पेड़ कटाई पर बीएचयू से मुआवजा वसूली तेज करने का आदेश
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में अवैध पेड़ कटाई के मामले में यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को 2.65 करोड़ रुपये का मुआवजा वसूलने का निर्देश दिया। एनजीटी ने बोर्ड को तीन महीने में कार्रवाई पूरी करने के लिए कहा, हालाँकि पहले निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्रवाई नहीं की गई थी।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में अवैध रूप से पेड़ काटे जाने के मामले में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) को 2.65 करोड़ रुपये से अधिक के पर्यावरणीय मुआवजे की वसूली की प्रक्रिया जल्द पूरी करने का निर्देश दिया है। एनजीटी ने बोर्ड को इस संबंध में लंबित कार्रवाई तीन महीने के भीतर पूरी करने को कहा है। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने आदेश में कहा कि यूपीपीसीबी ने 33 पेड़ों की अवैध कटाई के लिए 2.65 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा आंका है और इसे लगाने की प्रक्रिया जारी है।
हालांकि, एनजीटी ने यह भी नोट किया कि पहले दिए गए तीन महीने की समय सीमा के भीतर यह प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी। एनजीटी ने परिस्थितियों को देखकर समय बढ़ाते हुए यूपीपीसीबी को निर्देश दिया कि पर्यावरणीय मुआवजा लगाने से जुड़ी सभी कार्यवाही अब तय समय के भीतर पूरी की जाए। यह मामला अधिवक्ता सौरभ तिवारी की ओर से दायर अनुपालन याचिका पर सुना जा रहा है। इससे पहले गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट में पाया था कि बीएचयू के करीब 1300 एकड़ परिसर में सात चंदन समेत कुल 33 पेड़ों की अवैध कटाई की गई थी। वहीं, डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर की रिपोर्ट के अनुसार विश्वविद्यालय ने वर्ष 2025 में 978 पौधे लगाए, जिनमें से 859 पौधे सुरक्षित और जीवित पाए गए हैं।


