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चुनाव हारने वाले बन गए मंत्री, जीतकर भी कैबिनेट से बाहर; हैरान कर रही मोदी सरकार में इन चेहरों की एंट्री

मोदी सरकार 3.0 में भी हैरान करने वाले फैसले लिए गए हैं। कई ऐसे नाम हैं जो कि चुनाव में जीते हैं लेकिन मोदी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है। वहीं कई नेताओं को हारने के बाद भी मंत्री पद दिया गया है।

चुनाव हारने वाले बन गए मंत्री, जीतकर भी कैबिनेट से बाहर; हैरान कर रही मोदी सरकार में इन चेहरों की एंट्री
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Ankit Ojhaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीMon, 10 Jun 2024 04:25 PM
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लोकसभा चुनाव में एनडीए के बहुमत के बाद रविवार को नरेंद्र मोदी ने तीसरी बार प्रधानमंत्र पद की शपथ ले ली। उनके साथ ही 30 कैबिनेट मंत्रियों ने शपथ ली है। उनके अलावा मोदी सरकार 3.0 में 36 राज्य मंत्री और पांच मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा की तरह इस बार भी चौंका दिया है। दरअसल पीएम मोदी के मंत्रिमंडल में ऐसे नेता को भी जगह मिली है जो अपनी सीट से चुनाव हार गया। वहीं हमीरपुर से बड़ी जीत दर्ज करने वाले और मोदी सरकार 2.0 में मंत्री रहे अनुराग ठाकुर को भी बाहर रखा गया है। 

मोदी 3.0 में किस बात ने किया हैरान
अनुराग ठाकुर मोदी सरकार 2.0 का एक बड़ा चेहरा था। उनके पास खेल मंत्रालय और सूचना प्रसारण मंत्रालय की जिम्मेदारी रह चुकी थी। 2019 में उन्हें राज्य मंत्री के तौर पर शपथ दिलाई गई थी। वहीं 2021 में उनका प्रमोशन किया गया और कैबिनेट मंत्री बना लिया गया। उन्हें सूचना प्रसारण मंत्रालय की जिम्मेदारी दे दी गई। एनडीटीवी की रिपोर्ट में बीजेपी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि जेपी नड्डा को कैबिनेट में लाने के लिए अनुराग ठाकुर को बाहर रखा गया है। जेप नड्डा भी हिमाचल प्रदेश के कोटे से मंत्री बने हैं। ऐसे में हिमाचल से दो कैबिनेट मंत्रियों को लेना मुश्किल था। 

चुनाव हारे पर मोदी मंत्रिमंडल में जगह
पंजाब की लुधियाना सीट से दो बार सांसद रह चुके रवनीत बिट्टू को भी इस बार मंत्रिपद की शपथ दिलाई गई है। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले ही वह कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए थे। लुधियाना की सीट पर उन्हें अमरिंदर राजा वडिंग के सामने हार का सामना करना पड़ा। अब उन्हें छह महीने के अंदर राज्यसभा या फिर लोकसभा में जाना है। बिट्टू पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं। 1999में बेअंत सिंह की खालिस्तानी हमले में हत्या कर दी गई थी। 

जॉर्ज कुरियन ने भी मंत्री पद की शपथ ली है। वह केरल में बीजेपी के महासचिव हैं। वहीं वह किसी भी सदन में नहीं हैं। पेशे से वकील रहे कुरियन लगभग तीन दशक से बीजेपी में हैं। वह पार्टी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ में कई पदों पर रह चुके हैं। इससे संकेत मिलता है कि बीजेपी अब दक्षिण में अपना जनमत बढ़ाना चाहती है और ईसाइयों में पकड़ मजबूत करना चाहती है। 

रविशंकर प्रसाद को नहीं मिली मंत्रिमंडल में जगह
लगभग दो दशक से सांसद और बीजेपी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद को भी इस बार मंत्री पद की शपथ नहीं दिलाई गई है। इस बार भी उन्होंने बिहार की पटना साहिब सीट से जीत दर्ज की है। इसके अलावा पांच बार के सांसद राजीव प्रताप रूड़ी को भी मंत्री पद नहीं मिला है। वह तीसरी बार सारन सीट से चुना जीते हैं। मोदी मंत्रिमंडल में बिहार से आठ मंत्री शामिल हुएहैं। लेकिन अटल सरकार से नरेंद्र मोदी सरकार तक  में शामिल रहे दो नामों को जगह नहीं दी गई। 

एल मुरुगन ही मोदी सराकर 2.0 के ऐसे मंत्री हैं जिन्हें चुनाव हारने के बाद भी इस बार मोदी मंत्रिमंडल में जगह मिली है। वहीं स्मृति ईरान और राजीव चंद्रशेखऱ को चुनाव हारने के बाद मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया गया। तमिलनाडु के पूर्व बीजेपी चीफ अन्नामलाई चुनाव हारने के बाद भी केंद्र सरकार में शामिल हैं। बीजेपी के वरिष्ठ नेता पुरषोत्तम रूपाला नरेंद्र मोदी को दोनों कार्यकालों के दैरान मंत्री रहे लेकिन इस बार उन्हें जगह नहीं दी गई। उन्होंने भी गुजरात की राजकोट सीट से बड़ी जीत दर्ज की है। 

मोदी सरकार में मंत्री रहे नारायण राणे ने भी चुनाव में जीत दर्ज की लेकिन वह मोदी सरकार में मंत्री नहीं हैं। नारायण राणे ने 2019 में बीजेपी जॉइन कर ली थी। मोदी सरकार 2.0 में वह मंत्री थे। इस बार राणे को रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग सीट से जीत हासिल हुई है।