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28 जनवरी, 2020|9:43|IST

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निर्भया मामला : सात साल बाद भी सुरक्षा योजनाएं सिर्फ मंजूरी तक सीमित, बसों में ना CCTV और ना GPS

दिल्ली की सड़क पर निर्भया के साथ निजी बस में दरिंदगी हुई थी। इसके बाद सरकार ने सार्वजनिक बसों की संख्या बढ़ाने के साथ सुरक्षा मजबूत करने के लिए कई योजनाओं की घोषणा की थीं। निर्भया कांड के सात साल बाद भी सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित कराने के लिए घोषित योजनाएं जमीन पर नहीं उतर सकी हैं।

निर्भया कांड के बाद बनी समितियों और सरकारों ने सार्वजनिक वाहनों को सुरक्षित बनाने का दावा किया था। उस समय सरकारों ने सभी सार्वजनिक वाहनों में जीपीएस लगाना अनिवार्य कर दिया था, जिससे वाहनों की लोकेशन पता लगाई जा सके।

डीटीसी और क्लस्टर बसों में सीसीटीवी व पैनिक बटन लगाने की घोषणा भी हुई थी। यह सब निर्भया फंड से किया जाना था। बसों में सीसीटीवी लगाने की योजना 200 बसों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुई। अब कुछ दिन पहले इसे सभी बसों में लगाने को लेकर आदेश जारी हुआ है। जीपीएस लगाने की तीन कोशिश नाकाम होने के बाद अब उसे लगाने का काम फिर शुरू होगा। सरकार के अनुसार, इसमें अभी सात माह का समय लगेगा।

3,781 डीटीसी बसें हैं दिल्ली में
2,100 से अधिक क्लस्टर बसें 
11,000 बसों की जरूरत   है राजधानी में
37 हजार ऑटो में ही जीपीएस चालू

2013 से लटकी है सिटी टैक्सी स्कीम
2013 में एक एप आधारित टैक्सी कंपनी के चालक ने महिला यात्री के साथ दुष्कर्म किया था। उस मामले के बाद दिल्ली में एप आधारित टैक्सी में निगरानी बढ़ाने और एक शहर-एक टैक्सी परमिट स्कीम लागू करने के लिए सिटी टैक्सी स्कीम बनाने की घोषणा की गई थी। यह योजना लगभग बनकर तैयार है, मगर दो साल से अधिक समय से यह सरकार की उच्चाधिकार प्राप्त समिति के पास पड़ा है। यह योजना लागू होती तो एप आधारित टैक्सी सेवा प्रदाता कंपनियों को अपनी सभी बुकिंग की जानकारी, टैक्सी की जीपीएस लोकेशन परिवहन विभाग के साथ साझा करनी थी। यात्रियों को परेशानी होने सजा व जुर्माने का प्रावधान था। 

सरकार का पक्ष
दिल्ली सरकार में परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत का कहना है कि दिल्ली में अब जितनी भी नई बसें आ रही हैं उसमें सुरक्षा के लिए जीपीएस, तीन-तीन सीसीटीवी कैमरे, 10 पैनिक बटन पहले दिन से लगे हैं। नियंत्रण कक्ष बनाकर सभी पर निगरानी रखी जाएगी। पुरानी बसों में जीपीएस, सीसीटीवी लगाने में थोड़ी देरी हुई है। ऐसा नहीं है कि इन्हें लगाने की कोशिश नहीं हुई। तीन बार निविदा फेल होने से थोड़ी देर हुई है। निर्भया फंड भी केंद्र सरकार की ओर  से उपलब्ध नहीं कराया गया है, मगर दिल्ली सरकार ने उसे खुद लगाने का फैसला लिया है। इसके अलावा बसों   में महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए 13 हजार बस मार्शल भी तैनात किए गए है। 

सरकार की घोषणाएं और उनकी स्थिति

घोषणा : बसों में सीसीटीवी लगाने की सिफारिश की गई थी।
स्थिति : दिल्ली सरकार ने अब दस दिन पहले कैबिनेट  मंजूरी देकर लगाने की अनुमति दे दी है। सात    माह का समय लगेगा।

घोषणा : सभी छोटे-बड़े यात्री वाहन में जीपीएस लगाना अनिवार्य।
स्थिति : डीटीसी बसों में जीपीएस लगाने का आदेश कुछ दिन पहले दे दिया गया है। ऑटो, टैक्सी समेत अन्य वाहन में जीपीएस लगे हैं, ज्यादातर चलते नहीं।

घोषणा : सार्वजनिक वाहनों में पैनिक बटन से उसकी सूचना सीधे पुलिस कंट्रोल रूम को मिले।
स्थिति : ऑटो में यह व्यवस्था है। बसों में लगाने का आदेश दिया गया है। मगर, अभी तक सरकार का अपना कोई कमांड सेंटर नहीं है। इसे बनाने का का आदेश दिया जा चुका है।

घोषणा : अंतिम छोर तक सार्वजनिक वाहनों की सुविधा की जाए।
स्थिति : सरकार ने एक अध्ययन कराया है। इसमें घर से 500 मीटर पर सार्वजनिक वाहन उपलब्ध कराने की बात है। लागू करने की मंजूरी नहीं मिली है।

50 फीसदी वाहनों में बंद पड़े हैं जीपीएस
दिल्ली परिवहन विभाग के अनुसार जिन वाहनों में पहले से जीपीएस लगे हैं उनमें भी 50 फीसदी वाहनों में बंद है। नवंबर की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में एक लाख ऑटो में से महज 37 हजार में जीपीएस चालू हैं। डीटीसी और क्लस्टर के अलावा चल रही 6,137 बसों में से महज 2,787 बसों में ही जीपीएस सक्रिय मिला।  

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  • Web Title:nirbhaya case After 7 Years Security Scheme Only on Files