18 बनी हाशिम का ताबूत व अलम के जुलूस में ताबूतों की मंजरकशी से गूंजा बारगाह
उरई में मुहर्रम के मौके पर 18 बनी हाशिम का जुलूस ताबूत व अलम के साथ निकाला गया। इस शोक कार्यक्रम का आयोजन अंजुमन गुंचा ए मज़लूमिया उरई द्वारा किया गया। सैकड़ों अजादारों ने शिरकत की और मातम मनाया। माहौल गमगीन था और ताबूतों की मंजरकशी की गई।

उरई। मुहर्रम के मौके पर शोक और अकीदत का प्रतीक 18 बनी हाशिम का जुलूस ताबूत व अलम मंगलवार रात उरई के मोहल्ला मोहनपुरा में बारगाह ए बाबुल मुराद से अकीदत के साथ निकाला गया। बाद में नमाज ए मगरिब मजलिस के बाद जुलूस बरामद हुआ। इसमें सैकड़ों अजादार शामिल हुए। कार्यक्रम का आयोजन अंजुमन गुंचा ए मज़लूमिया उरई के तत्वावधान में किया गया। मजलिस की निज़ामत मौलाना शारिब अब्बास साहब किब्ला अम्बेडकर नगर ने की। मजलिस को खिताब मौलाना अकबर अली साहब नजफी और मौलाना साजिद अली आब्दी किब्ला उरई ने फरमाया। जाकिर ए अहलेबैत अली अख्तर आब्दी ने कर्बला के वाकयात बयान कर अजादारों को रुलाया।
मजलिस के बाद मस्जिद से जुलूस बरामद होकर बारगाह ए बाबुल मुराद पहुंचा। यहां ताबूतों की मंजरकशी की गई। अजादारों ने ताबूतों पर फूल चढ़ाकर मातमदारी की और या हुसैन, या अब्बास के नारे गूंजे। माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया। इस दौरान असद नकवी, अयान सल्मान हुसेन टेकरी, मुख्तार अली ईरानी, जैगम अब्बास, हसन अब्बास ने पुरसोज नोहाख्वानी पेश कर कर्बला के शहीदों को याद किया। जुलूस में अंजुमन गुंचा ए हुसैनिया, मोहम्मदपुर और अंजुमन रिज़विया, चांदपुर, कानपुर देहात की टीमें भी शामिल हुईं। अजादारों के लिए लंगर और सबील का भी इंतजाम रहा।


