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18 नबम्बर, 2019|7:42|IST

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BJP और शिवसेना अड़ीं, अगले चौबीस घंटे अहम; ये हैं 5 संभावनाएं

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महाराष्ट्र में सरकार के गठन को लेकर दो दिन का समय शेष रह गया है। भाजपा और शिवसेना दोनों अपने-अपने रुख पर अड़ी हैं। ऐसे में अगले 24 घंटे बेहद अहम माने जा रहे हैं। भाजपा ने गुरुवार को राज्यपाल से मिलने का फैसला किया है। वहीं, शिवसेना नेतृत्व ने भी पार्टी विधायकों की आपात बैठक बुलाई है। उधर, एनसीपी ने फिर साफ किया कि उन्हें विपक्ष में बैठने का जनादेश मिला है।

महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना के बीच संवाद सूत्रों से चल रही चर्चाओं का दौर लगभग पूरा हो चुका है। दोनों दलों में अब अलग-अलग शीर्ष स्तर पर विचार-विमर्श चल रहा है। बुधवार को किसानों की समस्याओं को लेकर शिवसेना के निवर्तमान मंत्रियों की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ बैठक हुई। इससे यह संकेत जरूर मिला है कि अभी भी दोनों दल किसी समझौते पर पहुंच सकते हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री पद का पेंच अभी भी नहीं सुलझ सका है। बैठक के बाद भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि सरकार के गठन पर अच्छी खबर कभी भी आ सकती है। 

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शिवसेना के एक प्रमुख नेता ने संकेत दिए हैं कि अगर दोनों दलों का शीर्ष नेतृत्व बात करे तो कुछ रास्ता निकल सकता है। सूत्र बताते हैं कि भाजपा नेतृत्व का मानना है कि अगर शिवसेना कोई ठोस बात रखे तो वह चर्चा के लिए तैयार है। देर शाम भाजपा महासचिव व महाराष्ट्र के चुनाव प्रभारी रहे भूपेंद्र यादव ने पार्टी अध्यक्ष व गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर सारी स्थितियों पर चर्चा की। 

राष्ट्रपति शासन लगा तो हम जिम्मेदार नहीं: राउत

दिनभर के घटनाक्रम के बाद शाम को शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि उनकी पार्टी ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद के फार्मूले पर अडिग है। अगर समय पर सरकार का गठन न होने से राज्य में राष्ट्रपति शासन लगता है तो उसके लिए शिवसेना जिम्मेदार नहीं होगी।   

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भाजपा से कोई प्रस्ताव नहीं मिला 

संजय राउत ने कहा, 'शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को सरकार गठन के लिए भाजपा से अभी तक कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। हमने राज्यपाल से मुलाकात की है। अब अगर भाजपा नेता राज्यपाल से मिलते हैं तो यह अच्छी बात है। सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते भाजपा को सरकार बनानी चाहिए।'

ये हैं संभावनाएं

1-भाजपा-शिवसेना गठबंधन की सरकार बने। मुख्यमंत्री भाजपा का, उपमुख्यमंत्री व सरकार में 40 फीसदी हिस्सेदारी शिवसेना की रहे। हालांकि, शिवसेना इससे सहमत नहीं है।
2-शिवसेना के साथ न आने पर भाजपा सबसे बड़े दल के नाते सरकार बनाए और बाद में सदन में बहुमत साबित करे। 
3-शिवसेना, एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाए और कांग्रेस बाहर से समर्थन दे। हालांकि एनसीपी और कांग्रेस अभी इससे इनकार कर रही हैं। 
4-भाजपा और एनसीपी के बीच नया गठबंधन बने और दोनों मिलकर सरकार बनाए। हालांकि, इसके लिए अभी तक बातचीत नहीं हुई है।
5-किसी दल की ओर से सरकार बनाने का दावा पेश न किए जाने पर राज्य में कुछ समय के लिए राष्ट्रपति शासन लगाकर नए समीकरणों के बनने का इंतजार किया जाए।

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