छह महीने में ही ठीक हो जाएंगे टीबी के मरीज
बागपत में टीबी रोगियों के लिए राहत भरी खबर है। अब उनका इलाज कम समय में और अधिक प्रभावी होने जा रहा है। बीपाल रेजीमेन से इलाज शुरू होगा, जिसमें चार तरह की दवाएं शामिल हैं। छह महीने के कोर्स से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं, जिससे टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।

बागपत। टीबी मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। अब उनका इलाज कम समय में और अधिक प्रभावी होने जा रहा है। जल्द ही बागपत में टीबी रोगियों का ‘बीपाल रेजीमेन’ से इलाज शुरू होगा। इसमें चार तरह की दवाएं होती हैं। सिर्फ छह महीने के कोर्स से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है।
टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य
टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग नई तकनीकों पर जोर दे रहा है। मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर) टीबी मरीजों के लिए जल्द ही बीपाल रेजीमेन इलाज शुरू होने जा रहा है। बीपाल दरअसल चार दवाओं का एक कांबिनेशन है। इसमें पुरानी और विख्यात दवा बेडाक्विलिन के साथ प्रीटोमैनिड, माक्सीफ्लोक्सासिन और लाइनजोलिड दवाएं शामिल की गई हैं। बागपत में करीब 50 एमडीआर मरीजों का इलाज इस पद्धति से शुरू किया जाएगा। बता दें कि क्लीनिकल ट्रायल में इसकी सफलता की दर 90 प्रतिशत रही है। 14 साल या इससे अधिक के मरीज पर यह कांबीनेशन प्रयोग किया जा सकता है।
जिले में सक्रिय मरीजों की संख्या
इस समय जिले में करीब 1600 टीबी के सक्रिय मरीज हैं। इनमें से कुछ नौ और कुछ 11 महीने का कोर्स कर रहे हैं। यह संख्या सरकारी और निजी अस्पतालों को मिलाकर है। इनमें से एमडीआर मरीजों को अलग करके नई रेजीमेन से इलाज शुरू करने की तैयारी है। नए खोजे एमडीआर मरीजों का इलाज भी इसी तरीके से होगा।
निजी और सरकारी अस्पतालों का फर्क
निजी अस्पतालों में छह महीने के इलाज का खर्चा करीब 1.1 से 1.7 लाख रुपये के बीच आता है। इसमें 60 से 90 हजार रुपये की दवाइयां और 50 से 60 हजार रुपये में डाक्टर की फीस, जांच और दूसरे खर्चे शामिल हैं, लेकिन वह दूसरी दवाइयां चलाते हैं। वहीं, सरकारी अस्पतालों में जांच, दवाएं, फालोअप सब मुफ्त है।
डॉक्टर की टिप्पणियाँ
नए रेजीमेन को यूपी में लागू किया गया है। हमारे यहां जल्द ही नई दवाओं से इलाज शुरू किया जाएगा। इसकी सफलता की दर अब तक के कांबीनेशन में सर्वाधिक है। मरीजों को इससे भारी राहत मिलने की उम्मीद है। छह माह में ही उनकी टीबी जड़ से खत्म हो जाएगी।
-डा. यशवीर सिंह, जिला क्षय रोग अधिकारी
प्रश्नोत्तरी
इस खबर पर आपकी क्या राय है?


