सूबे के कला शिक्षकों और प्रशिक्षकों का बनेगा रिसोर्स बैंक
विशेष: -राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद के कला एवं शिल्प विभाग की पहल

विशेष: -राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद के कला एवं शिल्प विभाग की पहल
-अनुभवी, नवाचारी कला एवं शिल्प शिक्षकों को एक मंच से जोड़ा जाएगा
-राज्य की कला एवं शिल्प परंपरा को स्कूली शिक्षा से जोड़ने की कवायद
मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता।
सूबे के कला शिक्षकों और प्रशिक्षकों का रिसोर्स बैंक बनेगा। राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद के कला एवं शिल्प विभाग ने इसकी पहल की है。
कला एवं शिल्प परंपरा का महत्व
सूबे के सभी स्कूलों में नियुक्त अनुभवी, नवाचारी कला एवं शिल्प शिक्षकों को एक मंच से जोड़ा जाएगा। राज्य की कला एवं शिल्प परंपरा को स्कूली शिक्षा से जोड़ने की कवायद की जा रही है। सरकारी स्कूलों में हाईस्कूलों में कला शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। नृत्य, संगीत और ललित कला में यह नियुक्ति हुई है। ये शिक्षक स्कूलों में बच्चों को क्या पढ़ा रहे हैं, इसके बारे में अलग से अभी तक कोई सिलेबस नहीं बना है। ऐसे में बच्चों को बिहार की समृद्ध कला संस्कृति से जोड़ने को लेकर यह रिसोर्स बैंक बनाया जा रहा है।
नवाचार और रचनात्मकता
परिषद के कला एवं शिल्प विभाग द्वारा बिहार के कला एवं शिल्प शिक्षकों तथा शिक्षक प्रशिक्षकों को निर्देश दिया गया है कि इस रिसोर्स बैंक में उनके नवाचार और रचनात्मक चीजों को एक साथ जोड़ा जाएगा। इससे सूबे के सभी स्कूल दूसरे स्कूलों में हो रही गतिविधियों के बारे में जान सकेंगे और उसका फायदा भी उन्हें मिलेगा। इसके अलावा बिहार की समृद्ध कला एवं शिल्प परंपरा को विद्यालयी शिक्षा से जोड़ा जाएगा। इससे इस विषय को नई पहचान, नई दिशा एवं व्यापक अवसर भी मिलेगा। सभी कला शिक्षकों को इसके लिए परिषद की ओर से फॉर्मेट उपलब्ध कराया गया है। इसके माध्यम से इन शिक्षकों का रजिस्ट्रेशन कराया जाना है।
रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया
दो दिनों का मिला है समय
डीईओ कुमार अरविन्द सिन्हा ने कहा कि स्कूलों में नियुक्त जितने भी कला शिक्षक हैं, वे दो दिनों में रजिस्ट्रेशन करा लेंगे। इसके तहत उन्हें समय-समय पर प्रशिक्षण में भी बुलाया जाएगा।


