एसआरएन में पहली बार ब्रेन की हुई डिजिटल सब्ट्रैक्शन एंजियोग्राफी
प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग ने एंडोवेस्कुलर तकनीक से 45 वर्षीय महिला को नया जीवन देने में सफलता हासिल की। गुरु डॉक्टरों की टीम ने कार्डियोलॉजी विभाग की कैथ लैब में इस प्रक्रिया को अंजाम दिया। सब-अरैक्नॉइड हेमरेज़ के एक प्रमुख कारण एन्यूरिज्म को पहचानने की प्रक्रिया की गई।

प्रयागराज। एसआरएन अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग ने न्यूरो इंटरवेंशन के क्षेत्र में बड़ी कामयाबी हासिल की है। विभाग की डॉक्टरों की टीम ने पहली बार एंडोवेस्कुलर तकनीक से डिजिटल सब्ट्रैक्शन एंजियोग्राफी करके 45 वर्षीय महिला को नया जीवन दिया। न्यूरोसर्जरी विभाग में कैथ लैब नहीं होने के कारण यह प्रक्रिया कार्डियोलॉजी विभाग के कैथ लैब में सम्पन्न की गई।डॉक्टरों के अनुसार मस्तिष्क में अचानक होने वाले रक्तस्राव (जिसे सब-अरैक्नॉइड हेमरेज़ कहा जाता है) का एक प्रमुख कारण मस्तिष्क की रक्त वाहिका में बनी गुब्बारेनुमा गांठ यानी एन्यूरिज्म का फटना होता है। ऐसी स्थिति में मरीज को अचानक असहनीय सिरदर्द, उल्टी, लकवा व बेहोशी जैसी गंभीर समस्या हो सकती है।
एन्यूरिज्म की पहचान के लिए सीटी एंजियोग्राफी और जरूरत पर डिजिटल सब्ट्रैक्शन एंजियोग्राफी की जाती है। टीम में न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज गुप्ता, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. अर्पित पाठक, डॉ. यतीश जोशी शामिल रहे।


