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नेशनल मेडिकल कमीशन बिल से भ्रष्टाचार पर लगेगी रोक: हर्षवर्धन

dr  harsh vardhan  file photo

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री हर्षवर्धन ने सोमवार को लोकसभा में कहा कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक-2019 का मकसद चिकित्सा क्षेत्र में भ्रष्टाचार पर रोक लगाना है। इसमें भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) की जगह राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के गठन का प्रावधान है। इस विधेयक को सदन में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

हर्षवर्धन ने सदन में इस विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि सरकार सबको बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) में लंबे समय से भ्रष्टाचार की शिकायतें आ रही थीं। इस मामले में सीबीआई जांच भी हुई। ऐसे में इस संस्था में बदलाव करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि विधेयक में राज्यों के अधिकारों का पूरा ख्याल रखा गया है। राज्यों को इसमें संशोधन करने का अधिकार होगा।

हर्षवर्धन ने कहा कि मोदी सरकार भ्रष्टाचार को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करने की नीति पर अमल कर रही है। यह विधेयक भी इसी भावना के साथ लाया गया है। सरकार का यह कदम चिकित्सा क्षेत्र के इतिहास में सबसे बड़े सुधार के तौर पर दर्जा होगा। केंद्रीय मंत्री के जवाब के बाद द्रमुक के ए. राजा ने विधेयक पर मत विभाजन की मांग की। सदन ने 48 के मुकाबले 260 मतों से सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। इसके बाद सदन ने विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी।  

नेशनल एक्जिट टेस्ट का प्रावधान
इस विधेयक में परास्नातक (पीजी) मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश और मरीजों का इलाज करने का लाइसेंस हासिल करने के लिए नेशनल एक्जिट टेस्ट (नेक्स्ट) का प्रस्ताव किया गया है। यह कॉमन टेस्ट एमबीबीएस के चौथे वर्ष में होगा। यह परीक्षा विदेशी मेडिकल स्नातकों के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट का भी काम करेगी।

एमसीआई जिम्मेदारी निभाने में विफल रही 
चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा के महेश शर्मा ने कहा कि एमसीआई अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रही है। इस संस्था में भ्रष्टाचार की बड़े पैमाने पर शिकायतें आने पर सरकार ने तुरंत कदम उठाए। देश में कुल 536 मेडिकल कॉलेज हैं, जिनमें 121 केवल पिछले तीन साल में बने हैं। पिछले चार साल में एमबीबीएस की सीटें 25 प्रतिशत बढ़ी हैं। 

सरकार स्वायत्त संस्थाओं को कमजोर कर रही: कांग्रेस
कांग्रेस ने इस विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि सरकार स्वायत्त संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस के विन्सेंट एच. पाला ने कहा कि इस विधेयक के जरिए सरकार चिकित्सा संस्थाओं के अधिकारों को कमजोर कर अधिकतर नियंत्रण अपने हाथ में रखना चाहती है। सरकार ने इस पर स्थायी समिति की जरूरी सिफारिशों को भी नहीं माना है। उन्होंने कहा कि  विधेयक में निजी मेडिकल कॉलेजों के लिए नियम बनाने पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया है, जबकि सरकारी कॉलेजों में सुधार की कोई रूपरेख नहीं है। इसके बाद कांग्रेस के सदस्य सदन से वॉकआउट कर गए। 

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  • Web Title:National Medical Commission Bill passed by Lok Sabha