गहरे नीले रंग की साड़ी में दिखेंगी रसोइया
झारखंड में सरकारी स्कूलों के मध्याह्न भोजन रसोइयों के लिए नया ड्रेस कोड लागू किया गया है। रसोइयों को साड़ी/धोती-कुर्ता दिया जाएगा और प्रति रसोइया 500 रुपये की राशि ट्रांसफर की जाएगी। स्कूलों को केवल चार दिन की कुकिंग कॉस्ट मिली है और अंडे की कीमत में भी प्रबंधन की चिंता है।

आनेवाले कुछ समय में जिले के सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन बनाने वाली रसोइया नए ड्रेस कोड में दिखेंगी। मध्याह्न भोजन तैयार करने के क्रम में रसाइया स्वच्छ व निर्धारित पोषाक पहनेंगे। झारखंड राज्य मध्याह्न भोजन प्राधिकरण ने पीएम पोषण शक्ति निर्माण योजना (एमडीएम) के तहत कार्यरत रसोइया सह सहायिका को साड़ी/धोती-कुर्ता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। दो सेट साड़ी/धोती के लिए प्रति रसोइया पांच सौ रुपए बैंक एकाउंट में ट्रांसफर किए जाएंगे। 30 जून तक राशि पीएफएमएस पोर्टल में अपलोड करने को कहा गया है। धनबाद में इसका लाभ 3550 रसोइया को मिलेगा। राज्यभर में 75,376 रसोइया कार्यरत हैं। जानकारों का कहना है कि सूती साड़ी का रंग गहरा नीला होगा। पाड़ एवं आंचल मैरून रंग व ब्लाउज मैरून रंग का होगा। पुरुष रसोइया के लिए सूती धोती का रंग सफेद व कोर नीला होगा। कुर्ता मैरून रंग का होगा। राज्य प्राधिकरण ने निर्देश दिया है कि जिला/ प्रखंड की ओर से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल नियमानुकूल कार्यरत एवं अनुमोदित रसोइया सह सहायिकाओं को ही इसका लाभ दिया जाए। साड़ी/ धोती की उपलब्धता का अभिलेख विद्यालय स्तर पर संधारित किया जाएगा। अभिलेख की प्रति जिला/ प्रखंड में भी सुरक्षित रखा जाएगा.
मध्याह्न भोजन योजना की स्थिति
राज्य मुख्यालय ने कहा है कि जिला व प्रखंड की ओर से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी परिस्थिति में वैसे किसी रसोइया का नाम अपलोड नहीं होना चाहिए, जो वास्तविक रूप में कार्यरत नहीं है। राज्य मुख्यालय से निर्देश मिलने के बाद जिला कार्यालय ने इसकी कवायद शुरू कर दी है.
कुकिंग कॉस्ट की किल्लत
मध्याह्न भोजन योजना के संचालन के लिए कुकिंग कॉस्ट राशि की किल्लत झेल रहे स्कूलों को जिला कार्यालय की ओर से मात्र चार दिन की राशि मिली है। स्कूलों का कहना है कि कुकिंग कॉस्ट की राशि माइनस में चल रही है। दर्जनों स्कूलों पर 40-50 हजार रुपए की उधारी हो गई है। विभाग की ओर से चार दिन की राशि भेजी गई है। इससे क्या होगा.
अंडे की कीमतें
बाजार में अंडा 8 रुपए का, स्कूल को मिल रहा 6 रुपए. स्कूलों को पूरक पोषाहार के तहत अंडा/ फल बच्चों को देने के लिए 17 दिन की राशि मिली है। इससे स्कूलों को कुछ राहत होगी। वहीं अंडा की कीमत से स्कूल प्रबंधन परेशान है। शिक्षकों का कहना है कि विभाग से एक अंडा का छह रुपए मिलता है, जबकि बाजार में वर्तमान में एक अंडा सात से आठ रुपए में मिल रहा है। विभाग स्कूलों की परेशानी को समझे। बाजार कीमत के आधार पर अंडा की कीमत तय कर स्कूलों को जारी करे.
सामान्य प्रश्न
लेखक के बारे में
Amit Wattsशॉर्ट बायो: अमित वत्स पिछले 23 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में प्रारंभिक शिक्षा, माध्यमिक, उच्च शिक्षा व तकनीकी शिक्षा का कवरेज कर रहे हैं।
परिचय एवं अनुभव
अमित वत्स पत्रकारिता जगत में जाना पहचाना नाम हैं। पत्रकारिता में 23 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में हिन्दुस्तान धनबाद संस्करण में एजुकेशन व रोजगार से जुड़े बीट की रिपोर्टिंग करते हैं। एजुकेशन बीट पर मजबूत पकड़ है।
करियर का सफर
अमित ने करियर की शुरुआत वर्ष 2002 में दैनिक जागरण से की। बहुत ही कम समय में प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। प्रारंभिक वर्षों में ही एजुकेशन बीट पर पकड़ बनाई। वर्ष 2009 में हिन्दुस्तान से जुड़े। उसके बाद पिछले 16 वर्षों से हिन्दुस्तान में शिक्षा समेत अन्य बीट का नेतृत्व कर रहे हैं। लाइव हिन्दुस्तान के लिए भी लगातार खबरें लिख रहे हैं।
शैक्षणिक पृष्टभूमि और एजुकेशन रिपोर्टिंग
बीएड, एमए एजुकेशन के साथ ही मॉस कम्युनिकेशन की पढ़ाई का लाभ अमित को एजुकेशन बीट की रिपोर्टिंग में मिला। इसकारण एजुकेशन बीट पर कमांड होने के साथ ही आईआईटी धनबाद, यूनिवर्सिटी शोध की खबरें, वंचितों को मुख्यधारा से जोड़ने व एक्सक्लूसिव स्टोरी लिखते हैं।
शिक्षा और रोजगार
शिक्षा को सीधे आर्थिक अवसरों और रोजगार से जोड़ने पर केंद्रित विश्लेषण समेत अन्य एक्सक्लूसिव खबरें लिखी है। शिक्षा से संबंधित खबरों पर अमित की गहरी समझ है। अमित का मानना है कि तथ्य आधारित व विश्वसनीयता पत्रकारिता का महत्वपूर्ण अंग है। पाठकों को सटीक जानकारी मिलनी चाहिए। रिपोर्टिंग में विशेषकर छात्र केन्द्रित दृष्टिकोण जरूरी है।
विशेषज्ञता
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