राष्ट्रीयकृत बैंकों में हड़ताल रहने से दिनभर परेशान रहे ग्राहक
दरभंगा में बैंक कर्मचारियों ने यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के बैनर तले हड़ताल की। इससे ग्राहकों को काफी परेशानी हुई और कई लोग हड़ताल की जानकारी न होने के कारण निराश रहे। बैंक कर्मियों ने 2024 में समझौते की मांगें न मानने पर प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया।

दरभंगा। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के बैनर तले राष्ट्रव्यापी हड़ताल के परिप्रेक्ष्य में शहर में स्थित राष्ट्रीयकृत बैंकों के सभी कर्मी शुक्रवार को हड़ताल पर रहे। इस वजह से विभिन्न कार्यों से बैंक आने वाले लोगों को काफी परेशानी हुई। विभिन्न बैंक शाखाओं में ग्राहक इधर से उधर भटकते देखे गए। कई लोगों ने कहा कि हड़ताल के बारे में उन्हें पहले से जानकारी नहीं थी। इतनी गर्मी में वे बैंक आए तो पता चला कि हड़ताल है। इस वजह से उनका जरूरी काम नहीं हो सका। इस दौरान बैंक कर्मियों ने शहर में प्रदर्शन भी किया। वे सप्ताह में पांच दिवसीय बैंकिंग, पीएलआई में विभेद और 2024 में हुए द्विपक्षीय समझौते में तय मांगों को लागू नहीं करने पर आक्रोश जता रहे थे।
हड़ताल की समस्याएँ
शहर में स्थित राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मियों ने यूएफबीयू के जिला संयोजक रमण कांत मिश्रा और सह संयोजक यशवंत कुमार के नेतृत्व में अपनी शाखाओं को बंद करने के बाद दरभंगा टावर पर जोरदार प्रदर्शन व सभा की। वरिष्ठ बैंकर अजीत कुमार सिंह, आनंद मोहन ठाकुर, रामाधार सिंह, प्रदीप मिश्रा, सुनील झा और आलम ने कहा कि पांच दिवसीय बैंकिंग की मांग बैंकर 2012 से ही कर रहे हैं। सरकार और आईबीए ने बैंक कर्मियों संग फरवरी 2024 में हुए द्विपक्षीय समझौते में इसे मान भी लिया था, लेकिन सरकार की हठधर्मिता और डीएफएस के मनमाने रवैये से इसे लागू नहीं किया जा रहा है।
आंदोलन का पहला चरण
आईबोक के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज सिंह ने कहा कि देश के आर्थिक और सामाजिक ढांचे को संभालने वाले राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मी अपना वेतन कटाकर सरकार की वादाखिलाफी और तानाशाही रवैए के कारण लम्बित जायज मांगों के लिए पूरे देश में सड़क पर हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन के प्रथम चरण में पूरे देश में एक दिन की हड़ताल है। सरकार अगर अपनी जिद को नहीं छोड़ेगी तो दूसरे चरण में बैंक कर्मी 28, 29 एवं 30 सितंबर को हड़ताल और फिर 26 अक्टूबर से बेमियादी हड़ताल पर जाने को बाध्य होंगे। सभा को केनरा बैंक से कैलाश, शशांक कुमार, इंडियन बैंक से कोमल कुमारी, संजीव कुमार, स्वतंत्र कुमार, बैंक ऑफ बड़ौदा से भूपेश कुमार, सुमित कुमार, सेंट्रल बैंक से नवीन भारती, सुशील चौधरी, बैंक ऑफ इंडिया से रविन्द्र नाथ ठाकुर, विक्रम कुमार झा, स्टेट बैंक से प्रकाश कुमार, ममता कुमारी, पीएनबी से सनु ठाकुर, सुनील झा, रोहन कुमार, संतोष कुमार एवं यूनियन बैंक से अजय कुमार एवं मधेश्वर चौधरी ने आवाज बुलंद की। आईएपीसी के जिला प्रभारी राजीव चौधरी व सीटू के नारायण जी झा, किसान सभा के जिला सचिव अहमद अली तमन्ना एवं खेमयू से चन्देश्वर प्रसाद सिंह ने भी विचार रखे।


