जिले के 1495 राजस्व गांवों की सुविधाओं का बनने लगा लेखा-जोखा
सीवान में राष्ट्रीय जनगणना 2027 की तैयारी में तेजी आ गई है। 1495 राजस्व गांवों की आधारभूत सुविधाओं का लेखा-जोखा तैयार किया जा रहा है। इस काम के लिए 438 क्षेत्र अधिकारियों को लगाया गया है। सर्वेक्षण 30 अगस्त तक पूरा किया जाएगा, और आंकड़े डिजिटल रूप में संग्रहित होंगे।

सीवान, हिन्दुस्तान संवाददाता। जिले में राष्ट्रीय जनगणना 2027 की तैयारी को लेकर गतिविधियां तेज हो गई है। जनगणना से पहले जिले के 1495 राजस्व गांवों की आधारभूत सुविधाओं का पूरा लेखा-जोखा तैयार किया जा रहा है। इस संदर्भ जनगणना हस्तपुस्तिका तैयार करने के लिए सर्वेक्षण का कार्य चल रहा है। जिले में सर्वेक्षण कार्य के लिए 438 क्षेत्र अधिकारियों को लगाया गया है। क्षेत्र अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में जाकर गांवों की भौगोलिक स्थिति के साथ उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं से संबंधित जानकारी जुटा रहे हैं।
सर्वेक्षण की प्रक्रिया
बहरहाल, सर्वेक्षण के दौरान क्षेत्र अधिकारी निर्धारित प्रारुप के अनुसार, जानकारी एकत्र कर रहे हैं। साथ ही एकत्र किए गए आंकड़ों की ऑनलाइन इंट्री व डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार किया जा रहा है। बताया जा रहा कि इससे पुराने रिकॉर्ड की तुलना में गांवों की सुविधाओं का अधिक व्यवस्थित व अद्यतन डाटा तैयार हो सकेगा। विभाग के अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल 438 क्षेत्र अधिकारियों को इससे पहले प्रशिक्षित किया जा चुका है। प्रशिक्षण के क्रम में उन्हें सर्वेक्षण की प्रक्रिया, निर्धारित प्रपत्र की जानकारी दर्ज करने व डिजिटल डाटा तैयार करने से जुड़ी जानकारी बताई गई। प्रशिक्षण के उपरांत ही क्षेत्र अधिकारी राजस्व गांवों में पहुंचकर सर्वे करना शुरू किए हैं। जिला सांख्यिकी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, क्षेत्र अधिकारियों को निर्धारित समय के भीतर ही अपने क्षेत्र का सर्वेक्षण पूरा कर लेने का निर्देश दिया गया है। दूसरी तरफ विभागीय स्तर पर सर्वेक्षण की अद्यतन प्रगति की मॉनिटरिंग भी की जा रही है, ताकि निर्धारित समय पर सभी 1495 राजस्व गांवों का डाटा तैयार किया जा सके।
सर्वेक्षण की समय सीमा
30 अगस्त तक पूरा कर लेना है सर्वेक्षण सर्वेक्षण का कार्य जिले में एक अगस्त से चल रहा है। इसे 30 अगस्त तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सर्वेक्षण के दौरान गांवों में उपलब्ध सड़क, बिजली, पेयजल, विद्यालय, स्वास्थ्य केन्द्र, आंगनबाड़ी, डाकघर, बैंक, बाजार, सार्वजनिक परिवहन समेत अन्य जरूरी सुविधाओं की स्थिति दर्ज की जा रही है। साथ ही गांवों की आधारभूत संरचना से जुड़ी अन्य निर्धारित बिन्दुओं पर भी क्षेत्र अधिकारी जानकारी एकत्र कर रहे हैं। बताया जा रहा कि सर्वेक्षण से प्राप्त आंकड़ों को डिजिटल रूप में तैयार किया जायेगा। कारण कि इसी डिजिटल डाटा के आधार पर जनगणना हस्तपुस्तिका तैयार होगी। हालांकि जनगणना हस्तपुस्तिका के लिए हो रहा सर्वेक्षण सिर्फ आंकड़े जुटाने तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके माध्यम से जिले के सभी 1495 राजस्व ग्रामों की मौजूदा आधारभूत स्थिति का रिकॉर्ड तैयार किया जायेगा। इस क्रम में किस गांव में कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध है, उन सुविधाओं की स्थिति क्या है, इसका विविरण डिजिटल डाटा में दर्ज किया जायेगा। इससे जनगणना के क्रम में गांवों से संबंधित जानकारी को व्यवस्थिति तरीके से उपलब्ध कराने में आसानी होगी।
डिजिटल डाटा का महत्व
राष्ट्रीय जनगणना 2027 की तैयारी के मद्देनजर पूर्व की गतिविधियों को कर रहे पूरा जनगणना हस्तपुस्तिका के लिए तैयार हो रहा डिजिटल डाटा भविष्य में जिले की विकास योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इस डिजिटल डाटा से गांवों में उपलब्घ आधारभूत सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का रिकॉर्ड रहने से योजनाओं के निर्माण व प्राथमिकता तय करने में सहुलियत होगी। वहीं, किसी भी क्षेत्र में सड़क, पेयजल, शिक्षा व स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति जानने के लिए अद्यतन आधार तैयार हो सकेगा। बताया जा रहा कि राष्ट्रीय जनगणना 2027 की तैयारी के मद्देनजर जनगणना से पूर्व की गतिविधियों को पूरा किया जा रहा है। इसी क्रम में जनगणना हस्तपुस्तिका के लिए गांवों के सर्वेक्षण को महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। सर्वेक्षण के दौरान संग्रह किए गए आंकड़ों को डिजिटल रूप में संकलित कर जनगणना हस्तपुस्तिका तैयार करने की दिशा में आगे की प्रक्रिया शुरू की जानी है।
अधिकारियों की टिप्पणी
क्या कहते जिला सांख्यिकी पदाधिकारी जिला सांख्यिकी पदाधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय जनगणना-2027 की तैयारी के सिलसिले में 1495 राजस्व गांवों में जनगणना हस्तपुस्तिका के लिए सर्वेक्षण किया जा रहा है। 438 क्षेत्र अधिकारियों को इस कार्य में लगाया गया है। 30 अगस्त तक सर्वेक्षण पूरा करने का लक्ष्य है। सर्वेक्षण से प्राप्त आधारभूत सुविधाओं से संबंधित आंकड़े डिजिटल रूप में तैयार होगा। सर्वेक्षण में सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य समेत अन्य जरूरी सुविधाओं का डाटा निर्धारित प्रारूप में दर्ज किया जाना है। प्राप्त सूचनाओं को डिजिटल रूप में संकलित किया जाएगा। तैयार डाटा से गांवों की सुविधाओं की स्पष्ट तस्वीर उपलब्ध होगी। भविष्य की योजनाओं के लिए यह आंकड़ा उपयोगी साबित होगी。


