परास्नातक में विषय बाध्यता समाप्त, गैप मामलों में भी राहत
महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय में विश्वविद्यालय प्रवेश समिति की बैठक में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नई प्रवेश नियमावली को सर्वसम्मति से पारित किया गया। अब छात्र किसी भी विषय में प्रवेश ले सकेंगे। इसके अलावा, विदेशी छात्रों के लिए वर्ष में दो बार प्रवेश प्रक्रिया आयोजित करने का निर्णय लिया गया।

महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति कार्यालय स्थित समिति कक्ष में कुलपति की अध्यक्षता में बुधवार को विश्वविद्यालय प्रवेश समिति की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नई प्रवेश नियमावली को सर्वसम्मति से पारित किया गया। परास्नातक में अब छात्र किसी भी विषय में प्रवेश ले सकेगा, इसके लिए बाध्यता समाप्त कर दी गई है कि वह विषय लास्ट सेमेस्टर में उसके पास रहा हो या बीए में उसने वह विषय पढ़ा हो। खासतौर से एमए के लिए पूरी तरह से बाध्यता समाप्त की गई है। वहीं पढ़ाई गैप होने पर एक वर्ष के गैप होने पर कटने वाले दो अंक के प्राविधान को समाप्त कर दिया गया है। कुल मिलाकर नई शिक्षा नीति के अनुरूप स्नातकोत्तर करने के लिए अब छात्रों को कई अवसर मिलेंगे। इसका सार्वाधिक लाभ दर्शनशास्त्र व संस्कृत जैसे विषयों को मिलेगा।
विदेशी छात्रों के प्रवेश प्रक्रिया
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केपी सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि विदेशी छात्रों के लिए अब वर्ष में दो बार प्रवेश प्रक्रिया आयोजित की जाएगी, ताकि वीजा या स्कॉलरशिप में देरी होने पर उनका शैक्षणिक सत्र खराब न हो। इसके अलावा, कॉलेजों से उनके स्थानीय स्तर पर स्किल, इनोवेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े नए सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने के लिए प्रस्ताव मांगे गए हैं, जिन्हें आगामी एकेडमिक काउंसिल की बैठक में पास कराया जाएगा। प्रवेश समिति ने सत्र 2026-27 के लिए नई प्रवेश नियमावली को हरी झंडी दे दी है। इसे तीन खंडों (क, ख, ग) में विभाजित किया गया है, जिसमें विश्वविद्यालय परिसर और संबद्ध कॉलेजों में प्रवेश, आरक्षण, भारण (वेटेज), विषय चयन और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के नियम स्पष्ट किए गए हैं। कला संकाय के विषयों को चार वर्गों में बांटा गया है, जिससे छात्रों को विषय चुनने में आसानी होगी। कुलपति प्रो. केपी सिंह ने कहा कि एनईपी-2020 के अनुरूप पात्रता मानदंडों को अधिक लचीला और समावेशी बनाया गया है, जिससे हर वर्ग को समान अवसर मिलेंगे। बैठक में कुलसचिव महेंद्र कुमार सिंह, प्रो. सुमित्रा कुकरेती, प्रो. एस.के. पाण्डेय, प्रो. उपेन्द्र कुमार, प्रो. अमित सिंह, प्रो. वंदना शर्मा, प्रो. आरिफ नदीम समेत अन्य मौजूद रहे।
प्रवेश नियमों में किए गए प्रमुख बदलाव
बैठक में एमएड पाठ्यक्रम में प्रवेश की जटिल प्रक्रिया को खत्म कर अब सीधे मेरिट के आधार पर प्रवेश दिए जाएंगे। डीएलएड में प्रवेश के लिए अब न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले छात्र भी योग्य माने जाएंगे। एनईपी-2020 के तहत स्नातक उत्तीर्ण छात्र सीधे एमए में प्रवेश ले सकेंगे। वहीं, फिजिक्स, केमिस्ट्री व मैथ्स से बीएससी करने वाले छात्र अब बीटेक लेटरल एंट्री के लिए पात्र होंगे। विश्वविद्यालय परिसर में संचालित एमएससी रसायन विज्ञान, पादत विज्ञान और जीव विज्ञान में 10-10 अतिरिक्त सीटों की बढ़ोतरी की गई है। जामिया उर्दू अलीगढ़ और महर्षि संदीपनी संस्कृत शिक्षा बोर्ड से 12वीं करने वाले छात्र अब स्नातक प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश ले सकेंगे।


