने की सिफारिश की थी। इसके बाद भी दिल्ली और एनसीआर से गुजरने वाले हाइवे पर पेट्रोलिंग कम दिखती है। दिल्ली में वारदात करने के बाद बदमाश एनसीआर के इलाके में भाग जाते हैं। वहीं, एनसीआर के इलाके में वारदात करने के बाद बदमाश दिल्ली में आ जाते हैं। ऐसे में दिल्ली और एनसीआर टीम के बीच पेट्रोलिंग के लिए बेहतर समन्वय बनाने की जरूरत है।

सीमा विवाद में पीड़िता को लगवाते हैं चक्कर
दिल्ली और एनसीआर पुलिस के बीच सीमा विवाद सुलझाने की जरूरत है। सीमाएं चह्नित हैं, लेकिन वारदात के बाद अगर कोई महिला नजदीक के दूसरे राज्य के पुलिस के पास पहुंच जाती है तो पुलिस तुरंत कार्रवाई करने के बजाए, पीड़िता को सीमा और इलाका समझाने लगती है। ऐसे मामले में पुलिस संबंधित थाने की पुलिस को सूचित कर तुरंत कार्रवाई करें तो आरोपियों को पकड़ा जा सकता है

* 06 दुष्कर्म के मामले रोजाना दिल्ली  में होते हैं
* 09 छेड़छाड़ की घटनांए रोजाना सामने आती हैं
* 10 अपहरण के मामले रोजाना होते हैं
* 02 अश्लील इशारे की वारदात होती हैं महिलाओं से

ईस्टर्न रेंज के ज्वाइंट सीपी आलोक कुमार ने कहा, "समन्वय को बेहतर बनाने के लिए अधिकारियों के साथ बैठक होती रहती हैं। इस साल अक्तूबर में मेरठ रेंज के आईजी के साथ दिल्ली पुलिस हेडक्वार्टर में बैठक हुई थी। वहीं जिले स्तर पर भी बैठक होती रहती है। सहयोग के लिए किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं होती है।"

ऊषा मेहरा कमेटी ने पुलिस में समन्वय को लेकर ये सिफारिशें की थीं
* दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस समन्वय और सुरक्षा को बेहतर बनाया जाए।
* हाइवे पर सुरक्षा और आपराधिक गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए टोल पर कैमरे लगाए जाए।
* परिवहन विभाग की तरफ से सुरक्षा के लिए हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट और जीपीएस सिस्टम लगे, ताकि अपराधियों को ट्रैक करने में आसानी हो।
* आपराधिक गतिविधियों के बारे में जानकारियां शेयर करने के लिए पुलिस के बीच बेहतर नेटवर्क हो।
* एक राज्य से दूसरे राज्य में बातचीत के लिए एक कंट्रोल रूम स्थाापित किया जाए।
* सूचनाओं को एक-दूसरे के सथ साझा करने के लिए समय-समय पर पुलिस अधिकारियों की बैठक हो।

निर्भया कोष का 9% ही खर्च हुआ
केंद्र की ओर से 2013 में बनाए गए निर्भया कोष के तहत आवंटित राशि का महज नौ फीसदी ही इस्तेमाल हुआ है। महाराष्ट्र और मेघालय जैसे राज्यों ने तो इसमें से एक रुपये का भी इस्तेमाल नहीं किया है। वहीं दिल्ली में पांच फीसदी से भी कम खर्च किया गया। यह जानकारी सरकारी आंकड़ों से सामने आई है। इस कोष का गठन महिला सुरक्षा के लिए किया गया था। महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने हाल में संसद में यह जानकारी दी थी। 

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  • Web Title:nirbhaya case delhi gang rape 16 December 2012 Seven Years Seven Question