पूरी आस्था एवं विश्वास के साथ मनाई नागपंचमी
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सोमवार को नागपंचमी पर लोगों ने प्रात: स्नान आदि कर नाग देवता की आराधना की। उन्होंने गाय के गोबर से मकान की किवाड़ें और मुख्य द्वार पर लिपाई की। कोयले को पीसकर द्वार पर नाग नागिन के जोड़े बनाए। ताकि नाग देव की कृपा उन पर एवं उनके परिवार पर बनी रहे। इसके बाद दूध में कोयला और हल्दी आदि डालकर नाग देव के मठ पर और वह दूध चढ़ाकर नाग देव से कुशल क्षेम के लिए प्रार्थना की। थाना नागफनी के पीछे, खुशहालपुर, शाहपुर तिगरी, लाल बाग शनि मंदिर के पास, कटघर 88 घंटा मंदिर के पास, ताड़ीखाना चौक स्थित कृष्णा आश्रम के मठ सहित शहर के अनेक मठों पर दूध चढ़ाया।
वहां से मिट्टी लाकर घर के सभी कोने में छिड़कर कृपा दृष्टि बनाए रखने की कामना की। मान्यता है कि यह माह भगवान शंकर को समर्पित रहता है। उनके कंठ में विष रहने के कारण सांप उनसे लिपटे रहते हैं। भगवान शिव को भी नाग प्रिय हैं। इसीलिए सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी को नाग पंचमी का नाम दिया गया है। इसदिन लोग सर्प देखना और उसके नाम से दान करना भी शुभ मानते हैं।


