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PM मोदी के गुंजी दौरे से आखिर क्यों तिलमिला उठा नेपाल? प्रचंड से विपक्ष पूछ रहा सवाल 

PM Modi Uttarakhand Visit: नेपाल के विपक्षी दलों ने दावा किया कि पीएम मोदी ने नेपाल के अधिकारियों को सूचित किए बिना "हमारे क्षेत्र में आए"। उन्होंने पूछा है कि आखिर यह कैसे हुआ।

PM मोदी के गुंजी दौरे से आखिर क्यों तिलमिला उठा नेपाल? प्रचंड से विपक्ष पूछ रहा सवाल 
Himanshu Jhaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्ली।Fri, 13 Oct 2023 07:34 AM
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उत्तराखंड यात्रा से नेपाल तिलमिला उठा है। पीएम मोदी कालापानी के पास गुंजी दौरे के बाद नेपाल में विपक्ष लगातार अपनी सरकार से सवाल पूछ रहा है। नेपाल के विपक्षी दलों ने दावा किया कि पीएम मोदी ने नेपाल के अधिकारियों को सूचित किए बिना "हमारे क्षेत्र में आए"। उन्होंने पूछा है कि आखिर यह कैसे हुआ।

मुख्य विपक्षी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-यूनिफाइड मार्क्सवादी लेनिनवादी के ठाकुर प्रसाद गैरे, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के रबी लामिछाने और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के दीपक बहादुर सिंह सहित प्रमुख नेपाली सांसदों ने दावा किया कि "कालापानी में गुंजी नेपाल का क्षेत्र था"। अनुमति के बिना पीएम मोदी की यात्रा राजनयिक परंपराओं का उल्लंघन था।

आपको बता दें कि भारत-नेपाल सीमा पर कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख दोनों देशों के आधिकारिक मानचित्रों में शामिल हैं। हालांकि वे भारत के प्रशासन के अधीन हैं। जून में भारत की यात्रा के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ने कहा कि पीएम मोदी ने उन्हें विवाद को सुलझाने के लिए सब कुछ करने का आश्वासन दिया।

15 हजार फीट की ऊंचाई पर पीएम मोदी ने की पूजा-अर्चना
समुद्र तल से 15 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित ज्योलिंगकांग क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कदम रखने के साथ ही इतिहास रच दिया। वह अब तक देश के पहले प्रधानमंत्री हैं, जो चीन सीमा से लगे इस क्षेत्र में पहुंचे हैं। देश आजाद होने के 76 साल हो गए हैं, लेकिन आदि कैलास और ओम पर्वत तक कोई भी प्रधानमंत्री नहीं पहुंचे। ऐसा नहीं कि अन्य प्रधानमंत्रियों ने इस सीमांत जिले का भ्रमण नहीं किया हो, लेकिन सभी पिथौरागढ़ शहर तक ही सीमित रहे।

वर्ष 1947 में ब्रिटिश हुकूमत से आजादी मिलने के बाद देश को अब तक 15 प्रधानमंत्री मिले हैं, लेकिन अब तक कोई भी प्रधानमंत्री धारचूला के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्थित गांव तक नहीं पहुंचे। गुरुवार को पहली बार प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र ज्योलिंगकांग और गुंजी पहुंचे। स्थानीय निवासी सोनू मर्तोलिया, ग्राम प्रधान अंजू रौंकाया आदि का कहना है कि पीएम मोदी के दौरे से सीमांत क्षेत्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फलक पर नई पहचान मिलेगी। साथ ही सीमावर्ती गांवों के विकास को भी रफ्तार मिलेगी।

आपको बता दें कि पहली बार किसी प्रधानमंत्री के उच्च हिमालयी क्षेत्रों के गांवों में पहुंचने को लेकर स्थानीय नागरिकों में खासा है। प्रशासन के साथ-साथ स्थानीय लोग भी पिछले कई दिनों से पीएम के स्वागत की तैयारियों में जुटे हुए थे।

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