नीट धांधली : रविशंकर ने मूल अभ्यर्थी, मेडिकल छात्र और बायोमीट्रिक कर्मियों को पहचाना
नीट यूजी पुनर्परीक्षा 2026 में धांधली के मुख्य अभियुक्त डॉ. रविशंकर ने दो दर्जन से अधिक मूल अभ्यर्थियों और मेडिकल छात्रों की पहचान की है। ईओयू ने अभियुक्तों से लंबी पूछताछ की और विवरण प्राप्त किए। डॉ. रविशंकर ने स्वीकार किया कि वह 2022 से प्रतियोगिता परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा कर रहा था।

नीट यूजी पुनर्परीक्षा 2026 धांधली कांड के मुख्य अभियुक्त और पावापुरी मेडिकल कॉलेज (नालंदा) के छात्र डॉ. रविशंकर उर्फ सम्राट ने धांधली में शामिल दो दर्जन से अधिक मूल अभ्यर्थी, मेडिकल छात्र और बायोमीट्रिक कर्मियों की पहचान की है। इनमें करीब एक दर्जन मेडिकल छात्र हैं, जिनको मूल अभ्यर्थियों की जगह स्कॉलर बना कर विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर बिठाया गया था। यह छात्र देश के विभिन्न राज्यों के मेडिकल कॉलेजों से बुलाए गए थे। सत्यापन के आधार पर ईओयू की टीम अब आरोपितों को गिरफ्तार करने का अभियान चलाएगी। आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की टीम ने रिमांड पर लिए गये डॉ. रविशंकर और उसके भाई अश्विनी कुमार से शनिवार को लंबी पूछताछ की। इस पूछताछ के दौरान ईओयू टीम ने अभियुक्तों को मूल परीक्षार्थियों, स्कॉलर बने मेडिकल छात्रों और उनकी मदद करने वाले बायोमीट्रिक कर्मियों की तस्वीरें डॉ. रविशंकर को दिखाई। रविशंकर ने इन तस्वीरों को देख कर उनकी पहचान सुनिश्चित की। इसके बाद दोनों अभियुक्तों को वापस न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल भेज दिया गया।
पूछताछ के दौरान संबंधित सवाल
सूत्रों के मुताबिक आरोपितों से एनटीए की ओर से ली गयी नीट परीक्षा व नीट पुनर्परीक्षा, आर्यभट्ट ज्ञान विवि की एमबीबीएस परीक्षा और बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग की हवलदार अनुदेशक परीक्षा में धांधली से जुड़े कई सवाल पूछे गए। अभियुक्तों के फ्लैट से बरामद एमबीबीएस, एईडीओ सहित कई परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड व अन्य प्रमाण पत्रों से संबंधित जानकारी भी मांगी गयी। डॉ. रविशंकर और अश्विनी ने पहले इन सवालों को टालने की कोशिश की। मगर जब ईओयू ने इससे संबंधित इलेक्ट्रॉनिक व अन्य साक्ष्य दिखाए तो उन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। उसने लखीसराय के तीन परीक्षा केंद्रों पर धांधली की साजिश रचने के साथ ही इसके एवज में अभ्यर्थियों से लाखों रुपये लेने की बात भी कबूल की। ईओयू सूत्रों के मुताबिक, उसने धांधली में शामिल कई अन्य सहयोगियों के नाम भी बताये हैं, जिनका सत्यापन करते हुए गिरफ्तारी सुनिश्चित की जायेगी।
फर्जीवाड़ा की लंबी कहानी
2022 से प्रतियोगिता परीक्षाओं में कर रहा था फर्जीवाड़ा
सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में डॉ. रविशंकर ने स्वीकार किया है कि वह 2022 से ही नीट व अन्य प्रतियोगिता परीक्षाओं के फर्जीवाड़ा में शामिल रहा है। एमबीबीएस परीक्षा देने के नाम पर कोर्ट से गिरफ्तारी पर रोक लिया, मगर इस बीच बायोमेट्रिक वेंडरों की मदद से बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग की हवलदार अनुदेशक परीक्षा में धांधली की कोशिश की। उसने फर्जी प्रमाण पत्रों पर कई मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन कराए जाने की बात भी कबूल की।
अश्विनी कुमार और फर्जी प्रमाण पत्र
अश्विनी कुमार से उसके फ्लैट पर बरामद कई अभ्यर्थियों के मूल प्रमाण पत्र और फर्जी आय, जाति व विकलांगता प्रमाण पत्रों से जुड़ी जानकारी ली गयी। ऑनलाइन कंप्यूटर परीक्षा केंद्र से किए गये अनुबंध को लेकर भी सवाल हुआ। अश्विनी ने स्वीकार किया कि उसने आगामी नीट परीक्षा सीबीटी मोड में कराये जाने को देखते हुए ऑनलाइन सेंटर से अनुबंध किया था।


