राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बाद देश के कई मंदिरों में सख्ती
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की पारदर्शिता को बढ़ाने के लिए कई प्रमुख मंदिरों ने नए नियम लागू किए हैं। बाबा बालक नाथ मंदिर और अंबाजी मंदिर में कपड़े पहनने पर नियम लगाए गए हैं। कर्नाटक सरकार ने मंदिरों में चढ़ावे की सुरक्षा के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है।

हमीरपुर/पालनपुर, एजेंसी। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा प्रकरण के बाद देश के कई प्रमुख मंदिरों ने दान की गिनती की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी एवं सुरक्षित बनाने के लिए नए नियम लागू किए हैं। इनमें दान गिनने वाले कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाले कपड़े पहनना अनिवार्य किया गया है। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर स्थित बाबा बालक नाथ मंदिर और गुजरात के प्रसिद्ध अंबाजी मंदिर ने इस तरह के नियम लागू किए हैं। कर्नाटक सरकार ने मंदिरों में चढ़ावे की सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। बाबा बालक नाथ मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, मंदिर में पहले से ही अधिकृत कर्मचारियों और अधिकारियों की मौजूदगी में तथा सीसीटीवी निगरानी के बीच नकद चढ़ावे की गिनती की जाती है।
अब पारदर्शिता और ईमानदारी सुनिश्चित करने के लिए बिना जेब वाले वस्त्र पहनना भी अनिवार्य कर दिया गया है। उधर, गुजरात के अंबाजी मंदिर में भी दान की गिनती के लिए कड़े दिशा-निर्देश लागू किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, पूरी प्रक्रिया का 20 से अधिक सीसीटीवी कैमरों से रिकॉर्डिंग होगी और फुटेज छह महीने तक सुरक्षित रखी जाएगी। दान गिनने वाले कर्मचारियों की गिनती कक्ष में प्रवेश से पहले पुलिस की मौजूदगी में मेटल डिटेक्टर से जांच की जाएगी। उन्हें बड़े जेब वाले कपड़े पहनने की अनुमति भी नहीं होगी।वहीं, कर्नाटक सरकार की नई एसओपी के तहत मंदिरों में सीसीटीवी या वेब कैमरे लगाना अनिवार्य किया गया है। साथ ही, दान के लिए क्यूआर कोड के माध्यम से डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और चढ़ावे की गिनती व लेखा-जोखा से जुड़े कई अन्य सुरक्षा उपाय भी निर्धारित किए गए हैं।
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