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10 जुलाई, 2020|5:08|IST

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लिपुलेख तक सड़क निर्माण और कालापानी के मुद्दे पर नेपाल की आपत्ति, भारतीय राजदूत को बुलाकर जताया विरोध

nepal summons indian envoy to protest opening of road to lipulekh and also raise protest for kalapan

नेपाल सरकार ने लिपुलेख क्षेत्र में भारत द्वारा किए जा रहे सड़क निर्माण का विरोध किया है। सोमवार को भारतीय राजदूत को बुलाकर इस मामले आपत्ति दर्ज कराया है। आपको बता दें कि नेपाल का दावा है कि यह इलाका उसके हिस्से में आता है। इससे पहले भारत ने शनिवार को चीन के साथ लगे सीमा पर लिपुलेख तक सड़क के निर्माण के खिलाफ नेपाल के विरोध को खारिज कर दिया था।

भारत ने कहा था कि यह क्षेत्र पूरी तरह से भारत के हिस्से में है। साथ ही यह भी कहा था कि दोनों पक्ष राजनयिक बातचीत के माध्यम से इस तरह के सीमा मुद्दों को हल कर सकते हैं।

इस मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा को काठमांडू के विदेश मंत्रालय में बुलाया गया, जहां विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली ने विरोध दर्ज कराया। इसकी जानकारी विदेश मंत्रालय ने ट्वीट कर भी दी। हालांकि इस मामले पर भारत की तरफ से कोई त्वरित प्रतिक्रिया नहीं दी गई।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश को दर्शाने वाले नए भारतीय मानचित्रों में कालापानी को उत्तराखंड का हिस्सा बताया गया था। इसके बाद नेपाल में यह मामला तूल पकड़ा। नेपाल ने कालापानी मुद्दे के समाधान के लिए वार्ता की मांग की थी, लेकिन  भारत ने इस विरोध को खारिज कर दिया। भारत ने कहा था कि नए नक्शे भारतीय क्षेत्र को सटीक रूप से चित्रित करते हैं।

इससे पहले सोमवार को विदेश मंत्री ग्यावाली ने कहा कि नेपाल भारत के साथ सीमा वार्ता आयोजित करने के लिए कोरोना संकट के खत्म होने की प्रतीक्षा नहीं कर सकता। द काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, संसद की अंतरराष्ट्रीय संबंध समिति ने ग्यावली को समन किया था। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत के साथ मामला सुलझाने के बाद नेपाल चीन से भी वार्ता करेगा। साथ ही यह भी कहा कि हम भारत के साथ किसी भी स्तर पर बातचीत के लिए तैयार हैं।

आपको बता दें कि हाल ही में चीन सीमा पर घटियाबगड़ से लिपुलेख सड़क का रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि चीन सीमा तक सड़क बनने से देश सामरिक रूप से मजबूत हुआ है। यहां से कैलास मानसरोवर यात्रा भी सुगम होगी। सेना और आइटीबीपी, एसएसबी के जवान अग्रिम चौकियों तक वाहनों से पहुंच सकेंगे। कहा कि अब कैलास मानसरोवर यात्रा 80 फीसदी यात्रा भारत में और 20 फीसदी यात्रा चीन में वाहनों से होगी। 

वहीं, इस पूरे मामले पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, 'उत्तराखंड राज्य में पिथौरागढ़ जिले में हाल ही में उद्घाटन किया गया सड़क खंड पूरी तरह से भारत के क्षेत्र में स्थित है। यह सड़क कैलाश मानसरोवर यात्रा के तीर्थयात्रियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले पहले से मौजूद मार्ग के अनुसार है।'

उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल के बीच सीमा मुद्दों के लिए एक स्थापित तंत्र है। नेपाल के साथ सीमा का परिसीमन भी जारी है। उन्होंने कहा कि भारत कूटनीतिक बातचीत के माध्यम से सीमा मुद्दों को हल करने के लिए भी प्रतिबद्ध है।

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  • Web Title:Nepal summons Indian envoy to protest opening of road to Lipulekh and also raise protest for kalapani