Amroha News: मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना से संवर रही अमरोहा की अर्थव्यवस्था, मत्स्य उत्पादन में 15% का शानदार उछाल
Amroha News: मछुआरे हैं देश की पहचान, उनकी मेहनत से खुशहाल हिंदुस्तान का संदेश देते हुए 10 जुलाई को राष्ट्रीय मछुआरा दिवस मनाया गया। उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत अमरोहा में मत्स्य उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

Amroha News: मछुआरे हैं देश की पहचान, उनकी मेहनत से खुशहाल हिंदुस्तान' के संदेश के साथ दस जुलाई को राष्ट्रीय मछुआरा दिवस मनाया गया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार की 'मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना' अमरोहा जिले में नीली क्रांति का नया अध्याय लिख रही है। साल 2023-24 में शुरू हुई इस योजना का असर महज दो वर्षों में ही जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। देश के अन्नदाता की तरह ही मछुआरे भी पोषण, आजीविका और अर्थव्यवस्था की मजबूती में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मत्स्य विभाग द्वारा दी जा रही सब्सिडी और तकनीकी मार्गदर्शन के चलते ग्रामीण किसान तेजी से इस व्यवसाय की ओर रुख कर रहे हैं। अमरोहा मत्स्य विभाग की सहायक निदेशक नीतू सिंह के अनुसार, इस योजना और किसानों की जागरूकता के चलते जिले में पिछले वर्ष की तुलना में मत्स्य उत्पादन में 15 प्रतिशत की ठोस वृद्धि दर्ज की गई है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में जो उत्पादन 6592 मीट्रिक टन था, वह 2025-26 में उछलकर 8162 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है。
मत्स्य विभाग की प्रमुख योजनाएं और कैसे उठाएं लाभ
बताया कि मछुआरों के विकास के लिए 'प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना', 'निषादराज बोट सब्सिडी योजना', मत्स्य पालन के लिए 'किसान क्रेडिट कार्ड' और 'मत्स्य बीमा योजना' जैसी प्रमुख योजनाएं संचालित हैं। वहीं, मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना मुख्य रूप से ग्राम सभा के उन तालाबों के लिए है जिनका आवंटन (पट्टा) एसडीएम के माध्यम से किया जाता है। योजना का लाभ लेने के लिए सबसे अहम शर्त यह है कि तालाब के पट्टे की बची हुई अवधि कम से कम 5 वर्ष होनी चाहिए। तालाब सुधार का कार्य लाभार्थी मनरेगा या अपने निजी फंड से करा सकता है। मछली पालन की इनपुट लागत प्रति हेक्टेयर 4 लाख रुपये निर्धारित की गई है, जिस पर सरकार की ओर से सीधे लाभार्थी के खाते में 40 प्रतिशत की सब्सिडी भेजी जाती है।
कलस्टर अप्रोच और आधी आबादी की भागीदारी
जिले में मत्स्य पालन को एक बड़े उद्योग के रूप में स्थापित करने के लिए विभाग 'कलस्टर अप्रोच' पर काम कर रहा है। अमरोहा ब्लॉक के नौगावां सादात तहसील अंतर्गत कोरल न्याय पंचायत इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण बनकर उभरी है, जहा हाल ही में लगभग 300 से 350 नए निजी तालाब विकसित किए गए हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूहों को भी इस योजना से जोड़कर उन्हें तालाब आवंटित किए जा रहे हैं। महिलाएं अपनी जमीनों और आवंटित पट्टों पर मछली पालन कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मजबूत भागीदारी निभा रही हैं, जिससे रोजगार के अनेक अवसर पैदा होने के साथ-साथ जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है।
बाजार की सुलभता और प्रशासनिक सहयोग
इस व्यवसाय में किसानों के लिए सबसे अच्छी बात बाजार की सुलभता और नकद भुगतान है। अमरोहा में पैदा होने वाली मछली स्थानीय स्तर पर गजरौला, संभल और मुरादाबाद की मंडियों के अलावा 100 किलोमीटर दूर दिल्ली के गाजीपुर बाजार में भी बेची जा रही है। किसानों को तालाब से ही मछली का थोक भाव औसतन 110 रुपये प्रति किलो तक आसानी से मिल जाता है। विभाग के अनुसार, इस योजना के क्रियान्वयन में जिलाधिकारी स्तर से भी पूर्ण प्रशासनिक सहयोग मिल रहा है। बिजली विभाग या मंडी समिति से जुड़ी किसानों की किसी भी तरह की समस्या का त्वरित निस्तारण किया जा रहा है, जिससे जिले में मत्स्य पालन अपनाकर आय बढ़ाने और जीवन संवारने का माहौल और भी अनुकूल बन गया है।


