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28 जनवरी, 2020|10:41|IST

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निर्भया मामला : दुष्कर्म पीड़िताओं के लिए दिल्ली में आधे 'वन स्टॉप सेंटर' भी नहीं बने

one stop centre in lal bahadur shastri hospital for rape victim   hindustan photo

निर्भया कांड के बाद दुष्कर्म के मामलों में कड़ी सजा और जल्द न्याय की मांग के लिए जस्टिस ऊषा मेहरा कमेटी का गठन किया गया था। इस कमेटी ने दुष्कर्म पीड़िताओं को जल्द न्याय दिलाने के लिए अपनी रिपोर्ट में वन स्टॉप सेंटर बनाने की सिफारिश की थी। यह सेंटर हर राजस्व जिले में बनाए जाने थे। इसका उद्देश्य था कि दुष्कर्म पीड़िता को एक छत के नीचे कानूनी और चिकित्सा से संबंधित सभी सुविधाएं दी जा सके।

कमेटी की रिपोर्ट को आए हुए वर्षों बीत गए, लेकिन आज भी दिल्ली के हर जिले में वन स्टॉप सेंटर का निर्माण नहीं किया गया है। पूरी दिल्ली में 14 सेंटर बनाए जाने थे लेकिन केवल छह बने हैं। अधिकांश में कमेटी की रिपोर्ट में दी गई सिफारिश को नजरअंदाज किया गया है। इसके चलते अब भी पीड़िताओं को वारदात के बाद कानूनी और चिकित्सा मदद के लिए धक्के खाने पड़ते हैं। पेश है हिन्दुस्तान की रिपोर्ट...

दिल्ली : दो दिन बाद दर्ज हुआ केस
जसोला की एक 15 वर्षीय नाबालिग का एक दिसंबर को एक युवक ने अपहरण कर लिया। पीड़िता ने बताया कि वह जब वह होश में आई तो शरीर पर कपड़े नहीं थे। उसके साथ कई लोगों ने दुष्कर्म किया है। पुलिस ने एफआईआर तीन दिसंबर को दर्ज की। परिजनों ने बताया कि रात में अपहरण होने पर वे उसी समय पुलिस के पास गए थे, लेकिन उन्हें सुबह बुलाया गया। इस दौरान रात 12 बजे के बाद दुष्कर्म की वारदात हो गई। यही नहीं, सरिता विहार थाने की महिला जांच अधिकारी पीड़िता को मेडिकल के लिए अस्पताल लेकर नहीं गई। परिजन ही उसे एम्स ले गए। 

स्टेटस रिपोर्ट
जसोला मामले में एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने आरोपी को दबोच लिया। आरोपी नाबालिग पाया गया। पुलिस ने उसे बाल सुधार गृह भेज दिया।

यहां भी स्थिति खराब
1. संजय गांधी अस्पताल में वन स्टॉप सेंटर के नाम पर एक कमरा और आठ बिस्तर है। सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं है। 
2. डीडीयू अस्पताल में वन स्टॉप सेंटर के नाम पर काउंसलिंग रूम,  मेडिकल रूम के अलावा कुछ सुविधाएं नहीं हैं। 

नोएडा : कर्मचारियों की भर्ती पर शुरुआत नहीं
नोएडा में वन स्टॉप सेंटर सेक्टर-82 भंगेल स्थित पुराने कोर्ट में प्रस्तावित है। प्रशासन का दावा है कि जल्द उद्घाटन होगा। जिला प्रोबेशन विभाग के अनुसार सेंटर के लिए एक कंप्यूटर ऑपरेटर और दो चतुर्थ श्रेणी के पुरुष कर्मचारी और आठ महिला कर्मचारियों की नियुक्ति भी हो गई है।

गाजियाबाद : केंद्र नहीं अस्पताल ले गई पुलिस
गाजियाबाद के निवाड़ी थाना क्षेत्र के एक गांव में 15 दिन पहले हुए सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराने में पुलिस को दो दिन लग गए। क्योंकि पुलिस उसे वन स्टॉप सेंटर की जगह अस्पताल ले गई। मामले में गांव के ही चार युवकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। 

