Navy Day 2019: Navy chief expresses concern over cuts in budget allocation - नौसेना दिवस 2019: बजट आवंटन में कटौती पर नौसेना प्रमुख ने जताई चिंता DA Image
15 दिसंबर, 2019|4:30|IST

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नौसेना दिवस 2019: बजट आवंटन में कटौती पर नौसेना प्रमुख ने जताई चिंता

navy chief admiral karambir singh  at evening of indian navy day

चीन द्वारा आक्रामक तरीके से नौसेना का विस्तार किये जाने की पृष्ठभूमि में नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने मंगलवार को अपने बल के लिये ज्यादा बजटीय आवंटन की आवाज उठाते हुए रक्षा आवंटन में नौसेना की हिस्सेदारी 2012-13 के 18 फीसद से घटकर 2018-19 में 13 फीसद रह जाने पर चिंता जताई। 

नौसेना दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित अपने वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में नौसेना प्रमुख ने कहा कि कमियों को देखते हुए जोर ''प्राथमिकता, तर्कसंगतता और व्यय की अर्थव्यवस्था पर है। उन्होंने कहा, ''रक्षा बजट में नौसेना की हिस्सेदारी 2012 के 18 फीसद के मुकाबले घटकर 2019-20 में करीब 13 फीसद रह गयी है। हमने अपनी जरूरतों को सरकार के सामने रख दिया है, हम मौजूदा संसाधनों का बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर बल के आधुनिकीकरण के लिये प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा, ''उम्मीद है कि हमें कुछ और रकम मिलेगी।


चीनी नौसेना के व्यापक विस्तार के बारे में पूछे जाने पर एडमिरल सिंह ने कहा कि वे अपनी क्षमता के अनुकूल बढ़ रहे हैं और “हम अपनी क्षमता के हिसाब से चल रहे हैं।” हिंद महासागर क्षेत्र में चीनी घुसपैठ पर एडमिरल सिंह ने कहा कि किसी भी समय सात से आठ चीनी पोत आम तौर पर क्षेत्र में मौजूद रहते हैं और पड़ोसी देश द्वारा इस क्षेत्र में तैनाती 2008 में शुरू हुई। 


प्रस्तावित चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) पर उन्होंने कहा कि रणनीतिक योजनाओं को लागू करने के लिये उसके पास पर्याप्त शक्तियां होनी चाहिए।
यह पूछे जाने पर कि मिलन नौसैनिक अभ्यास के लिये 41 अन्य देशों के साथ चीन को आमंत्रित क्यों नहीं किया गया, उन्होंने कहा कि सिर्फ समान विचार वाले राष्ट्र इसका हिस्सा होंगे। 


पड़ोस की चुनौतियों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि क्षेत्र में किसी दूसरे देश की कार्रवाई का भारत पर असर नहीं पड़ना चाहिए, और अगर असर पड़ता है तो सुरक्षा बल उससे उचित तरीके से निपटेंगे। 

 


हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिति के बारे में पूछे जाने पर नौसेना प्रमुख ने कहा कि सुरक्षित समुद्र और नियम आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिये साझा हितों को सुनिश्चित करने की खातिर भारतीय नौसेना समान विचार वाले राष्ट्रों के साथ मिलकर काम करने के लिये तैयार है। 


उन्होंने कहा कि भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच बने गठजोड़ की फिलहाल हिंद-प्रशांत क्षेत्र में कोई सैन्य भूमिका नहीं है। नौसेना प्रमुख ने कहा कि भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संतुलन कायम करने की भूमिका निभा रहा है।

 

यह पूछे जाने पर कि क्या चीन के साथ संयुक्त अभ्यास की कोई योजना है, एडमिरल सिंह ने कहा कि वह ऐसे फैसले लेने के लिये अधिकृत नहीं हैं। उन्होंने कहा, ''यह मेरे अधिकार क्षेत्र से बाहर है। नौसेना के आधुनिकीकरण की योजना के बारे में उन्होंने कहा कि अभी 50 पोत और पनडुब्बियों का निर्माण चल रहा है और उनमें से करीब 48 का निर्माण भारत में किया जा रहा है। 

 

भारतीय नौसेना द्वारा सितंबर में भारत के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र से चीनी पीएलए के पोतों को खदेड़े जाने के संदर्भ में नौसेना प्रमुख ने जोर देकर कहा कि ऐसी गतिविधियों से सख्ती से निपटा जाएगा। नौसेना की दीर्घकालीन योजना है कि उसके पास तीन विमानवाहक पोत हों जिससे दो पोत हिंद महासागर में तैनाती के लिये हमेशा तैयार रहें। 

उन्होंने कहा कि स्वदेश में विकसित पहला विमानवाहक पोत 2022 तक पूरी तरह परिचालन में आ जाएगा और उस पर मिग-29 के विमानों का बेड़ा तैनात होगा।

उन्होंने कहा कि योजना के मुताबिक दूसरा स्वदेशी विमानवाहक पोत 65 हजार टन कोटाबार विमानवाही पोत होगा जिसमें इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन होगा तथा जल्द ही इस परियोजना की मंजूरी के लिये नौसेना सरकार से मंजूरी के लिये संपर्क करेगी। 

नौसेना फिलहाल रूसी मूल के आईएनएस विक्रमादित्य का संचालन कर रही है जो भारत का एकमात्र विमानवाहक पोत है। 

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