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MP के नर्सिंग कॉलेजों की जांच करने वाले CBI ऑफिसर फंसे, क्लीन चिट के बदले लेते रहे रिश्वत

सीबीआई की FIR में नर्सिंग सिलेबस चला रहे 8 महाविद्यालयों के निदेशकों, अध्यक्षों, कर्मियों और बिचौलियों के भी नाम हैं। इन्होंने निरीक्षण दलों की ओर से रिश्वत ली और उन तक रकम पहुंचाई।

MP के नर्सिंग कॉलेजों की जांच करने वाले CBI ऑफिसर फंसे, क्लीन चिट के बदले लेते रहे रिश्वत
Niteesh Kumarएजेंसी,नई दिल्लीTue, 21 May 2024 11:10 PM
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मध्य प्रदेश में नर्सिंग कॉलेज घोटाले की जांच कर रहे केंद्रीय जांच ब्यूरो ने बड़े खुलासे किए हैं। CBI ने कहा कि उसके अधिकारी जांच के बाद क्लीन चीट देने के लिए हर शिक्षण संस्थान से 2-10 लाख रुपये तक की रिश्वत ले रहे थे। इस मामले में सीबीआई के पुलिस उपाधीक्षक आशीष प्रसाद, निरीक्षक राहुल राज, सुशील कुमार मजोका और ऋषिकांत असाथे एजेंसी की ओर से नामजद 22 लोगों में शामिल हैं। राहुल राज और सुशील कुमार मजोका सीबीआई में मध्य प्रदेश पुलिस से संबद्ध थे। राज को रविवार को गिरफ्तार कर लिया गया। CBI की FIR में नर्सिंग सिलेबस चला रहे 8 महाविद्यालयों के निदेशकों, अध्यक्षों, कर्मियों और बिचौलियों के भी नाम हैं। इन्होंने निरीक्षण दलों की ओर से रिश्वत ली और उन तक रकम पहुंचाई।

सीबीआई प्रवक्ता ने अपने बयान में कहा, 'जांच एजेंसी की ओर से दर्ज यह मामला भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं करने की उसकी नीति को दिखाता है। यह भी दर्शाता है कि सीबीआई अपने अधिकारियों को भी नहीं बख्शती है, अगर वे अपने संगठन के मूल मूल्यों से भटके हुए पाए जाते हैं।' इन निरीक्षण दलों को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के निर्देश पर गठित किया गया था। एचसी ने राज्य में नर्सिंग महाविद्यालयों की जांच के लिए इन दलों का गठन करने का निर्देश दिया था। CBI ने इन दलों का गठन किया था। इनमें उनके अधिकारियों के अलावा भारतीय नर्सिंग परिषद से नामित कर्मी और राज्य के पटवारी भी शामिल थे।

घोटाले को कैसे दिया गया अंजाम
जांच एजेंसी को सूचना मिली थी कि इन दलों ने भारी-भरकम रिश्वत लेकर इन अपात्र संस्थानों को क्लीन चीट मुहैया कराई। CBI ने इन आरोपों का सत्यापन करने और गोपनीय ढंग से अधिकारियों पर नजर रखने के बाद FIR दर्ज की। सीबीआई की प्राथमिकी में कहा गया, ‘सूत्र ने यह भी सूचना दी थी कि इस चौकड़ी ने हर नर्सिंग संस्थान से 2 लाख से 10 लाख रुपये तक की रिश्वत वसूली। यह रिश्वत राशि सीबीआई अधिकारियों और बिचौलियों के बीच बांटी गई।’

CBI को यह भी जानकारी मिली कि सीबीआई निरीक्षण दल में शामिल हर नर्सिंग अधिकारी को 25000-50000 रुपये और हर पटवारी को 5000-20000 रुपये बतौर रिश्वत दिए गए। प्राथमिकी में कहा गया, ‘नर्सिंग अधिकारी, विशेषज्ञ और पटवारी के लिए रिश्वत की राशि इन व्यक्तियों ने जांच के दिन ही या उसके अगले दिन उन तक पहुंचा दी।’ FIR में सीबीआई ने मलय कॉलेज ऑफ नर्सिंग के अध्यक्ष अनिल भाष्करण और आर डी मेमोरियल ऑफ नर्सिंग एंड फार्मेसी के अध्यक्ष रवि भदोरिया को नामजद किया है।