चलते-चलते:::चांद पर एक समय में छह लोगों का समूह ही सही
नासा का आर्टेमिस मिशन चाँद पर मानव बस्ती स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। एक नई अध्ययन में कहा गया है कि 6 अंतरिक्ष यात्रियों का दल चाँद पर रहना सबसे सुरक्षित होगा। हर दो हफ़्ते में सप्लाई भेजना आवश्यक है। जिनमें रिसर्च में पृथ्वी से नियमित सप्लाई को भी महत्वपूर्ण बताया गया है।

नासा के आर्टेमिस मिशन के तहत चांद पर इंसानी बस्ती बसाने की तैयारी वैज्ञानिकों ने नई स्टडी में यह पता लगाने की कोशिश की है कि चांद पर एक समय में छह अंतरिक्ष यात्रियों का रहना सबसे सही और सुरक्षित होगा।
हर दो हफ्ते में उनके लिए जरूरी समान भेजा जाए
न्यूयॉर्क, एजेंसी। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा अपने आर्टेमिस प्रोग्राम के जरिए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास लंबे समय तक इंसानों की मौजूदगी बनाए रखने की तैयारी कर रहा है।
ऐसे में एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि भविष्य में बननेवाले मून बेस की सफलता के लिए छह अंतरिक्ष यात्रियों का दल सबसे सही और सुरक्षित है।
कैसे की गई रिसर्च?
जॉर्ज मेसन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के अनुसार छह अंतरिक्ष यात्रियों की टीम और पृथ्वी से नियमित सप्लाई मिशन की सफलता के लिए जरूरी है। इसके उलट छोटी टीम और री सप्लाई मिशन के बीच लंबा गैप खतरों को बढ़ा सकता है और इससे उद्देश्य हासिल नहीं होगा। अध्ययन पीएलओएस जर्नल में छपी है।
वैज्ञानिकों ने 'एजेंट-बेस्ड मॉडलिंग' नाम के कंप्यूटर सिमुलेशन का इस्तेमाल किया। इसमें यह देखा गया कि चांद जैसे अकेले, बंद और खतरनाक माहौल में रहने पर अंतरिक्ष यात्रियों के व्यवहार, आपसी तालमेल और मानसिक तनाव का मिशन पर क्या असर पड़ता है।
सबसे अच्छी स्थिति यह मिली कि 6 अंतरिक्ष यात्री हों और धरती से हर दो हफ्ते में उनके लिए जरूरी सामान की सप्लाई भेजी जाए। इसमें मिशन के कामयाब होने और चुनौतियों से निपटने की संभावना सबसे अधिक थी।
ट्रेनिंग पर्याप्त नहीं
अगर केवल 4 अंतरिक्ष यात्री हों और सप्लाई महीने में सिर्फ एक बार आए। ऐसी स्थिति में रेडिएशन या उल्कापिंडों के खतरे के दौरान काम रुकने का खतरा बहुत बढ़ जाता है।
स्टडी कहती है कि अंतरिक्ष यात्रियों को कितनी भी ट्रेनिंग दे दी जाए, लेकिन लंबे समय तक अकेले और बंद जगह पर रहने से आपसी रिश्ते और मानसिक स्थिति प्रभावित होती है। इसलिए सिर्फ ट्रेनिंग काफी नहीं है, बल्कि टीम का साइज और सही समय पर सामान की सप्लाई होना बेहद जरूरी है।
इस रिसर्च को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिका के रिसर्च स्टेशनों, पनडुब्बियों और समुद्र में बने तेल के कुओं पर रहने वाले लोगों के अनुभवों का भी अध्ययन किया, जो इसी तरह के कटे-कटे माहौल में रहते हैं।


