सिम्भावली शुगर्स के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया सही : एनसीएलएटी
राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) ने सिम्भावली शुगर के खिलाफ दीवाला प्रक्रिया को स्वीकृति दी। न्यायालय ने गन्ना किसानों के भुगतान की दावों पर ध्यान दिया, यह सुनिश्चित करते हुए कि रेज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल किसानों के बकाया का उचित मूल्यांकन करे। किसानों का कहना है कि उनका भुगतान सर्वोपरि होना चाहिए।

राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने सोमवार को सिम्भावली शुगर के खिलाफ शुरू की गई दिवाला प्रक्रिया को सही ठहराया। साथ ही, कंपनी के निलंबित निदेशक और गन्ना किसानों के एक समूह की अपीलें खारिज कर दीं। न्यायमूर्ति योगेश खन्ना और न्यायमूर्ति अजय दास मेहरोत्रा की पीठ ने एनसीएलएटी ने यह भी निर्देश दिया कि कंपनी की दिवाला प्रक्रिया संभाल रहे रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (आरपी) गन्ना किसानों द्वारा किए गए बकाया भुगतान के दावों पर कानून के अनुसार विचार करें। पीठ ने कहा कि अदालत गन्ना किसानों की चिंता को समझती है। इसलिए रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल को कंपनी के समाधान की प्रक्रिया के दौरान किसानों के दावों की उचित जांच करनी चाहिए।
गन्ना किसानों का कहना था कि उत्तर प्रदेश गन्ना (आपूर्ति एवं खरीद विनियमन) अधिनियम, 1953 के तहत उनका बकाया भुगतान सबसे पहले किया जाना चाहिए। उनका तर्क था कि बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों का दावा किसानों के कानूनी बकाये से ऊपर नहीं रखा जा सकता। प्रमुख बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने कहा कि दिवाला प्रक्रिया के दौरान भी जिला प्रशासन द्वारा हर साल जारी किए जाने वाले आदेशों के अनुसार किसानों के गन्ने का भुगतान जारी रहना चाहिए, ताकि उनके हित सुरक्षित रहें।
इस खबर पर आपकी क्या राय है?


