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अल्पसंख्यक की परिभाषा पर रिपोर्ट तैयार

the supreme court also issued notice to the state government and said that all actions taken pursuan

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग राज्य स्तरीय आबादी के आधार पर ''अल्पसंख्यक'' की परिभाषा तय करने की मांग से जुड़ी अपनी रिपोर्ट तैयार कर चुका है और इसमें वह इस मांग के विरुद्ध अनुशंसा कर सकता है। उच्चतम न्यायालय के आदेश के मुताबिक आयोग अपनी तीन सदस्यीय उप समिति द्वारा तैयार रिपोर्ट अगले कुछ दिनों के भीतर याचिकाकर्ता और भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय को सौंपने की तैयारी में है।

दरअसल, उपाध्याय ने शीर्ष अदालत में दायर अपनी याचिका में कहा है कि 'अल्पसंख्यक' शब्द को नये सिरे से परिभाषित करने और राष्ट्रीय स्तर पर समुदाय की आबादी के आंकड़ें की जगह, राज्य में एक समुदाय की आबादी के आधार पर फिर से विचार करने की आवश्यकता है। अल्पसंख्यक आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ''पीटीआई-भाषा'' को बताया, ''उच्चतम न्यायालय ने हमसे कहा है कि हम याचिकाकर्ता को अपनी रिपोर्ट दें। यह रिपोर्ट तैयार है और अगले कुछ दिनों के भीतर यह रिपोर्ट उन्हें सौंप दी जाएगी।''

उन्होंने कहा, ''अगर अल्पसंख्यक की राज्य आधारित परिभाषा की मांग को मान लिया जाता है तो फिर बहुत सारी जटिलतायें पैदा हो जाएंगी। आगे लोग जिला और ब्लॉक स्तरों पर परिभाषा तय करने की मांग करने लगेंगे।'' अधिकारी ने कहा, ''अल्पसंख्यक आयोग के अधिनियम के तहत राष्ट्रीय स्तर पर जो व्यवस्था पहले से मौजूद है, उसमें बदलाव की गुंजाइश नहीं है। ऐसे में राज्य स्तर पर अल्पसंख्यक को परिभाषित करने की मांग को अस्वीकार किए जाने की पूरी संभावना है।''

दरअसल, इसी साल फरवरी में उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष सैयद गैयूरुल हसन रिज़वी ने इस मामले में विचार करने एवं रिपोर्ट तैयार करने के लिए आयोग के उपाध्यक्ष जॉर्ज कुरियन की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उप समिति बनाई थी। उपाध्याय की याचिका पर न्यायालय ने 11 फरवरी को उन्हें समाधान के लिये राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग जाने के लिये कहा था। साथ ही न्यायालय ने आयोग को यह निर्देश भी दिया था कि उपाध्याय के प्रतिवेदन पर तीन महीने के भीतर निर्णय लिया जाये।

इसी महीने उपाध्याय ने नयी याचिका दायर की जिस पर न्यायालय ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल से मदद मांगी। याचिका में कहा गया है कि 2011 की जनगणना के अनुसार लक्षद्वीप, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, जम्मू कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश,मणिपुर और पंजाब में हिन्दू समुदाय अल्पसंख्यक है। याचिका में यह भी मांग की गयी है कि केंद्र सरकार की 23 अक्टूबर, 1993 की उस अधिसूचना को रद्द किया जाए, जिसमें पांच समुदायों– मुसलमानों, ईसाई, बौद्ध, सिख और पारसी को अल्पसंख्यक घोषित किया गया है। बाद में जैन समुदाय को भी अल्पसंख्यक घोषित किया गया।

तीन सदस्यीय उप समिति बनाई थी
इसी साल फरवरी में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष सैयद गैयूरुल हसन रिजवी ने इस मामले में विचार करने एवं रिपोर्ट तैयार करने के लिए आयोग के उपाध्यक्ष जॉर्ज कुरियन की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उप समिति बनाई थी।

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  • Web Title:National Commission For Minority Definition Report Ready