पाक आतंकी समेत आठ के खिलाफ चार्जशीट दाखिल
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें शहजाद भट्टी भी शामिल हैं। यह मामला हरियाणा के अंबाला में हुए आईईडी कार बम धमाके से जुड़ा है। एनआईए की जांच में भट्टी द्वारा बनाई गई साजिश और आरोपियों की भूमिका का विवरण दिया गया है।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआई) ने शनिवार को आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इनमें पाकिस्तानी गैंगस्टर से आतंकवादी बने शहजाद भट्टी भी शामिल हैं। यह मामला इस साल जनवरी में हरियाणा के अंबाला में बलदेव नगर पुलिस स्टेशन के पार्किंग एरिया में हुए आईईडी कार बम धमाके से जुड़ा है। पंचकुला स्थित विशेष अदालत में दायर इस आरोप पत्र में जांच एजेंसी ने आरोपियों की भूमिका और पुलिस प्रतष्ठिानों को निशाना बनाकर लोगों में आतंक फैलाने के उद्देश्य से भट्टी द्वारा रची गई साजिश का विस्तृत विवरण दिया है। एनआईए ने चार्जशीट में भट्टी के अलावा पंचकूला (हरियाणा) निवासी करमजीत सिंह उर्फ टोनी, आकाश, सौरव उर्फ सोबी उर्फ सौरव, रमन कुमार, सत्यम, सुखदेव सिंह उर्फ सुखा और अमरजीत सिंह उर्फ अंबी के नाम भी शामिल किए हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी इस मामले में अपनी जांच जारी रखे हुए है और उसने भट्टी के इशारे पर आरोपियों द्वारा की गई भर्ती, वित्तीय मदद, परिचालन समन्वय, विस्फोटक पदार्थों की खरीद और इस आतंकी कृत्य (अंबाला पुलिस थाने में आईईडी विस्फोट) को अंजाम देने के पूरे जाल का पर्दाफाश किया है। यह सब भट्टी के निर्देश पर किया गया था。
भट्टी ने भारत में अपने नेटवर्क मॉड्यूल बनाए थे
एनआईए ने बताया कि पाक आतंकी भट्टी ने भारत में अपने नेटवर्क के मॉड्यूल बनाए थे। भारत में भट्टी का मुख्य गुर्गा आकाश था, वह सह-आरोपियों के साथ मिलकर इन हमलों के समन्वय के लिए जिम्मेदार था।
इस तरह भट्टी ने की थी साजिश
जांच में पता चला कि भट्टी ने साजिश के तहत पुलिस थानों पर हमलों को अंजाम देने के लिए स्थानीय गुर्गों को रसद और विस्फोटक सामग्री की व्यवस्था करने का काम सौंपा था। संभावित ठिकानों की टोह लेने के बाद बलदेव नगर थाने को निशाना बनाया गया था। कुछ आरोपियों ने गैस सिलेंडरों और विस्फोटक पदार्थों से भरी कार को थाना परिसर में खड़ा किया था और बाद में उस दृश्य की वीडियोग्राफी भी की थी।
आरोपी लगातार अपने आका के संपर्क में थे
भट्टी ने सोशल मीडिया मंचों और सुरक्षित संदेश चैनलों के माध्यम से इन आरोपियों की भर्ती की थी और उन्हें कट्टरपंथी बनाया था। डिजिटल, इलेक्ट्रॉनिक और फोरेंसिक सबूतों से यह भी स्थापित हुआ है कि आरोपी हमले की योजना के दौरान अपने आका के लगातार संपर्क में थे।


