नेहरू स्टेडियम में खिलाड़ियों के लिए नया हॉस्टल बनेगा
नेहरू स्टेडियम में खिलाड़ियों के हॉस्टल के तोड़े जाने के बाद अब नए हॉस्टल का निर्माण किया जाएगा। कार्यदायी एजेंसी अब एचएसआईआईडीसी होगी। पुराने हॉस्टल को असुरक्षित घोषित किया गया था और उसका उपयोग पिछले दस साल से नहीं हो रहा था। नए हॉस्टल से खिलाड़ियों को ठहरने की सुविधा फिर से मिलेगी।

गुरुग्राम, साक्षी रावत। नेहरू स्टेडियम में करीब एक दशक से बंद पड़े खिलाड़ियों के हॉस्टल के दिन अब बदलने की उम्मीद है। पुराने और असुरक्षित घोषित भवन को अब तोड़कर उसकी जगह नया हॉस्टल बनाया जाएगा। जिला खेल विभाग ने इस काम को आगे बढ़ाने के लिए कार्यदायी एजेंसी बदल दी है। पहले पुराने हॉस्टल को तोड़ने और निर्माण की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को दी गई थी, लेकिन काम में लगातार हो रही देरी के कारण अब यह जिम्मेदारी हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) को सौंप दी गई है। पुराने हॉस्टल के बंद होने का सबसे सीधा असर खिलाड़ियों पर पड़ा है। नेहरू स्टेडियम में नियमित प्रशिक्षण लेने वाले खिलाड़ियों के अलावा राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं व प्रशिक्षण शिविरों के लिए दूसरे जिलों से आने वाले खिलाड़ियों के ठहरने की सुविधा लंबे समय से उपलब्ध नहीं है। हॉस्टल बंद होने के बाद खिलाड़ियों को निजी स्तर पर ठहरने की व्यवस्था करनी पड़ती है। नया हॉस्टल बनने के बाद यह परेशानी काफी हद तक दूर होने की उम्मीद है। जिला खेल अधिकारी आरती कोहली ने बताया कि पुराना हॉस्टल असुरक्षित घोषित होने के बाद से बंद है। पुराने भवन को हटाकर उसकी जगह नया हॉस्टल बनाने की योजना है। पहले यह काम पीडब्ल्यूडी के माध्यम से कराया जाना था, लेकिन काम में देरी के कारण अब जिम्मेदारी एचएसआईडीसी को दी गई है। उन्होंने बताया कि पुराने ढांचे को हटाने के बाद नए हॉस्टल के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी。
सुरक्षा के लिहाज से बंद किया गया था भवन:
नेहरू स्टेडियम परिसर में वर्षों पुराना हॉस्टल बना हुआ था। समय के साथ भवन जर्जर होने लगा और इसकी स्थिति खिलाड़ियों के रहने के अनुकूल नहीं रही। सुरक्षा को देखते हुए भवन को असुरक्षित घोषित कर दिया गया और इसके बाद हॉस्टल को बंद कर दिया गया। करीब दस साल से यह भवन उपयोग में नहीं है। लंबे समय से बंद रहने के कारण अब यह ढांचा खुद स्टेडियम परिसर में एक अनुपयोगी और जर्जर संरचना के रूप में खड़ा है।
खेल विभाग की योजना अब इस पुराने ढांचे को पूरी तरह हटाकर उसी स्थान पर खिलाड़ियों के लिए नया छात्रावास तैयार करने की है।
इससे एक तरफ असुरक्षित भवन हटेगा और दूसरी तरफ लंबे समय से बंद पड़ी खिलाड़ियों की जरूरी सुविधा दोबारा विकसित होगी।
सात लाख का टेंडर हुआ, लेकिन नहीं शुरू हुआ काम:
