आग लगी तो अब पहले फायर और बिजली विभाग होंगे जिम्मेदार, नई एसओपी में तय हुई सबकी जवाबदेही

हिन्दुस्तान, लखनऊ
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अलीगंज अग्निकांड के बाद नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की गई है, जिसमें आग की घटनाओं के लिए विभागों की जिम्मेदारी स्पष्ट की गई है। अग्निशमन विभाग आग बुझाने के साथ-साथ सुरक्षा मानकों की निगरानी करेगा। विद्युत विभाग भी बिजली चूक पर नजर रखेगा। सभी जानकारी एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी।

आग लगी तो अब पहले फायर और बिजली विभाग होंगे जिम्मेदार, नई एसओपी में तय हुई सबकी जवाबदेही

विजय वर्मा, प्रमुख संवाददाता, लखनऊ। अलीगंज अग्निकांड के बाद प्रदेश स्तर पर तैयार की गई नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में आग की घटनाओं को लेकर विभागों की जिम्मेदारी अब साफ तौर पर तय कर दी गई है। नई व्यवस्था के मुताबिक अब किसी भी भवन में अग्नि सुरक्षा से जुड़ी कोई चूक सामने आने पर सबसे पहले अग्निशमन विभाग और बिजली विभाग की भूमिका की जांच की जाएगी। एसआईटी का मानना है कि ज्यादातर बड़ी आग की घटनाएं विद्युत खामियों और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की वजह से होती हैं, इसलिए इन दोनों विभागों की जवाबदेही सबसे अहम मानी गई है। अलीगंज अग्निकांड की जांच कर रही एसआईटी ने लखनऊ विकास प्राधिकरण की मदद से यह पूरी एसओपी तैयार कराई है, जिसमें हर विभाग की भूमिका स्पष्ट रूप से तय कर दी गई है。

अब सिर्फ आग बुझाना नहीं, निगरानी भी करेगा फायर विभाग

नई एसओपी के अनुसार अग्निशमन विभाग को अब केवल आग बुझाने वाली एजेंसी नहीं, बल्कि अग्नि सुरक्षा का मुख्य नियामक बनाया गया है। विभाग को अब भवनों का नियमित निरीक्षण करना होगा, अग्निशमन अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी करना होगा, सुरक्षा मानकों का सत्यापन करना होगा, जनजागरूकता अभियान चलाने होंगे और आपातकालीन स्थिति में तुरंत कार्रवाई करनी होगी। अगर किसी भवन में सुरक्षा उपकरण निष्क्रिय पाए गए या नियमों का उल्लंघन मिला, तो कार्रवाई की जिम्मेदारी भी इसी विभाग की होगी।

हर बिजली चूक की निगरानी करेगा विद्युत विभाग

रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और बिजली खपत के चलते विद्युत जनित आग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इसे देखते हुए यूपी पावर कॉरपोरेशन यानी यूपीपीसीएल को सुरक्षित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी, स्वीकृत विद्युत भार पर निगरानी रखनी होगी और अवैध लोड की पहचान करनी होगी। वहीं विद्युत सुरक्षा निदेशालय वायरिंग, ट्रांसफार्मर, विद्युत प्रतिष्ठानों और अन्य उपकरणों का निरीक्षण करेगा और विद्युत दुर्घटनाओं की जांच भी करेगा।

अवैध निर्माण पर सीधी कार्रवाई करेगा विकास प्राधिकरण

एसओपी में विकास प्राधिकरणों को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है कि भवन स्वीकृत मानचित्र और तय भूमि उपयोग के अनुरूप ही संचालित हों। अनधिकृत निर्माण, बेसमेंट के गलत इस्तेमाल और भवनों में अवैध बदलाव पर भी नजर रखना अब प्राधिकरणों की ज़िम्मेदारी होगी। जहां गंभीर समस्याएं मिलेंगी, वहां संयुक्त टीम मौके पर जाकर निरीक्षण करेगी और खामियों को दुरुस्त कराएगी। इसके अलावा नगर निगम और अन्य स्थानीय निकायों को लाइसेंस, व्यापारिक प्रतिष्ठानों के अभिलेख और स्थानीय स्तर पर नियमों के पालन की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।

एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मिलेगी सारी जानकारी

नई व्यवस्था के तहत सभी विभागों को एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया है। इससे किसी भी भवन की एनओसी, बिजली कनेक्शन, मानचित्र स्वीकृति और लाइसेंस से जुड़ी सारी जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध हो सकेगी। किसी भी स्तर पर गड़बड़ी मिलने पर संबंधित विभाग की जवाबदेही अपने आप तय हो जाएगी।

बिल्डिंग फायर सेफ्टी एनालिटिक्स एंड इंटेलीजेंस सेंटर रखेगा पूरी निगरानी

यह नया सेंटर सभी विभागों के डेटा को एक साथ लाकर उसे एक ही इंटरऑपरेबल ढांचे में एकीकृत करेगा। यह जीआईएस आधारित बिल्डिंग सेफ्टी रिपोजिटरी के तौर पर काम करेगा, जिसमें भवनों में रहने वाले लोगों का डेटा भी दर्ज रहेगा।

प्राधिकरणों के इंजीनियरों को मिलेगी राहत

एसआईटी की तैयार की गई इस नई एसओपी से विकास प्राधिकरणों के इंजीनियरों और अधिकारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अभी तक आग लगने की किसी भी घटना में सबसे पहले प्राधिकरण के इंजीनियरों और अधिकारियों को ही दोषी ठहरा दिया जाता था। लेकिन नई एसओपी लागू होने के बाद अब आग की घटनाओं में लेसा और फायर विभाग के अधिकारियों की भी सीधी जवाबदेही तय होगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नई एसओपी में अग्निशमन विभाग की जिम्मेदारी क्या है?
नई एसओपी के अनुसार अग्निशमन विभाग को आग बुझाने के साथ-साथ अग्नि सुरक्षा का मुख्य नियामक बनाया गया है।
Vijay Verma

लेखक के बारे में

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विजय वर्मा पिछले करीब 24 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने लखनऊ से अपने करियर की शुरुआत की और लंबे समय तक हिंदुस्तान में स्टाफ रिपोर्टर से लेकर सीनियर रिपोर्टर और प्रमुख संवाददाता के रूप में काम किया। प्रशासन, राजनीति, शहरी विकास और नागरिक सुविधाओं की रिपोर्टिंग में उनकी मजबूत पहचान है।


परिचय एवं अनुभव

विजय वर्मा उत्तर प्रदेश, विशेषकर राजधानी लखनऊ की पत्रकारिता में एक जाना-पहचाना नाम हैं। करीब ढाई दशक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर शहरी विकास से जुड़ी गंभीर और असरदार पत्रकारिता की है। हिंदुस्तान में रहते हुए उन्होंने न सिर्फ ब्रेकिंग न्यूज़ बल्कि जनहित से जुड़ी गहन और फॉलो-अप आधारित रिपोर्टिंग को प्राथमिकता दी, जिससे कई मामलों में प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई भी हुई।


करियर का सफर (हिंदुस्तान से शुरुआत)

विजय वर्मा ने पत्रकारिता की शुरुआत लखनऊ से हिंदुस्तान अखबार के साथ की। उन्होंने रियल एस्टेट, शहरी विकास, नागरिक सुविधाएं जैसे अहम क्षेत्रों में लगातार रिपोर्टिंग की और राजधानी लखनऊ के बदलते शहरी स्वरूप पर कई बड़ी स्टोरीज़ कीं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

विजय वर्मा की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी बहुआयामी है। लखनऊ विश्वविद्यालय से बी.कॉम (स्नातक), समाजशास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएशन, लोक प्रशासन में डिप्लोमा और इसके बाद लखनऊ विश्वविद्यालय से ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। इस अकादमिक आधार ने उन्हें सामाजिक मुद्दों, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और नीतिगत फैसलों को गहराई से समझने में मदद की, जो उनकी रिपोर्टिंग में साफ झलकता है।


शहरी विकास और असरदार पत्रकारिता

राजधानी लखनऊ में तेजी से हो रहे शहरी विकास, बुनियादी ढांचे, नागरिक सुविधाओं और प्रशासनिक लापरवाहियों पर विजय वर्मा ने कई प्रभावशाली खबरें कीं।


विशेषज्ञता

शहरी विकास, रियल एस्टेट और नागरिक सुविधाएं

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