लोक अदालत में समझौते से निपटेंगे बैंक के ऋण विवाद
सुपौल में राष्ट्रीय लोक अदालत में बैंक ऋण से जुड़े मामलों के निस्तारण की तैयारी की गई है। एलडीएम और बैंक प्रबंधकों की बैठक में ऋण संबंधी मामलों की रणनीति पर चर्चा की गई। समझौता योग्य मामलों की पहचान कर जल्द निपटारे पर जोर दिया गया है।

सुपौल, हिन्दुस्तान संवाददाता आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत में बैंक ऋण से जुड़े अधिक से अधिक मामलों का आपसी समझौते के आधार पर निस्तारण कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसे लेकर सोमवार को एलडीएम, सुपौल और जिले के सभी बैंक शाखा प्रबंधकों के साथ बैठक हुई।
बैठक का उद्देश्य
जिला विधिक सेवा प्राधिकार के प्रभारी सचिव सह एसीजेएम-प्रथम मो. अफजल आलम ने बैंक अधिकारियों के साथ ऋण संबंधी मामलों के निस्तारण की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने समझौता योग्य मामलों को चिह्नित कर लोक अदालत में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया। बैठक में ऋण वसूली से संबंधित सुलहनीय मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने पर जोर दिया गया। बैंक अधिकारियों से कहा गया कि अपनी-अपनी शाखाओं में लंबित ऐसे ऋण खातों की पहचान करें, जिनमें बैंक और ऋणधारक की आपसी सहमति से विवाद का समाधान संभव है। ऐसे मामलों की सूची तैयार कर संबंधित ऋणधारकों से संपर्क करने और उन्हें राष्ट्रीय लोक अदालत में उपस्थित होने के लिए प्रेरित करने को कहा गया।
कार्यवाही और लाभ
ऋणधारकों को प्रक्रिया और लाभ की दें जानकारी: मो. अफजल आलम ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत बैंक ऋण से जुड़े मामलों के त्वरित और सरल समाधान का प्रभावी माध्यम है। इसमें दोनों पक्ष आपसी सहमति से विवाद का निपटारा कर सकते हैं। इससे लंबे समय से चल रहे मामलों में ऋणधारकों और बैंकों को राहत मिलती है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से मामले का समाधान होने पर पक्षकारों के समय और धन की भी बचत होती है। उन्होंने बैंक अधिकारियों से कहा कि समझौता योग्य मामलों में ऋणधारकों को पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराया जाए। उन्हें राष्ट्रीय लोक अदालत की प्रक्रिया और इसके लाभों के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जाए, ताकि वे बिना किसी झिझक के इसमें शामिल हो सकें। बैंक अधिकारियों को निर्धारित तिथि से पहले सभी आवश्यक कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया गया।
लंबित मामलों का समाधान
बैठक में बैंक शाखाओं में लंबित ऋण संबंधी मामलों की समीक्षा भी की गई। विभिन्न बैंकों के शाखा प्रबंधकों ने अपने-अपने बैंक में लंबित मामलों की जानकारी साझा की। अधिकारियों को कहा गया कि ऐसे मामलों को अलग से चिह्नित करें, जिनमें समझौते की संभावना है। इसके बाद संबंधित ऋणधारकों से संपर्क कर उन्हें लोक अदालत में बुलाने की कार्रवाई की जाए। बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि लोक अदालत के माध्यम से अधिक से अधिक ऋण मामलों का निस्तारण हो, ताकि बैंक और ऋणधारक के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों को समाप्त किया जा सके। बैंक अधिकारियों ने जिला विधिक सेवा प्राधिकर को हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया।


