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मोदी सरकार को इस साल भी राज्यसभा में विपक्षी चुनौतियों से पड़ेगा जूझना, जानिए वजह

संसद के उच्च सदन राज्यसभा में सरकार व बहुमत के बीच दूरी और घटेगी। हालांकि, बहुमत से थोड़ी सी दूरी से मोदी सरकार को विपक्षी चुनौतियों से जूझना पड़ सकता है। एनडीए अभी भी बहुमत से 18 सीटों के फासले पर है...

मोदी सरकार को इस साल भी राज्यसभा में विपक्षी चुनौतियों से पड़ेगा जूझना, जानिए वजह
Madan Tiwariरामनारायण श्रीवास्तव,नई दिल्लीThu, 07 Jan 2021 01:34 AM
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संसद के उच्च सदन राज्यसभा में सरकार व बहुमत के बीच दूरी और घटेगी। हालांकि, बहुमत से थोड़ी सी दूरी से मोदी सरकार को विपक्षी चुनौतियों से जूझना पड़ सकता है। एनडीए अभी भी बहुमत से 18 सीटों के फासले पर है और इस साल होने वाले तीन राज्यों की आठ सीटों के चुनाव में भाजपा को कोई सीट नहीं आने वाली है। हालांकि चार रिक्त सीटों के उपचुनाव में उसे सफलता मिल सकती है, लेकिन वह बहुमत के आंकड़े के लिए काफी नहीं होगा।

राज्यसभा में भाजपा 93 सीटों के साथ अपने शिखर पर है। राजग में उसके सहयोगी जद (यू) के पांच के साथ एनपीएफ, एनपीपी, आरपीआई, एसडीएफ, एजीपी, एमएलएफ व पीएमके के एक-एक सांसद का समर्थन भी हासिल है। हालांकि उसे समय-समय पर अन्नाद्रमुक के नौ सांसदों का भी समर्थन मिलता रहता है। ऐसे में उसके साथ 114 सदस्यों का समर्थन रहता है। 245 सदस्यीय सदन में बहुमत का आंकड़ा 123 पर है। उच्च सदन में अभी चार सीटें रिक्त हैं। इनमें दो गुजरात और एक एक असम व बिहार से हैं। यह सभी सीटें भाजपा या राजग के साथ जाएगी।

इस साल खाली हो रही हैं आठ सीटें
इस साल जम्मू-कश्मीर की चार, केरल की तीन व पुडुचेरी की एक सीट रिक्त हो रही है। जम्मू-कश्मीर में विधानसभा नहीं होने से राज्यसभा चुनाव नहीं होंगे, जबकि केरल व पुडुचेरी में भाजपा या राजग को कोई सीट नहीं मिलेगी। ऐसे में साल 2021 में भी राजग को बहुमत के लिए इंतजार करना होगा। उसके दो पुराने सहयोगी शिवसेना व अकाली दल भी साथ होते तो भी इन दलों के पास तीन-तीन सांसद हैं और तब भी बहुमत नहीं बनता।

मौजूदा लोकसभा में अहम मौकों पर सरकार को मिला समर्थन
भाजपा के एक प्रमुख नेता का कहना है कि मौजूदा लोकसभा में सरकार ने सभी अहम मौकों पर राज्यसभा में समर्थन हासिल किया है। विपक्ष बंटा हुआ है। कांग्रेस नीत विपक्षी गठबंधन संप्रग चुनौती देने की स्थिति में नहीं है और अन्य विपक्षी दल सरकार के कामकाज पर उसके लाभ हानि को देखकर फैसला करते हैं। ऐसे में सरकार को आगे भी दिक्कत नहीं आने वाली है।

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