तराई के आंगन में रिमझिम फुहारों से बढ़ीं किसानों की उम्मीदें
इटवा, हिन्दुस्तान संवाद।तराई के आंगन में मानसून रफ्तार पकड़ने लगा है। आसमान पर बादलों का डेरा बना हुआ है और कभी फुहारें तो कभी रिमझिम बारिश हो रही है

इटवा, हिन्दुस्तान संवाद। तराई के आंगन में मानसून रफ्तार पकड़ने लगा है। आसमान पर बादलों का डेरा बना हुआ है और कभी फुहारें तो कभी रिमझिम बारिश हो रही है। हालांकि यह बारिश अभी धरती की पूरी प्यास बुझाने के लिए पर्याप्त नहीं है, लेकिन खेती-किसानी के लिए राहतभरी साबित हो रही है। शनिवार रात से लेकर रविवार सुबह तक जिले के विभिन्न हिस्सों में हल्की बारिश का सिलसिला जारी रहा। दिन में बारिश थम गई, लेकिन बादलों की आवाजाही बनी रही। इससे उमस भरी गर्मी से लोगों को पूरी राहत नहीं मिल सकी।रिमझिम बारिश का सबसे सकारात्मक असर खेतों में दिखाई देने लगा है।
पर्याप्त न सही, लेकिन रुक रुककर हो रही हल्की बारिश से धान की रोपाई ने गति पकड़ ली है। खेतों में किसानों की चहल-पहल बढ़ गई है और लंबे इंतजार के बाद कृषि कार्यों में रौनक लौट आई है। किसान मौसम के इस बदले मिजाज को खरीफ फसलों के लिए शुभ संकेत मान रहे हैं। बारिश के कारण तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। रविवार को जिले का अधिकतम तापमान 36.1 डिग्री और न्यूनतम 27.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। राज्य कृषि मौसम केंद्र के अनुसार पिछले 24 घंटे में जिले में 17.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। इससे वातावरण में नमी बढ़ी है और खेतों में रोपाई के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हैं। राज्य कृषि मौसम केंद्र के प्रभारी अतुल कुमार सिंह ने बताया कि आगामी चार से पांच दिनों तक मौसम का मिजाज लगभग इसी तरह बने रहने की संभावना है। बीच-बीच में हल्की से मध्यम बारिश और बादलों की आवाजाही जारी रह सकती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान मौसम खरीफ फसलों, विशेषकर धान की रोपाई के लिए लाभदायक साबित हो रहा है। यदि अगले कुछ दिनों तक बारिश का सिलसिला बना रहा तो किसानों को सिंचाई पर अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ेगा और फसलों की बढ़वार को भी मजबूती मिलेगी। तराई में मानसून की यह दस्तक भले ही अभी मूसलधार बारिश में तब्दील न हुई हो, लेकिन रिमझिम फुहारों ने खेतों में उम्मीदों की हरियाली जरूर लौटा दी है।


