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24 नवंबर, 2020|12:50|IST

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रॉ चीफ से मिलकर नरम पड़े नेपाली प्रधानमंत्री ओली के तेवर, पुराना नक्शा ट्वीट कर दी विजयदशमी की बधाई

kp sharma oli

भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के चीफ की नेपाल यात्रा के बाद वहां के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के तेवर नरम हुए हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री ने विजयदशमी के मौके पर पुराना नक्शा ट्वीट करके अपने देश के लोगों को शुभकामनाएं दी हैं। इसे नक्शा विवाद में नेपाल के रुख में बदलाव मानते हुए अहम मोड़ माना जा रहा है। हालांकि भारत ने इसपर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

सूत्रों का कहना है कि भारत घटनाक्रम पर नजर बनाए रखेगा। भारत पहले ही नेपाल के नए नक्शे को खारिज कर चुका है, लेकिन नेपाल से रिश्तों को लेकर भारत ने कभी भी तल्ख बयानबाजी नही की। नेपाल का रुख कितना स्थायी रहता है ये देखना होगा।

नए नक्शे से हुआ था विवाद
दरअसल, नेपाल और भारत के बीच ताजा विवाद की जड़ नेपाल का नया नक्‍शा है, जिसमें काठमांडू ने भारतीय इलाकों पर दावा किया था। नेपाल ने नया नक्शा जारी करके इस नक्शे में लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को नेपाल का हिस्सा बताया था जो फिलहाल भारतीय क्षेत्र में है। इसे संसद में भी पारित कराया गया था। चीन की शह पर ओली सरकार का रवैया लगातार भारत को लेकर तल्ख हो रहा था। चीन के दखल को लेकर ओली अपने ही देश मे घिर रहे थे। उनकी कुर्सी भी खतरे में पड़ गई थी। चीन ने नेपाल के कई गांवों में कब्जा किया इसे लेकर भी नेपाल के एक बड़े वर्ग में ओली की किरकिरी हो रही थी।

अकेले में हुई मुलाकात
माना जा रहा है कि अब तक भारत-नेपाल सीमा विवाद पर सख्‍त रवैया अपनाए पीएम केपी शर्मा ओली के रुख में रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के प्रमुख सामंत कुमार गोयल से मुलाकात के बाद बदलाव आया है। इससे पहले गोयल ने बुधवार रात को अकेले में ओली से उनके आधिकारिक आवास पर मुलाकात की थी।

सेना प्रमुख भी जाएंगे
भारतीय सेना प्रमुख जनरल नरवणे भी अगले महीने नेपाल की यात्रा पर जा रहे हैं। इन यात्राओं को भारत नेपाल रिश्तों में आई खटास को दूर करने और आपसी रणनीतिक संबंधों को ज्यादा भरोसेमंद बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों ने कहा, अगर नेपाल से भारत के रिश्ते अच्छे नही रहते तो इसका फायदा उठाकर चीन नेपाल में अपना दखल भी बढ़ाएगा। साथ ही नेपाल की सीमा भी खतरे में पड़ सकती है। क्योंकि भारत के सहयोगी स्वभाव से उलट चीन की विस्तारवादी नीति रही है।

रॉ प्रमुख से मुलाकात पर विवाद
इस बीच ओली रॉ प्रमुख से मिलकर अपने ही देश में विवाद में भी उलझे। इस मुलाकात को लेकर उनकी खुद की नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी ही खिलाफ खड़ी हो गई है। सत्तारूढ़ पार्टी के कई नेताओं ने पीएम ओली पर कूटनीतिक नियमों को तोड़ने का आरोप लगाया है। सत्तारूढ़ दल नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के नेता भीम रावल ने कहा कि रॉ प्रमुख गोयल और प्रधानमंत्री ओली के बीच जो बैठक हुई, वह कूटनीतिक नियमों के विरूद्ध है और इससे नेपाल के राष्ट्रहितों की पूर्ति नहीं हुई। रावल ने कहा कि चूंकि यह बैठक विदेश मंत्रालय के संबंधित संभाग के साथ बिना परामर्श के गैर पारदर्शी तरीके से हुई, ऐसे में इससे हमारी राजकीय प्रणाली कमजोर भी होगी। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के विदेश मामलों के प्रकोष्ठ के उपप्रमुख विष्णु रिजाल ने कहा कि कूटनीति नेताओं के द्वारा नहीं बल्कि राजनयिकों द्वारा संभाली जानी चाहिए।

विपक्ष ने भी ओली के खिलाफ खोला मोर्चा
प्रमुख विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस के केंद्रीय नेता गगन थापा ने ट्वीट किया कि यह बैठक न केवल कूटनीतिक नियमों का उल्लंघन है बल्कि हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा भी पैदा करती है। इसकी जांच की जानी चाहिए। पहले यह खबर भी आई थी कि रॉ चीफ गोयल ने पीएम ओली से मुलाकात से पहले नेपाल के तीन पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड, माधव कुमार नेपाल नेपाली कांग्रेस के शेर बहादुर देउबा से मुलाकात की थी। हालांकि, इन तीनों नेताओं ने गोयल के साथ अपनी मुलाकात की खबरों को गलत बताते हुए खारिज कर दिया था।

नेपाल सरकार ने बताया औपचारिक मुलाकात
नेपाली प्रधानमंत्री ओली के साथ बैठक की पुष्टि करते हुए प्रेस सलाहकार सूर्य थापा ने कहा कि रॉ चीफ गोयल ने पीएम ओली से मुलाकात की है। थापा ने इस बैठक का विवरण देने से इनकार कर दिया। नेपाली विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि इस बैठक के दौरान उनके मंत्रालय से कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं था।

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  • Web Title:Nepali Prime Minister Oli attitude softened after meeting with RAW chief congratulated Vijayadashami by tweeting old map