पुराने हॉस्टल को गिराने के लिए पहले भी प्रक्रिया शुरू की गई थी। लोक निर्माण विभाग के माध्यम से करीब सात लाख रुपये का टेंडर किया गया था। टेंडर होने के बाद उम्मीद थी कि जल्द ही भवन को गिराकर नए निर्माण का रास्ता साफ कर दिया जाएगा। हालांकि इसके बाद भी मौके पर काम शुरू नहीं हो पाया। काम शुरू नहीं होने के कारण नए हॉस्टल का निर्माण भी आगे नहीं बढ़ सका। मामला लंबे समय तक प्रक्रिया में ही अटका रहा। जिला खेल विभाग की ओर से इसे आगे बढ़ाने के प्रयास किए जाते रहे, लेकिन पीडब्ल्यूडी के स्तर पर काम में अपेक्षित गति नहीं आ सकी। आखिरकार अब विभाग ने कार्यदायी एजेंसी बदलकर एचएसआईआईडीसी को जिम्मेदारी देने का फैसला किया है।
अब पहले पुराने ढांचे को हटाया जाएगा
नई व्यवस्था के तहत सबसे पहले पुराने हॉस्टल के जर्जर ढांचे को हटाने का काम किया जाएगा। भवन के ध्वस्तीकरण के बाद नए छात्रावास के निर्माण के लिए जगह तैयार होगी। इसके बाद प्रस्ताव के अनुसार नया हॉस्टल विकसित किया जाएगा। नए भवन में खिलाड़ियों के ठहरने के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसका फायदा उन खिलाड़ियों को सबसे अधिक होगा जो प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं या खेल शिविरों के लिए नेहरू स्टेडियम पहुंचते हैं। वर्तमान में हॉस्टल की सुविधा नहीं होने के कारण खिलाड़ियों को स्टेडियम से बाहर ठहरने की व्यवस्था करनी पड़ती है।
गुरुग्राम में बढ़ रही खेल गतिविधियां, हॉस्टल की जरूरत भी बढ़ी:
गुरुग्राम में खेल गतिविधियों का विस्तार होने के साथ नेहरू स्टेडियम में खिलाड़ियों की संख्या और प्रशिक्षण गतिविधियां भी बढ़ी हैं। अलग-अलग खेलों के खिलाड़ी यहां नियमित अभ्यास करते हैं। समय-समय पर राज्य और राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण शिविर तथा प्रतियोगिताएं भी आयोजित होती हैं। ऐसे में खिलाड़ियों के लिए स्टेडियम परिसर में ही ठहरने की सुविधा की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। पुराना हॉस्टल बंद होने के बाद खेल विभाग को भी प्रतियोगिताओं और शिविरों के दौरान खिलाड़ियों के ठहरने की वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ती है। नया छात्रावास तैयार होने पर इस व्यवस्था में काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
जिम्मेदारी बदलने से काम में तेजी की उम्मीद
पुराने हॉस्टल का मामला लंबे समय से अटका हुआ था। पहले पीडब्ल्यूडी को जिम्मेदारी दी गई, टेंडर भी हुआ, लेकिन ध्वस्तीकरण का काम आगे नहीं बढ़ सका। अब एचएसआईडीसी को जिम्मेदारी मिलने के बाद विभाग को उम्मीद है कि परियोजना में तेजी आएगी।
एक दशक से बंद सुविधा अब फिर शुरू होने की उम्मीद:
नेहरू स्टेडियम का हॉस्टल बंद हुए करीब दस साल हो चुके हैं। इतने लंबे समय में कई बार इसके पुनर्निर्माण की उम्मीद जगी, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। सात लाख रुपये का टेंडर होने के बावजूद काम शुरू नहीं हुआ और खिलाड़ियों को हॉस्टल की सुविधा का इंतजार करना पड़ा। अब एजेंसी बदलने के बाद इस परियोजना को नई गति मिलने की उम्मीद है। पुराने भवन के हटने और नए छात्रावास के निर्माण से ने सिंह स्टेडियम में खिलाड़ियों के लिए ठहरने की वर्षों पुरानी समस्या का समाधान हो सकेगा। खिलाड़ियों के लिए यह सिर्फ नया भवन नहीं, बल्कि लंबे समय से बंद पड़ी एक जरूरी खेल सुविधा की वापसी होगी।


