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ब्रिटेन में मोदी: भारत और ब्रिटेन के बीच नौ समझौतों पर हस्ताक्षर 

Modi And theresa

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिटेन के चार दिवसीय यात्रा पर हैं। आज वह कॉमनवेल्थ हेड्स ऑफ गवर्मेंट (चोगम) बैठक में शामिल होंगे। अपनी यात्रा के दौरान वे कॉमनवेल्थ देशों के शासनाध्यक्षों के दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। कभी ब्रिटिश झंडे के तले रहे दुनिया के 53 मुल्कों के इस समूह की 11वीं शिखर बैठक में इस बार का विषय 'साझा विकास' को रखा गया है। 2010 के बाद पहली बार भारतीय प्रधानमंत्री चोगम की बैठक में शामिल हो रहे हैं। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस दौरे पर भारत और ब्रिटेन ने तकनीकी, व्यापार और निवेश के मुद्दों समेत नौ समझौतों पर दस्तखत किए हैं। अंतरराष्ट्रीय अपराधों को खत्म करने के उद्देश्य से दोनों देशों ने सूचना के आदान-प्रदान और सहयोग के लिए भी सहमति पत्र पर दस्तखत किए हैं। अपराधियों के रिकॉर्ड के आदान-प्रदान के साथ ही संगठित अपराधों को खत्म करने के लिए भी समझौता किया गया है। भारत और ब्रिटेन ने साइबर संबंधों के साथ ही स्वतंत्र, मुक्त, शांतिपूर्ण और सुरक्षित साइबर स्पेस के संबंध में समझौते के अलावा, साइबर सुरक्षा प्रबंधन पर भी समझौते किए हैं। 

इससे पहले, प्रधानमंत्री ने ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे से मुलाकात के दौरान आश्वासन दिया कि ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से अलग होने से द्विपक्षीय व्यापार को और बढ़ाने के बेहतर अवसर मिले हैं। दोनों नेताओं ने भारत और ब्रिटेन के संबंधों में विभिन्न आयामों पर लाभकारी बातचीत की। इस दौरान आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई, कट्टरवाद और ऑनलाइन कट्टरवाद पर भी चर्चा हुई। इसके बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय से बकिंघम पैलेस में मुलाकात की और साझा हितों पर बातचीत की।

पीएम मोदी ने सुबह सबसे पहले ब्रिटिश पीएम थेरेसा मे से उनके सरकारी आवास 10 डाउनिंग स्ट्रीट में ब्रेकफास्ट पर मुलाकात की। मे ने गर्मजोशी के साथ मोदी से हाथ मिलाते हुए कहा-'लंदन में आपका बहुत स्वागत है प्रधानमंत्री।' मुलाकात के बाद मोदी ने ट्वीट कर लिखा कि प्रधानमंत्री थेरेसा मे के साथ उनकी कई मुद्दों पर  बातचीत हुई है। उन्हें भरोसा है कि इस मुलाकात से हमारे संबंधों में नई ऊर्जा आएगी। वहीं, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने बताया कि दोनों नेताओं ने ब्रेक्जिट के बाद के हालात पर चर्चा करते हुए द्विपक्षीय संबंधों में नई ऊर्जा भरने और उसे पुनर्परिभाषित करने पर गहन चर्चा की। ब्रेक्जिट का अर्थ है 23 जून, 2016 को ब्रिटेन का 28 देशों के यूरोपीय संघ को छोड़ने का जनमत संग्रह करना।

मोदी और थेरेसा मे की बैठक के बाद 10, डाउनिंग स्ट्रीट की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि सीरिया पर हवाई हमले, आतंकवाद पर कार्रवाई, कट्टरपंथ और ऑनलाइन कट्टरवाद पर दोनों नेताओं ने चर्चा की। डाउनिंग स्ट्रीट के प्रवक्ता के अनुसार पीएम मोदी ने कहा कि ब्रेक्जिट के बाद भारत के लिए ब्रिटेन के प्रति महत्व में कोई कमी नहीं आएगी। वैश्विक बाजार के लिहाज से लंदन भारत के लिए बहुत महत्व रखता है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री मे ने मोदी को ईयू से अलग होने के कार्य में प्रगति पर जानकारी दी। मे ने कहा कि मार्च में इसके अमल पर सहमति से भारतीय कंपनियों और निवेशकों की पहुंच ब्रिटिश बाजार में मौजूदा शर्तो पर ही होगी। और यह वर्ष 2020 के अंत तक जारी रहेगी। डाउनिंग स्ट्रीट के जारी बयान के अनुसार ब्रिटिश पीएम के वर्ष 2016 में भारत दौरे के बाद दोनों देशों के द्विपक्षीय रक्षा और सुरक्षा सहयोग में प्रगति हुई है। रक्षा के प्रमुख सामरिक क्षेत्रों में साझेदारी को लेकर कई समझौते हुए हैं।

थेरेसा मे और मोदी ने ब्रिटेन और भारत की नई तकनीकी साझेदारी पर भी चर्चा की। इससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं में निवेश बढ़ने के साथ ही हजारों नौकरियां मिलेंगी। दोनों देश संयुक्त व्यापार समीक्षा भी करेंगे ताकि व्यापार की रुकावटों को दूर किया जा सके।

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