मेघालय हाईकोर्ट ने यूपी के छह छात्रों के खिलाफ एफआईआर रद्द की
मेघालय हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के छह छात्रों के खिलाफ एफआईआर को रद्द कर दिया, जिन्हें होमस्टे में तोड़फोड़ का दोषी ठहराया गया था। छात्रों ने 2.06 लाख रुपये मुआवजे के रूप में चुकाए और हाईकोर्ट ने समाज सेवा का आदेश दिया। आरोपी 13 जुलाई को गिरफ्तार हुए थे, जिसमें तीन नाबालिग हैं।

मेघालय हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के छह छात्रों के खिलाफ एफआईआर रद्द कर दी। छात्रों पर यहां एक होमस्टे में तोड़फोड़ करने का आरोप था। छात्रों ने 2.06 लाख रुपये का मुआवजे के तौर पर भुगतान किया। हाईकोर्ट ने दो छात्रों को 25-25 हजार रुपये प्रति व्यक्ति देने और छह दिन समाज सेवा करने का निर्देश भी दिया। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि यह आदेश सोमवार को हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रेवती मोहिते डेरे ने तब दिया जब दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौता हो गया। होमस्टे के मैनेजर और मालिक ने एफआईआर रद्द करने पर अपनी सहमति (नो-ऑब्जेक्शन) दे दी थी।
होमस्टे को नुकसान पहुंचाने की शिकायत के बाद 11 जुलाई को लैतुमखराह पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। छात्रों पर शिकायतकर्ता को धमकाने का भी आरोप था, क्योंकि तय संख्या से ज्यादा मेहमानों को एक कमरे में रहने की इजाजत नहीं दी गई थी।आरोपियों ने एफआईआर रद्द करने के लिए कोर्ट में याचिका दायर की थी। अधिकारियों ने बताया कि तीन आरोपी नाबालिग हैं। इनमें एक की उम्र 15 साल और दो की 17 साल है। एक अभी 18 साल का हुआ है। बाकी दो 20-29 साल की उम्र के हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। घटना के बाद, सभी छह आरोपियों को 13 जुलाई को पश्चिम बंगाल में गिरफ्तार किया गया था और बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया था।


