बेटी के अपहरण का विवाद: केस उठाने के लिए मिल रही थी धमकी
मुंगेर में हत्या की घटना के बाद परिवार ने सोची-समझी साजिश का आरोप लगाया है। मृतक की नाबालिग बेटी के अपहरण से शुरू हुई इस घटना में कई आरोपी शामिल हैं। पुलिस पर लापरवाही और निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए परिवार ने न्याय की मांग की।

मुंगेर, निज संवाददाता।घटना के बाद मौके पर पहुंचे परिजनों ने हत्या के पीछे एक सोची-समझी साजिश का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि करीब दो महीने पहले, बीते 15 मई को मृतक की 17 वर्षीय नाबालिग बेटी सुबह करीब 7:30 बजे कोचिंग जाने के लिए घर से निकली थी और लापता हो गई थी। बाद में पता चला कि हरदियाबाद काली स्थान निवासी दुखन उर्फ देवन यादव का पुत्र अंकित कुमार उसे बहला-फुसलाकर भगा ले गया है। इस मामले में सफियासराय थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी, जिसमें अंकित यादव, देवन यादव सहित अन्य को आरोपी बनाया गया था। परिजनों का आरोप है कि केस दर्ज होने के बाद से ही आरोपी पक्ष की ओर से मुकदमा वापस लेने का लगातार दबाव बनाया जा रहा था। आरोपियों ने 20 दिन पहले और फिर महज दो दिन पहले भी केस नहीं उठाने पर जान से मारने की धमकी दी थी। परिजनों का सीधा आरोप है कि इसी रंजिश में सोची-समझी रणनीति के तहत सुबोध यादव की हत्या की गई है。
परिजनों ने खुद की थी छानबीन, पुलिस पर ढिलाई का आरोपः
मृतक के भतीजे सुधांशु शेखर ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर लापरवाही और निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर हम इसे सिर्फ एक हत्या के रूप में देखें, तो यह अधूरी जांच होगी। सुधांशु ने कहा कि यह पूरा घटनाक्रम 15 मई से शुरू हुआ है। हमारी बहन के अपहरण से लेकर हमारे चाचा की हत्या तक, इसमें एक पूरा गिरोह शामिल है।
खुद के स्तर से खोजबीन की गई:
परिजनों के मुताबिक, पुलिसिया कार्रवाई में देरी होने पर उन्होंने खुद अपने स्तर से खोजबीन की थी। वे उस गाड़ी वाले का पता लगाकर खगड़िया के चित्रगुप्त थाना क्षेत्र के अशोका बैंक्वेट हॉल के पास एक मकान तक जा पहुंचे थे, जहां आरोपी छिपे थे। वहां तलाशी के दौरान खिड़की के बाहर से एक सिम कार्ड का कटा हुआ हिस्सा बरामद हुआ था। जांच में पता चला कि गांव के ही अंशु कुमार ने अपनी मां का सिम कार्ड आरोपी अंकित को भागने और प्लानिंग करने के लिए दिया था। माई जियो ऐप की कॉल हिस्ट्री से साफ हुआ कि पिछले एक सप्ताह से अपहरण की साजिश रची जा रही थी। परिजनों का कहना है कि उन्होंने पुलिस को सारे इनपुट और फोन तक मुहैया करा दिए थे, लेकिन पुलिस की सुस्ती के कारण मुख्य आरोपी हाथ नहीं आए।
कनपटी पर पिस्टल सटाकर दी थी धमकी, नहीं जागी पुलिसः
परिजनों ने बताया कि पुलिस की ढिलाई से बदमाशों के हौसले इस कदर बुलंद हो गए कि जून के आखिरी हफ्ते में आरोपियों ने पीड़ित परिवार को सरेआम टारगेट करना शुरू कर दिया। हथियारबंद आरोपी रंजीत यादव (पिता: महावीर यादव), वकील कुमार (आरोपी का चाचा), अंशु कुमार और अंकेश (आरोपी का भाई) ने पीड़ित के चाचा मनोज कुमार को घेर लिया और उनकी कनपटी पर पिस्टल सटा दी। उन्होंने धमकी दी थी कि अगर केस वापस नहीं लिया, तो तुम्हारे भाई और तुम्हें गोली मार देंगे। संबंध में सफियासराय थाने में स्टेशन डायरी (सनहा) भी दर्ज कराई गई थी। भतीजे का आरोप है कि पिछले 16 दिनों से पुलिस पूरी तरह निष्क्रिय बनी रही और इसी ढुलमुल रवैये का नतीजा है कि आज सुबोध यादव की जान चली गई। अपराधियों में पुलिस का कोई खौफ नहीं रह गया है।


