रिश्तेदारों को ढ़ूढ़ने के लिए शादी में कुंडली मिलान करने वाले पंडित ही एकमात्र सहारा नेपाल में आए त्रासदी में
हिन्दुस्तान विशेष केके गौरव। भागलपुर, कार्यालय संवाददाता। नेपाल में आई त्रासदी

हिन्दुस्तान विशेष केके गौरव।
भागलपुर, कार्यालय संवाददाता।
नेपाल में आई त्रासदी बाढ़ ने इंडो - नेपाल के रिश्तेदारों के नींद उड़ा दी है। दोनों के देशों के कई रिश्तेदार से पिछले 15 दिनों से किसी भी तरह का संपर्क नहीं हो पा रहा है। ऐसे में रिश्तेदारों को किसी अनहोनी आशंका सताने लगी है। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले कई नेपाली परिवार जिनका रिश्ता भारत में है, उनके घर बह गए हैं। ऐसे में वे लोग सुरक्षित हैं या भी नहीं इसकी भी चिंता सता रही है। एक दूसरे देश पार ब्याही गई बेटियों और रिश्तेदारों की तलाश में अब भारतीय परिवारों को आधुनिक तकनीक या पुलिस तंत्र की नहीं। पारंपरिक ज्योतिषियों और शादी में कुंडली मिलान करने वाले पंडितों की शरण लेनी पड़ रही है। पंडित से ही कई अन्य तरह की जानकारी ले रहे हैं। पंडित रविकांत शास्त्री कहते हैं कि वे मूल रूप से विराटनगर के रहने वाले है। नेपाल में आए बाढ़ के बाद कई परिवारों का सुराग नहीं लग रहा है। कई लोग आ रहे हैं कि कोई दूसरे रिश्तेदारों का नंबर, हूलिया या अन्य रिश्तेदारों का नाम पता दें。
गुड़िया के मााता पिता और भाई का नहीं लग रहा फोन
भागलपुर के भीखनपुर की रहने वाली गुड़िया मूल रूप से नेपाल की रहने वाली है। उनकी शादी 2022 में भीखनपुर के रूपेश कुमार मिश्रा से हुई थी। सब कुछ ठीक चल रहा था। लेकिन अचानक नेपाल में आए त्रासदी के बाद उनके माता पिता और भाई का फोन नहीं लग रहा है। नवगछिया के रहने वाले मयंक कुमार के बहन की शादी फरवरी 2025 में हुई थी। बहन समेत किसी भी रिश्तेदार का कॉल नेपाल में 15 दिनों से नहीं लग रहा है। पूर्णिया के बरसौनी की रहने वाली राधा देवी भी पिछले 15 दिनों से परेशान है। उनके दोनों की बेटी जिनकी शादी नेपाल में 2015 में हुई थी। उनका भी कॉल नहीं लग रहा है।
अपनों को तलाशते बेबस परिवार और पंडितों का सहारा
भागलपुर, पूर्णिया और नवगछिया क्षेत्र के दर्जनों ऐसे परिवार हैं। जिनकी बेटियों की शादियां नेपाल के विभिन्न इलाकों में हुई थीं। नेपाल में आए इस प्रलयकारी संकट के बाद से उन परिवारों का अपने रिश्तेदारों से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। न तो मोबाइल नेटवर्क काम कर रहा है और न ही स्थानीय प्रशासन से कोई ठोस सूचना मिल पा रही है। सरकारी तंत्र और हेल्पलाइनों से नाउम्मीद हो चुके ये परिजन अब उन पंडितों के दरवाजे पर पहुंच रहे हैं। जिन्होंने कभी इन शादियों के वक्त कुंडलियां मिलाई थीं। ताकि पंडित के मार्फत ही कोई सुराग रिश्तेदारों की मिल सके।
रिश्तेदारों के हुलिया की जानकारी के लिए ज्योतिष की शरण में
एक दूसरे से सपंर्क नहीं होने से ज्योतिषियों के पास जाकर गायब हुए रिश्तेदारों की जन्मपत्री, विवाह की तारीख, उनका गोत्र, पैतृक नाम, हुलिया और अन्य विवरण जुटा रहे हैं। लोग पंडितों से यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि पारिवारिक पृष्ठभूमि के आधार पर वे नेपाल में किस संभावित रिश्तेदार या ठिकाने के संपर्क में हो सकते हैं।