दिल्ली में इन जगहों पर केंद्र
1.  लालबहादुर शास्त्री अस्पताल, खिचड़ीपुर 
2. गुरुतेग बहादुर अस्पताल, दिलशाद गार्डन
3. संजय गांधी अस्पताल, मंगोलपुरी 
4. बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल, रोहिणी
5. डीडीयू अस्पताल, हरि नगर 
6. सफदरजंग अस्पताल, सफदरजंग एंक्लेव

कमेटी की रिपोर्ट में इस तरह के सुझाव दिए गए थे
1. वन स्टॉप सेंटर पर इंस्पेक्टर या उनके समकक्ष प्रशिक्षित पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। यह अधिकारी महिला हो तो बेहतर है।
2. महिला मनोचिकित्सक या एनजीओ की प्रतिनिधि रहे, जो पीड़िता की काउंसलिंग कर सके।
3. प्रशिक्षित मेडिकल एक्सपर्ट हो जिसे दुष्कर्म के केस में जांच का अनुभव हो।  
4. प्रशिक्षित नर्स (मेडिकल सहायक) मौजूद हो। 
5. पीड़ित की जांच के दौरान फॉरेंसिक विशेषज्ञ मौजूद हों, जो फॉरेसिंक सबूतों को जुटा सकें।  
6. ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट को 164 के बयान दर्ज करने के लिए बुलाया जाए। 
7. दुष्कर्म की सूचना के बाद दिल्ली पुलिस पीसीआर वैन/ नजदीकी पुलिस स्टेशन के अधिकारी पीड़िता को सुरक्षा प्रदान करेंगे और उसे नजदीकी सेंटर ले जाएंगे। 
8. हर राजस्व जिले में दो वन स्टॉप सेंटर, एक सरकारी और एक निजी अस्पताल में बनाया जाए।
9. पीड़िता के सेंटर पर आते ही मेडिकल और फॉरेंसिक जांच हो। 

लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में बने सेंटर में यह हकीकत दिखी
1. कोई विशेष पुलिस अधिकारी नहीं थे। अस्पताल में मौजूद कांस्टेबल ही पीड़िता के आने पर स्थानीय पुलिस स्टेशन में सूचना देता है।
2. पीड़िता के आने पर फोन कर मनोचिकित्सक को बुलाया जाता है। 
3. अस्पताल के गायनी विभाग में महिला डॉक्टर मौजूद रहती है। 
4. प्रशिक्षित नर्स (मेडिकल सहायक) की ड्युटी लगी है। 
5. फॉरेंसिक विभाग में विशेषज्ञ मौजूद हैं, पीड़िता के आने पर उन्हें बुलाया जाता है। 
6. बयान दर्ज कराने के लिए पीड़िता को कोर्ट ले जाया जाता है। 
7. पीसीआर वैन पीड़िता को थाने लेकर जाती है, जिसके बाद स्थानीय पुलिस पीड़िता को अस्पताल/ वन स्टॉप सेंटर ले जाते हैं। 
8. पूरी दिल्ली में अभी तक केवल छह वन स्टॉप सेंटर ही बनाए गए हैं।
9. वन स्टॉप सेंटर पर पहुंचने के 24 घंटे के अंदर जांच होती है।
वर्ष 2019 में लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल वन स्टॉप केंद्र में पहुंचीं पीड़िताएं

दुष्कर्म और छेड़छाड़ पीड़िताओं की संख्या
जनवरी     14
फरवरी     10
मार्च         25
अप्रैल       22
मई          20
जून         19
जुलाई      17
अगस्त     27
सितंबर     17
अक्तूबर     8
नवंबर      12

24 घंटे के अंदर पीड़िता की जांच करनी होती है, लेकिन ऐसा कम ही होता है।

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  • Web Title:Nirbhaya Case 2012 Delhi gang rape Only 6 one Stop Centre For Rape Victim in Delhi