स्नातक में नशीली दवाओं के दुरुपयोग की रोकथाम को होगी पढ़ाई
केंद्र सरकार ने नशामुक्त भारत अभियान के तहत स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर नशीली दवाओं के दुरुपयोग की रोकथाम के लिए नया पाठ्यक्रम शामिल करने की घोषणा की है। यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने, मानसिक स्वास्थ्य और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने में मदद करेगा।

केंद्र सरकार के नशामुक्त भारत अभियान के तहत अब स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर सभी संकायों व विषयों में नशीली दवाओं के दुरुपयोग की रोकथाम और प्रबंधन से संबंधित नया पाठ्यक्रम शामिल किया जाएगा। यूजीसी की ओर से जारी सूचना के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय की अनुशंसा पर सब्सटेंस एब्यूज : प्रिवेंशन एंड मैनेजमेंट विषय पर मॉडल पाठ्यक्रम का प्रारूप तैयार किया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप तैयार इस पाठ्यक्रम का मुख्य लक्ष्य विद्यार्थियों में मादक पदार्थों के दुष्प्रभाव के प्रति जागरूकता बढ़ाना, समय रहते इसकी पहचान करना, प्रबंधन और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देना है।
इसके साथ ही यह पाठ्यक्रम युवाओं में स्वस्थ जीवनशैली, मानसिक स्वास्थ्य, जीवन कौशल (लाइफ स्किल्स) और जिम्मेदार नागरिकता की भावना विकसित करने में भी मददगार साबित होगा। उच्च शिक्षा स्तर पर इस विषय को अनिवार्य रूप से जोड़े जाने से युवाओं को नशे की लत से बचाने और परिसरों में एक सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण निर्मित करने में बड़ी मदद मिलेगी। इस मॉडल पाठ्यक्रम को यूजीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है। आयोग ने कोल्हान विश्वविद्यालय सहित देश के सभी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, विषय विशेषज्ञों और आम नागरिकों से इस प्रारूप पर राय और सुझाव देने को कहा है। सभी लोग इस पाठ्यक्रम को लेकर 15 दिन के भीतर अपने सुझाव ईमेल के माध्यम से भेज सकते हैं। प्राप्त उपयोगी सुझावों और प्रतिक्रिया के आधार पर पाठ्यक्रम को अंतिम रूप दिया जाएगा, जिसके बाद इसे सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू किया जाएगा।


