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दाखिल-खारिज मालिकाना हक तय करने का आधार नहींः सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में व्यवस्था दी है कि रेवेन्यू रिकार्ड में किया गया म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) संपत्ति में न तो टाइटल का सृजन करता है, न ही इस एंट्री से यह समाप्त होता है। कोर्ट ने कहा कि यह...

दाखिल-खारिज मालिकाना हक तय करने का आधार नहींः सुप्रीम कोर्ट
Gunateetश्याम सुमन ,नई दिल्ली| Sat, 02 Feb 2019 12:02 AM
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सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में व्यवस्था दी है कि रेवेन्यू रिकार्ड में किया गया म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) संपत्ति में न तो टाइटल का सृजन करता है, न ही इस एंट्री से यह समाप्त होता है। कोर्ट ने कहा कि यह मालिकाना हक तय करने का आधार नहीं हो सकता। 

जस्टिस ए.एम. सप्रे की पीठ ने यह आदेश, बंबई हाई कोर्ट के आदेश को बरकारार रखते हुए दिया। मामला एक संपत्ति विवाद का है जिसमें एक पक्ष ने यह दावा किया था कि रेवेन्यू रिकार्ड में उनके नाम से दाखिल-खारिज है। इसलिए भूमि पर अधिकार उनका ही है। कोर्ट ने कहा कि रिकार्ड में दाखिल-खारिज का इतना ही महत्व है कि जिसके नाम वह एंट्री है उससे भूमि का राजस्व वसूला जाए। इस रिकार्ड का और कोई कानूनी या मालिकाना महत्व नहीं है। 

यह कहते हुए कोर्ट ने बंबई हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। पीठ ने कहा कि यह मामला ट्रायल कोर्ट में विचाराधीन है और कोर्ट इस भूमि के मालिकाना हक के मामले का निर्धारण करेगा। लेकिन हम स्पष्ट करते हैं कि रेवेन्यू रिकार्ड की एंट्री भूमि का टाइटल नहीं दे देती। यह राजस्व का भुगतान करने के लिए ही इस्तेमाल की जाती है। 

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