श्री मौनिया बाबा मेला में उमड़ा आस्था व भक्ति का जन सैलाब
शुक्रवार को महाराजगंज में श्री मौनिया बाबा राजकीय महावीरी झंडा मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। विभिन्न धर्मों के लोग एक साथ आकर बाबा की समाधि पर पहुंचे। मेले में पारंपरिक कला, झांकियों, और अखाड़ों के करतबों ने सबका ध्यान खींचा। प्रशासन की सतर्कता से मेला शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।

महाराजगंज, हिन्दुस्तान टीम। उत्तर बिहार के प्रसिद्ध श्री मौनिया बाबा राजकीय महावीरी झंडा मेले में शुक्रवार को आस्था, भक्ति और उत्साह का सैलाब उमड़ पड़ा। शहर से लेकर मेला परिसर तक श्रद्धालुओं और दर्शकों की भीड़ से सड़कें पटी रहीं। श्री मौनिया बाबा की समाधि स्थल पर दर्शन के लिए विभिन्न धर्म और समुदायों के लोगों की कतार लगी रही। मेले में जाति, धर्म और संप्रदाय की सीमाएं टूटती नजर आईं। हर ओर बाबा के जयकारे गूंजते रहे और पूरा शहर भक्ति के रंग में रंगा दिखा।
महावीरी अखाड़ों का प्रदर्शन
गुरुवार की रात जुलूस निकलने के बाद शुक्रवार दोपहर से महावीरी अखाड़ों का निकलना शुरू हुआ। शहरी और ग्रामीण इलाकों से निकले 21 अखाड़ों ने अपनी भव्यता, अनुशासन और पारंपरिक कला का प्रदर्शन किया। हाथी, घोड़े, ऊंट, बैंड-बाजे और डंके की आवाज के बीच निकले अखाड़ों को देखने के लिए सड़क के दोनों किनारों पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। पारंपरिक हथियारों के साथ अखाड़ों में शामिल युवाओं ने लाठी-डंडे और अन्य करतब दिखाकर दर्शकों का उत्साह बढ़ाया।
21 अखाड़ों ने दिखाई भव्यता
श्री मौनिया बाबा राजकीय महावीरी झंडा मेले में महाराजगंज प्रखंड के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से नौ तथा दरौंदा प्रखंड के विभिन्न गांवों से 12 अखाड़े शामिल हुए। बंगरा, पसनौली, नवलपुर कपिया, रामापाली, उजाय, अभुई, कोथुआ सारंगपुर, फतेपुर, वैदापुरा विशुनपुरा, सवान विग्रह, पकवलिया, बेला गोविंदापुर, रुकुन्दीपुर, तेवथा, गोहपुर करसौत, झझवा, धनछुहा, नागा बाबा मठ, इंदौली, नवयुवक अखाड़ा, भारतीय स्वयंसेवक दल, प्रधान अखाड़ा सिहौता और आजाद अखाड़ा ने मेले में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। अखाड़ेधारियों के करतब और कलाबाजी ने दर्शकों को खूब आकर्षित किया।
राष्ट्रीय एकता का संदेश
मेले में पहुंचे महाराजगंज के सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल और विधायक हेम नारायण साह ने भी मेले का आनंद लिया। सांसद ने कहा कि श्री मौनिया बाबा का मेला राष्ट्रीय एकता और अखंडता का प्रतीक है। महान संत मौनिया बाबा सर्वमान्य हैं और उनकी समाधि पर हर समुदाय के लोग श्रद्धा के साथ पहुंचते हैं। विधायक ने कहा कि मौनिया बाबा सिद्ध संत थे। उनकी समाधि पर लगने वाला यह ऐतिहासिक मेला सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे का संदेश देता है।
झांकियों ने खींचा ध्यान
मेले के दौरान विभिन्न संस्थाओं की ओर से निकाली गई आकर्षक झांकियों ने भी लोगों का ध्यान खींचा। सी बारात विवाह समिति की ओर से आदमकद शिवलिंग की झांकी निकाली गई। शिव शक्ति सेवा मंडल की ओर से बाबा बर्फानी की झांकी प्रस्तुत की गई। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से नशामुक्ति अभियान पर आधारित नाट्य प्रस्तुति ने लोगों को सामाजिक संदेश दिया। श्रीराम सेवा समिति और जय श्रीराम सेवा समिति के सदस्यों ने भी मेले में सक्रिय भूमिका निभाई। पूर्व प्रत्याशी नीतीश कुमार द्विवेदी ने शिविर लगाकर अखाड़ेधारियों का सम्मान किया।
लकड़ी और लोहे के सामान की खरीदारी
मौनिया बाबा मेला धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन के साथ खरीदारी के लिए भी प्रसिद्ध है। मेले में लकड़ी और लोहे के सामान की खूब बिक्री होती है। लकड़ी की आलमारी, संदूक, ओखल-मूसल सहित घरेलू उपयोग की वस्तुओं की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ रही। पेड़-पौधों की दुकानों पर भी लोगों ने खरीदारी की। कोलकाता, हाजीपुर और मुजफ्फरपुर समेत कई शहरों से व्यापारी मेले में दुकानें लेकर पहुंचे हैं। इनमें से कई दुकानें करीब एक माह तक लगी रहती हैं।
मनोरंजन के साधनों पर उमڑی भीड़
मेले में बच्चों से लेकर बड़ों तक के मनोरंजन के लिए झूला, सर्कस, मौत का कुआं, ब्रेक डांस और ड्रैगन जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं। इन मनोरंजन स्थलों पर दिनभर भीड़ लगी रही। महिलाओं के लिए मीना बाजार भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। दूर-दराज से पहुंचे लोगों ने धार्मिक आयोजन के साथ मेले में मनोरंजन और खरीदारी का भी आनंद लिया।
प्रशासन रहा अलर्ट
मेले को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न कराने के लिए अनुमंडल प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। एसडीओ अनीता सिन्हा, एसडीपीओ अमन सहित प्रशासनिक और पुलिस पदाधिकारी लगातार मेला क्षेत्र की निगरानी करते रहे। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर दंडाधिकारी के साथ पर्याप्त संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल के जवान तैनात किए गए थे। पुलिस की टीमें लगातार गश्त करती रहीं। प्रशासन की सतर्कता के कारण मेला क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनी रही और श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्ण माहौल में मेले का आनंद लिया। मेले में उमड़ी भीड़ और अखाड़ों की भव्यता ने एक बार फिर यह साबित किया कि मौनिया बाबा का महावीरी झंडा मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक परंपरा और राष्ट्रीय एकता का बड़ा उत्सव है।


