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पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए देश के सबसे गरीब जिलों में भी जीता

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नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले एनडीए ने देश के सबसे गरीब जिलों में भी जीत हासिल की है। एक विश्लेषण में यह बात सामने आई। विश्लेषण में मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख राज्यों से हमने 30 फीसदी या उससे अधिक गरीब घरों वाले जिलों को संसदीय सीट के आधार पर चुना। 
यूपी में भाजपा ने 10 सबसे गरीब जिलों में पड़ने वाली संसदीय सीटों पर बड़े अंतर से जीत हासिल की। हालांकि इनमे से सबसे गरीब (61%) श्रावस्ती जिले में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। इस सीट से बसपा ने जीत दर्ज की।

गरीबों ने कैसे मतदान किया इसका विश्लेषण करने के लिए जिले की समृद्धि र्रैंंकग का उपयोग किया। यह जिलों में घरेलू समृद्धि व गरीबी के पैटर्न पर आधारित है। विश्लेषण में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-2016 से मिले जिला-स्तरीय संकेतकों का उपयोग किया गया है। जो गरीबी का नवीनतम अनुमान पेश करता है।

आठ संपत्तियों के आधार पर वर्गीकरण : समृद्ध, मध्यम वर्गीय व गरीबों का वर्गीकरण पक्के मकान के साथ आठ संपत्तियों बिजली कनेक्शन, फोन (लैंडलाइन या मोबाइल), टीवी, एसी या कूलर, फ्रिज, वाशिंग मशीन और वाहन (कार, बाइक, ट्रैक्टर और ट्रक) के आधार के पर किया गया है। जिनके पास घर के साथ के इनमें से छह संपत्ति है उन्हें समृद्ध माना गया है। वहीं जिनके पास घर के साथ इनमे से कोई एक संपत्ति है उसे गरीब और अन्य को मध्यमवर्गीय माना गया है। इन मानदंडों के आधार पर देशभर में 25 फीसदी से अधिक भारतीय समृद्ध हैं। वहीं 10% से ज्यादा लोग गरीब है। जबकि अन्य मध्यमर्वी आय वाली श्रेणी में आते हैं। 

यूपी के इन जिलों में मिली सफलता

56.5 फीसदी के साथ यूपी के दूसरे सबसे गरीब जिलें में भी भाजपा ने जीत दर्ज की। इसके साथ ही सीतापुर (55 फीसदी), सोनभद्र (42.4 फीसदी), कानपुर (53.1 फीसदी), हरदोई (45.1 फीसदी), बलरामपुर (45.8 फीसदी), गोंडा (43.5 फीसदी), फतेहपुर (46.4 फीसदी) और खीरी (49.9 फीसदी) जिले में सफलता हासिल की। 

बिहार में भी अच्छा प्रदर्शन

एनडीए गठबंधन ने यूपी की तरह बिहार के 10 जिलों में भी अच्छा प्रदर्शन किया है। भाजपा और उसके सहयोगी जदयू और लोजपा ने पश्चिमी चंपारण (48.2%), पूर्वी चंपारण (48.4%), अररिया (44.9%), मधुबनी (42.6%), खगड़िया (41.1 फीसदी), पूर्णिया (47.1 फीसदी), समस्तीपुर (53.6 फीसदी),  सीतामढ़ी (53.3) और कटिहार (58 फीसदी) जैसे सबसे गरीब क्षेत्रों में बड़ी जीत हासिल की। इनमें से सीतामढ़ी, पूर्णिया और कटिहार में जदयू ने, समस्तीपुर और खगड़िया में लोजपा ने जीत दर्ज की। बिहार में विपक्षी कांग्रेस ने गरीब जिलों में शामिल किशनगंज (41%) में जीत दर्ज की। बिहार और उत्तर प्रदेश में सबसे गरीब जिले और उनकी संसदीय सीटों के नाम समान हैं।

सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से जुड़ने से मिला लाभ

मध्य प्रदेश सामाजिक विज्ञान अनुसंधान संस्थान के प्रोफेसर मनु गौतम कहते हैं कि यह सिर्फ लहर की ओर इशारा करता है। इसमें सरकार की नीतियां और उनकी मेहनत दोनों शामिल है। प्रधानमंत्री मोदी ने सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से सीधे जुड़ने की रणनीति अपनाई है। उदाहरण के लिए उन्होंने प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजना आयुष्मान भारत के प्रत्येक लाभार्थी को व्यक्तिगत रूप से हस्ताक्षरित पत्र भेजे थे। 17 फरवरी को उन्होंने रांची में आयुष्मान भारत के तहह आने वाले परिवारों से मिलने के लिए रांची की यात्रा की थी।

खुलासा 

-विश्लेषण में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-2016 के संकेतकों का उपयोग हुआ है
-यूपी में भाजपा ने 10 सबसे गरीब जिलों में संसदीय सीटों पर बड़े अंतर से जीत हासिल की

एमपी-ओडिशा में फायदा

मध्य प्रदेश में 30 फीसदी या उससे अधिक गरीबी वाले तीन जिले शामिल हैं। इनर्में ंसगरौली (36 फीसदी), सीधी (30 फीसदी) और शहडोल (32 फीसदी) संसदीय सीट हैं जहां पर भाजपा ने चार लाख के अंतर से जीत हासिल की। यहां तक की भाजपा ने ओडिशा में भी गरीब जिलों वाले कालाहांडी (36.65) क्षेत्र में सफलता हासिल की।

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  • Web Title:NDA led by PM Narendra Modi also won in indias poorest districts