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Indian Army Chief: जानें लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी की खासियतें, मिलने वाली है भारतीय सेना की कमान

New Indian Army Chief: आपको बता दें कि जनरल पांडे 30 जून को रिटायर हो रहे हैं। सरकार ने पिछले महीने जनरल पांडे के रिटायरमेंट से कुछ दिन पहले उनका कार्यकाल एक महीने के लिए बढ़ा दिया था।

Indian Army Chief: जानें लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी की खासियतें, मिलने वाली है भारतीय सेना की कमान
Himanshu Jhaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्ली।Wed, 12 Jun 2024 11:09 AM
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New Indian Army Chief: केंद्र सरकार ने मंगलवार की रात लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी को देश का अगला सेना प्रमुख बनाने का ऐलान किया। वह सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे का स्थान लेंगे। लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेदी को चीन और पाकिस्तान से सटी सीमाओं पर काम करने व्यापक अनुभव है। वह वर्तमान में उप सेना प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं।

आपको बता दें कि जनरल पांडे 30 जून को रिटायर हो रहे हैं। सरकार ने पिछले महीने जनरल पांडे के रिटायरमेंट से कुछ दिन पहले उनका कार्यकाल एक महीने के लिए बढ़ा दिया था। इससे पहले जनरल पांडे को 31 मई को रिटायर होने वाले थे।

लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेदी के बाद सबसे वरिष्ठ अधिकारी सेना के दक्षिणी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार सिंह हैं। लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेदी और लेफ्टिनेंट जनरल सिंह दोनों की रिटायरमेंट तारीख 30 जून के लिए निर्धारित है। आपको बता दें कि सेना के तीनों अंगों के प्रमुख 62 वर्ष की आयु तक ही अपने पद पर रह सकते हैं। लेफ्टिनेंट जनरल रैंक के अधिकारियों की रिटायरमेंट आयु 60 वर्ष है।

कौन हैं लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेदी?
लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेदी ने 19 फरवरी को उप सेना प्रमुख का पदभार संभाला था। उप सेना प्रमुख का पदभार संभालने से पहले लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेदी 2022-2024 तक उत्तरी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में कार्यरत थे।

एक जुलाई 1964 को उनका जन्म हुआ था। उन्होंने रीवा स्थित सैनिक स्कूल से स्कूली शिक्षा प्राप्त की थी। वह 15 दिसंबर 1984 को भारतीय सेना की 18-जम्मू कश्मीर राइफल्स में शामिल हुए थे। बाद में उन्होंने यूनिट की कमान संभाली।

उन्होंने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों का भी बखूबी संचालन किया है। लद्दाख में झड़प के बाद संबंधों को पटरी पर लाने के लिए उपेंद्र द्विवेदी चीन के साथ चल रही बातचीत में सक्रिय रूप से शामिल थे। 

उन्होंने सबसे बड़ी भारतीय सेना कमान के आधुनिकीकरण के लिए भी जाना जाता है। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत के तहत स्वदेशी उपकरणों को शामिल करने का काम किया। 

लगभग 40 वर्षों के करियर को दौरान उनकी 18 जम्मू और कश्मीर राइफल्स, 26 सेक्टर असम राइफल्स, महानिरीक्षक, असम राइफल्स (पूर्व) और 9 कोर की कमान की जिम्मेदारी दी गई।