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नई कवायद: अब सुरक्षित राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में सांसद-विधायक ऐसे करेंगे सहयोग

अरविंद सिंह,नई दिल्लीShankar Pandit
Mon, 25 Oct 2021 06:25 AM
नई कवायद: अब सुरक्षित राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में सांसद-विधायक ऐसे करेंगे सहयोग

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केंद्र सरकार सुरक्षित राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने में स्थानीय सांसदों, विधायकों और जनप्रतिनिधियों का सहयोग लेगी। सड़क परियोजना की विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने में उनका परामर्श लिया जाएगा। इससे राजमार्गों के साथ अनिवार्य रूप से सर्विस लेन, जंक्शन, इंटरचेंज आदि बनाने का प्रावधान डीपीआर में किया जा सकेगा। सड़क सुरक्षा के उक्त उपाय के अभाव से न सिर्फ हादसे बढ़ते हैं, बल्कि लोगों को जाम की समस्या से भी जूझना पड़ता है।

राजमार्ग क्षेत्र के अधिकारियों की मिलीभगत से सलाहकार कंपनियां जानबूझकर सड़क सुरक्षा के उपाय डीपीआर में शामिल नहीं करती हैं। इससे राजमार्ग परियोजना पूरी होने के बाद फ्लाईओवर, अंडरपास, सर्विस लेन, फुटओवर ब्रिज, इंटरचेज आदि को उससे जोड़ा जाता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि कंपनियां जनता से वसूले जाने वाले टोल टैक्स के पैसे से सड़क सुरक्षा के कार्यो को पूरा करती हैं। उन्हें खुद पैसा नहीं लगाना पड़ता है। वहीं, काम धीमा कर अधिक दिनों तक खींचा जाता है, जिससे अधिक समय तक टोल टैक्स वसूलने का अधिकार मिलता है।

सड़क सुरक्षा के उपायों के अभाव में आए दिन राष्ट्रीय राजमार्ग पर उल्टी दिशा से आने वाले वाहनों की टक्कर की घटनाएं सामने आती हैं। वहीं, राजमार्गों की रफ्तार में बाधा पहुंचने से जाम की स्थिति भी पैदा होती है। सड़क परिवहन मंत्रालय के 94 वर्षीय पूर्व महानिदेशक डीपी गुप्ता का कहना है कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत पीडब्ल्यूडी के जूनियर इंजीनियर डीपीआर बनाने में स्वयं सहायता समूह, पंचायत सदस्य आदि के सुझाव लेते हैं। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को भी इस फॉर्मूले को अपनाना चाहिए।

संसदीय समिति का सुझाव, जनता की चिंताओं का ध्यान रखें
संसद की एक स्थाई समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख किया है कि सरकार को सड़क परियोजना की डीपीआर बनाने में सांसद, विधायक, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि सहित आम जनता से सुझाव लेना चाहिए। डीपीआर की समग्र समीक्षा करनी चाहिए। डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया में स्थानीय जनता की मांगों और चिंताओं का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।

खराब गुणवत्ता, हादसे बढ़ने पर कंपनियों की जवाबदेही तय हो

रिपोर्ट में कहा गया है कि डीपीआर के कारण राजमार्ग परियोजना पूरी होने के एक तय समय तक कंपनी की गलती से गुणवत्ता खराब होने या हादसे बढ़ने पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। सरकार कानून बनाकर दोषियों को दंडित करे। समिति ने यह भी सिफारिश की कि डीपीआर बनाते समय दीर्घ अवधि के लिए यातायात अनुमान का ध्यान रखा जाए। इसके लिए अधिक भूमि अधिग्रहण की जरूरत है, ताकि भविष्य में राजमार्ग को चौड़ा किया जा सके।

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