17 अगस्त को मनेगी नागपंचमी
मोतिहारी में नागपंचमी का पर्व 17 अगस्त को धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन नाग देवता की पूजा दूध और लावा चढ़ाकर की जाती है। यह पर्व बल, ज्ञान और स्पर्धा का प्रतीक है। प्राचार्य सुशील कुमार पाण्डेय के अनुसार सावन शिव को समर्पित है और नाग देवता शिव के सहचर हैं।

मोतिहारी । इस वर्ष नागपंचमी का प्रसिद्ध पर्व सत्रह अगस्त सोमवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। श्रावण शुक्लपक्ष पंचमी तिथि को नाग देवता की पूजा होने के कारण इसे नागपंचमी कहा जाता है । इस दिन नाग जाति के प्रति श्रद्धा एवं सम्मान निवेदन करते हुए दूध और लावा चढ़ाकर उनकी पूजा की जाती है। सनातन धर्म में सर्प जाति की पूजा करना अपने आप में अद्भुत परंपरा है। यह उदात्त भावना केवल भारतीय संस्कृति में ही संभव है। नागपंचमी बल-पौरुष,ज्ञानवृद्धि,तर्कशक्ति एवं स्पर्धा के परीक्षण का पर्व है। इसीलिए इसदिन अखाड़े का भी आयोजन होता है। प्राचार्य सुशील कुमार पाण्डेय ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार सावन का महीना शिव को समर्पित है और नाग देवता सदैव शिव के सहचर हैं जो शिव के गले में विराजमान रहते हैं।
वही शिव के एकादश रुद्र में हनुमान जी भी पूजित हैं। इसलिए नागपंचमी के दिन शिव पूजन,रुद्राभिषेक एवं हनुमान जी के पूजन के साथ नाग पूजन एक साथ होता है।


