पीएचडी: कोर्स वर्क में 55 प्रतिशत से कम अंक तो नहीं जमा होगा थीसिस
बीआरएबीयू के विश्वविद्यालयों में पीएचडी कोर्स वर्क की परीक्षा में 55 प्रतिशत अंक नहीं आये तो थीसिस जमा नहीं हो सकेगी। इसके साथ ही पीएचडी के नये रेगुलेशन में शोधार्थियों को अप्रेंटिसशिप भी करनी होगी। संबद्ध कॉलेजों के शिक्षक भी अब पीएचडी करा सकेंगे। रिसर्च प्रस्ताव की पहले जांच की जाएगी।

मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। बीआरएबीयू के विश्वविद्यालयों में पीएचडी कोर्स वर्क की परीक्षा में 55 प्रतिशत अंक नहीं आये तो थीसिस जमा नहीं हो सकेगी। लोकभवन की तरफ से पीएचडी के नये रेगुलेशन में यह नियम लागू किया गया है।
नये नियमों की जानकारी
पीएचडी करने वाले शोधार्थियों को हर हाल में 55 प्रतिशत अंक लाने होंगे। बीआरएबीयू में इस वर्ष से पीएचडी कोर्स वर्क की केंद्रीयकृत परीक्षा भी शुरू होने जा रही है। अबतक सभी विभाग अपनी-अपनी पीएचडी कोर्स वर्क की परीक्षा लेते थे। छात्रों को पीएचडी के दौरान अप्रेंटिसशिप भी करनी होगी। सभी विभाग अपने-अपने पीएचडी छात्रों को हफ्ते में चार से छह घंटे तक अप्रेंटिसशिप करायेंगे। इस अप्रेंटिसशिप में छात्रों को शिक्षण कौशल सिखाया जायेगा। किस तरह छात्रों को पढ़ाया जाता है, इसकी जानकारी दी जायेगी।
संबद्ध कॉलेज के शिक्षक भी करा सकेंगे पीएचडी
पीएचडी के नये रेगुलेशन में कहा गया कि स्वीकृत सीट पर पढ़ाने वाले संबद्ध कॉलेजों के शिक्षक भी पीएचडी करा सकते हैं। बीआरएबीयू में अब संबद्ध कॉलेजों के शिक्षक पीएचडी के गाइड नहीं बन रहे थे। नये रेगुलेशन से पीएचडी के सुपरवाइजर की कमी को दूर करने में आसानी होगी। संबद्ध कॉलेजों को गाइड नहीं बनने देने के फैसले का संबद्ध कॉलेज के शिक्षकों ने विरोध भी किया था।
रिसर्च प्रस्ताव की पहले की जायेगी जांच
पीएचडी के नये रेगुलेशन के लागू होने पर शोधार्थी के द्वारा दिये गये रिसर्च प्रस्ताव की पहले जांच की जायेगी। यह जांच रिसर्च एडवाइजरी कमेटी करेगी। सभी पीएचडी छात्रों को इस कमेटी से गुजर कर जाना होगा। रिसर्च प्रस्ताव की जांच छात्र के सुपरवाइजर करेंगे। वह देखेंगे कि यह विषय नया है या इसपर पहले भी शोध किया जा चुका है। सुपरवाइजर का काम शोधार्थी के रिसर्च मेथेडोलॉजी का प्रारूप भी तैयार करना है। हर सेमेस्टर में पीएचडी छात्र को रिसर्च एडवाइजरी कमेटी के पास जाकर शोध में हो रहे काम के बारे में बताना होगा।
बीआरएबीयू में फंसी पीएचडी की कई सीटें
बीआरएबीयू में पीएचडी की कई सीटें फंस गयी हैं। पीएचडी के नये रेगुलेशन के अनुसार जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति तीन साल बच गई है, उनके अंडर में कोई शोध नहीं होगा। बीआरएबीयू के कई विभागों में शिक्षक रिटायर हो रहे हैं और उनके अंडर पीएचडी की सीटें हैं। ताजा मामला मैथिली विभाग का है। यहां के विभागाध्यक्ष दो वर्ष में रिटायर हो रहे हैं, और उनके अंडर पीएचडी की सीटें हैं। मैथिली विभाग में आठ छात्रों को पीएचडी करनी है, इनमें नेट, जेआरएफ और पीएचडी प्रवेश परीक्षा पास छात्र हैं। छात्रों ने बताया कि पीएचडी के रेगुलेशन आने से पहले उनका रिजल्ट आ गया था। अब नये रेगुलेशन से उनकी पीएचडी फंस रही है। हिन्दी, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र जैसे विषयों में भी शिक्षक रिटायर होने वाले हैं।


