जंग शुरू होने से औद्योगिक कच्चा माल महंगा होने के आसार
फरीदाबाद के उद्योगपतियों का कहना है कि मध्य-पूर्व में युद्ध के बढ़ते तनाव से कच्चे माल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इससे आयात-निर्यात की लागत और उत्पादन पर प्रभाव पड़ेगा। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो घरेलू और निर्यात बाजार पर भी नकारात्मक असर होगा। उद्योगों को बढ़ती लागत और महंगे कच्चे माल का सामना करना पड़ सकता है।

फरीदाबाद, केशव भारद्वाज। मध्य-पूर्व में जारी युद्ध ने एक बार फिर औद्योगिक जगत की चिंता बढ़ा दी है। उद्योगपतियों का कहना है कि यदि यह संघर्ष जल्द नहीं थमा तो कच्चे माल की कीमतों में तेजी आ सकती है और आयात-निर्यात की लागत भी बढ़ जाएगी। ऐसे हालात में उअंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करना बड़ी चुनौती हो जाएगी। उद्योगपतियों के अनुसार युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में पहले ही बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका सीधा असर पेट्रोकेमिकल, रबर, प्लास्टिक और अन्य पेट्रोलियम आधारित कच्चे माल पर पड़ेगा। इन उद्योगों में उपयोग होने वाले अधिकांश कच्चे माल की कीमतें तेल बाजार से प्रभावित होती हैं। ऐसे में उत्पादन लागत बढ़ने की पूरी संभावना है।
औद्योगिक संगठनों की चिंताएं
औद्योगिक संगठनों का कहना है कि पिछली बार मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ने पर गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई थी, जिससे कई उद्योगों के सामने उत्पादन बनाए रखना चुनौती बन गया था। कच्चे माल की कीमतों में उछाल और परिवहन लागत बढ़ने से उद्योगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा था। अब एक बार फिर उसी तरह की स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है।
उद्यमियों के विचार
उद्यमियों का कहना है कि फिलहाल उद्योगों में उत्पादन सामान्य रूप से चल रहा है। हालांकि, कच्चे माल के दाम तो काफी बढ़े हुए हैं। फिर भी किसी तरह काम चल रहा है, लेकिन यदि युद्ध लंबा चला तो आयात-निर्यात की लागत बढ़ने से तैयार माल की कीमतों पर भी असर पड़ेगा। इससे घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात कारोबार भी प्रभावित हो सकता है। विशेष रूप से पेट्रोकेमिकल, प्लास्टिक, रबर और रसायन आधारित उद्योगों पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ने की संभावना है। फरीदाबाद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रधान राज भाटिया ने बताया कि मध्य-पूर्व में शांति बहाल होना वैश्विक व्यापार और भारतीय उद्योगों के हित में है। उन्होंने बताया कि युद्ध समाप्त होने के बाद पहले की तरह उत्पादन और निर्यात गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद रहती है, लेकिन यदि मौजूदा संघर्ष लंबा खिंचता है तो उद्योगों को बढ़ती लागत, महंगे कच्चे माल और परिवहन खर्च जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
चुनौतियाँ और समस्याएँ
ऑल इंडिया फोरम ऑफ एमएसएमई के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्याम सुंदर कपूर बताते हैं कि युद्ध की वजह से उद्योगों के लिए परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हो जाती हैं। इससे बड़ी समस्या बढ़ जाती है। सबसे बड़ी बात यह होती है कि उद्योगों में उत्पादन लागत भी बढ़ जाती है। इंडीकेशन इंस्ट्रूयमेंटस के प्रबंध निदेशक विशाल ललानी बताते हैं कि मध्य-पूर्व की जंग के बाद से हालात अभी पूरी तरह नहीं सुधरे थे कि अब जंग फिर से शुरू हो गई है। कच्चे माल के दाम बढ़े हुए हैं। अब और महंगे हुए तो उद्योगों के लिए मुश्किलें खड़ी हो जाएंगी।


