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चुनाव में फिर गूंजने लगा मुस्लिम आरक्षण का मुद्दा, कर्नाटक में भाजपा भी नहीं हटा पाई थी

चुनाव में एक बार फिर मुस्लिम आरक्षण का मुद्दा गूंज रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि मुस्लिम आरक्षण को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कांग्रेस सरकार ने कर्नाटक में शुरू किया था।

चुनाव में फिर गूंजने लगा मुस्लिम आरक्षण का मुद्दा, कर्नाटक में भाजपा भी नहीं हटा पाई थी
Ankit Ojhaलाइव हिन्दुस्तान,बेंगलुरुSun, 28 Apr 2024 06:57 PM
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लोकसभा चुनाव के दौरान एक बार फिर मुस्लिम आरक्षण का मुद्दा गूंजने लगा है। कर्नाटक में ओबीसी कोटे के अंतरगत ही मुस्लिम आरक्षण का मुद्दा नया नहीं है। लंबे समय से इस मामले पर बहस चल रही है। वहीं हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मुस्लिम आरक्षण को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला और कहा कि कांग्रेस चाहती है कि लोगों की संपत्ति लेकर उन लोगों में बांट दी जाए जो ज्यादा बच्चे पैदा करते हैं। आइए जानते हैं कि आखिर कर्नाटक में मुस्लिम आरक्षण का मुद्दा कितना पुराना है और इसपर किस तरह से राजनीति होती आई है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक जनसभा के दौरान कहा था कि कांग्रेस चाहती है एस, एसटी और ओबीसी का कोटा मुस्लिमों को दे दिया जाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि पूरे देश के पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पहले कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में 5 प्रतिशत मुस्लिम आरक्षण लागू किया जाए। उन्होने कहा कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने ही ओबीसी की सूची में मुसलमानों को भी शामिल किया था। ऐसे में कांग्रेस की सरकार धर्म के आधार पर आरक्षण देना चाहती है। 

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक नेशनल कमीशन फॉर बैकवर्ड क्लासेज का डेटा कहता है कि कर्नाटक में 12.9 फीसदी मुस्लिम आबादी है। ओबीसी को मिले 32 फीसदी आरक्षण में ही चार फीसदी मुस्लिमों को दिया जाता है। एनसीबीसी के अध्यक्ष हंसराज गंगाराम अहीर ने कहा था कि इस मामले में वह कर्नाटक के चीफ सेक्रेटरी को समन करेंगे और उनसे पूछेंगे कि आखिर ओबीसी कोटा में इस तरह का वर्गीकरण क्यों किया गया। 

इतिहास पर नजर डालें तो राज्य के पिछड़ा वर्ग आयोग के चेयरमैन रहे एलजी हावनूर ने 1975 में ही तत्कालीन सरकार के सामने एक रिपोर्ट पेश की थी। इसमें कहा गया था कि ओबीसी आरक्षण के तहत मुसलमान भी आरक्षण के योग्य हैं। इसके बाद 1977 में मुस्लिमों के आरक्षण के लिए निर्देश जारी कर दिए गए। इसके बाद रेड्डी कमीशन ने मुस्लिों को ओबीसी की लिस्ट में कैटिगरी 3 के तहत आरक्षण देने का प्रस्ताव रखा। राज्य में कांग्रेस की वीरप्पा मोइली की सरकार ने ओबीसी में 2बी कैटिगरी के तहत मुसलमानों, बौद्धों और क्रिश्चियन बने दलितों को 6 फीसदी का आरक्षण दिया गया। इसमें से दो फीसदी बौद्धौं और ईसाइयों को और चार फीसदी मुसलमानों को दिया गया। हालांकि मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया और कोर्ट ने कहा कि कुल आरक्षण 50 फीसदी के पार नहीं जा सकता। 

इसके बाद मोइली सरकार गिर गई और एचडी देवगौड़ा की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक आरक्षण का आदेश जारी किया। 2बी कोटा के तहत चार फीसदी आरक्षण मुसलमानों को दिया गया। बीते साल कर्नाटक विधासा चुनाव से पहले भाजपा की बोमम्मई सरकार ने ओबीसी के 2ए और 2बी के तहत आरक्षण को खत्म करने का प्रयास किया। तत्कालीन सरकार ने कहा कि 2सी और 2डी कोटा के तहत वोक्कालिगा और लिगायत समुदाय को 2 फीसदी आरक्षण दिया जाए। वहीं मुस्लिम कोटा को 10 फीसदी ईडब्लूएस कोटा में सीमित कर दिया जाए। हालांकि इस निर्णय के सामने कानूनी चुनौतियां थीं इसलिए इसे लागू नहीं किया जा सका। इसके बाद नए आदेश के तहत नए ऐडमिशन और नियुक्तियों पर रोक लगा दी गई। कोर्ट ने सरकार के फैसले को खारिज कर दिया और पुराना रिजर्वेशन ही राज्य में लागू हो गया।