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हिंदी न्यूज़ देश'किसी को तो बोलना था...': 'कश्मीर फाइल्स' पर दिए बयान पर अडिग इजराइली फिल्म मेकर नदव लापिड

'किसी को तो बोलना था...': 'कश्मीर फाइल्स' पर दिए बयान पर अडिग इजराइली फिल्म मेकर नदव लापिड

लापिड ने कहा कि उनके बयान का इतना विरोध होना 'अजीब' था। पुरस्कार विजेता फिल्म निर्माता ने आगे कहा कि वह 'प्रचार, फासीवाद और अश्लीलता के बीच पारदर्शी संयोजन' से हैरान रह गए थे।

'किसी को तो बोलना था...': 'कश्मीर फाइल्स' पर दिए बयान पर अडिग इजराइली फिल्म मेकर नदव लापिड
Amit Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 30 Nov 2022 03:10 PM
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इजराइली फिल्म मेकर नदव लापिड ने 'द कश्मीर फाइल्स' फिल्म पर दिए गए अपने बयान का बुधवार को बचाव किया। साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि 'किसी को तो आवाज उठानी पड़ेगी।' बता दें कि गोवा में 53वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्मोत्सव (इफ्फी) के आखिरी चरण में उस समय विवाद खड़ा हो गया जब अंतरराष्ट्रीय जूरी के प्रमुख और इजराइली फिल्मकार नदव लापिड ने ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म को ‘भद्दी’ और ‘दुष्प्रचार वाली’ बताया। उनके इस बयान से बखेड़ा खड़ा हो गया। हालांकि अब उन्होंने विवादों के बीच भी अपने बयान का बचाव किया है। टेलीफोन के माध्यम से इजराइली समाचार वेबसाइट Ynet से बात करते हुए, लापिड ने कहा कि उनके बयान का इतना विरोध होना 'अजीब' था। पुरस्कार विजेता फिल्म निर्माता ने आगे कहा कि वह (फिल्म में) 'प्रचार, फासीवाद और अश्लीलता के बीच पारदर्शी संयोजन' से हैरान रह गए थे।

कड़े विरोध से नदव लापिड भी हैरान नजर आए। उन्होंने Ynet से कहा: "यह अजीब है ... यहां चल क्या रहा है। इसे टेलीविजन पर भी लाइव प्रसारित किया गया।" उन्होंने कहा, "यह एक ऐसी फिल्म है जिसे भारत सरकार ने शुरू नहीं किया है... लेकिन इसे असामान्य तरीके से आगे जरूर बढ़ाया है... यह मूल रूप से कश्मीर में भारतीय नीति को सही ठहराती है और इसमें फासीवादी वाली खासियतें हैं।" लापिड ने अपने साक्षात्कार में यह भी कहा: "वहां (फिल्म में) दावा किया जा रहा है... कि घटना के आयाम बुद्धिजीवियों और मीडिया द्वारा छिपाए गए थे। यह हमेशा ही होता है। वहां एक विदेशी दुश्मन होता है और अंदर के ही देशद्रोही होते हैं।"

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लापिड से पूछा गया था कि क्या उन्हें इतने बड़े पैमाने पर विवाद की आशंका थी। इस पर उन्होंने स्वीकार किया कि 'एक कार्यक्रम (जहां) हर कोई खड़ा होकर सरकार की प्रशंसा करता है' वहां फिल्म की आलोचना करने से उन्हें परेशानी होती है। उन्होंने कहा, "मुझे पता था कि यह एक ऐसी घटना थी जो बहुत जुड़ी हुई थी ... हर कोई सरकार की प्रशंसा करता है। यह एक आसान स्थिति नहीं है - क्योंकि आप एक अतिथि हैं ... आपके साथ बहुत अच्छा व्यवहार किया जाता है ... और फिर आप आते हैं और फेस्टिवल पर हमला करते हैं। हां, एक आशंका थी, और एक बेचैनी भी।" उन्होंने कहा, "चलो इसे वहीं खत्म करते हैं... मैं अब हवाई अड्डे के लिए अपने रास्ते पर निकल गया हूं और खुश हूं।"

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हालांकि, लापिड ने जोर देकर कहा कि उन्होंने बोलना आवश्यक समझा। उन्होंने कहा, "देशों में (जहां लोग) तेजी से अपने मन की बात कहने की क्षमता खो रहे हैं ... वहां किसी को तो बोलने की जरूरत है। जब मैंने इस फिल्म को देखा, तो मैं खुद को रोक नहीं कर सका।"

कश्मीरी पंडितों ने इजराइली फिल्मकार लापिद की आलोचना की, निर्वासित किये जाने की मांग की

घाटी में कश्मीरी पंडित समुदाय के कुछ लोगों ने फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ को ‘दुष्प्रचार वाली’ और ‘भद्दी’ फिल्म करार देने पर इजराइली फिल्मकार लापिड की मंगलवार को आलोचना की। कश्मीरी पंडितों ने लापिद को तत्काल देश से निर्वासित किये जाने की मांग की। विवेक अग्निहोत्री निर्देशित उक्त फिल्म को भारत की ‘शिंडलर लिस्ट’ करार देते हुए उन्होंने लापिद से जानना चाहा कि क्या एक यहूदी के रूप में वह यहूदियों के नरसंहार पर आधारित इस अमेरिकी फिल्म के बारे में भी यही सोच रखते हैं ?

विकास रैना ने कहा, ‘‘द कश्मीर फाइल्स ने कश्मीरी पंडितों के पलायन के बारे में सच को छिपाने के लिए गढ़े गये 30 साल पुराने दुष्प्रचार को बेनकाब कर दिया।’’ रैना के पिता अशोक कुमार रैना प्राचार्य थे और हिज्बुल मुजाहिदीन ने उनकी हत्या कर दी थी। उन्होंने कहा, ‘‘द कश्मीर फाइल्स भारत की ‘शिंडलर लिस्ट’ है। यह हमारा सच है।’’