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MCD की हार बीजेपी के लिए है फायदेमंद? भविष्य के लिए कैसे मददगार; समझिए

MCD Election Result: एमसीडी में 'आप' की जीत हो गई है, तो अरविंद केजरीवाल पर वादे पूरे करने का दबाव होगा। इसी वजह से यदि दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी को आप आदमी पार्टी को घेरने में मदद मिल सकेगी।

MCD की हार बीजेपी के लिए है फायदेमंद? भविष्य के लिए कैसे मददगार; समझिए
Madan Tiwariलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीFri, 09 Dec 2022 07:21 PM
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MCD defeat beneficial for BJP: दिल्ली नगर निगम (MCD) चुनाव के नतीजे आए दो दो दिन बीत चुके हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 15 साल के शासन को उखाड़ फेंकते हुए पहली बार एमसीडी की 'छोटी सरकार' बनाने जा रही है। बीजेपी के नेताओं को भले ही एमसीडी में पार्टी के वापस नहीं आने का मलाल हो, लेकिन कई एक्सपर्ट्स इस हार में भी बीजेपी को भविष्य में फायदा मिलता देख रहे हैं। यह सुनकर आप भले ही चौंक जाएं कि आखिरकार किसी भी चुनाव की हार उस दल के लिए फायदेमंद कैसे हो सकती है, लेकिन ऐसी कई वजहें हैं, जिससे साबित होता है कि पिछले लंबे समय से दिल्ली विधानसभा चुनाव में हारने वाली बीजेपी के लिए एमसीडी की हार भविष्य में फायदेमंद हो सकती है।

अगले विधानसभा चुनाव में मिलेगा लाभ
साल 2014 के लोकसभा चुनाव में केंद्र में सरकार बनाने के बाद से बीजेपी ने ऐसे कई राज्यों में जीत हासिल की, जिसकी कुछ सालों पहले तक शायद ही किसी ने कल्पना की होगी। उत्तर से लेकर दक्षिण और पूर्व से लेकर पश्चिम तक कई राज्यों में सरकार बनाने वाली बीजेपी के हाथ से दिल्ली कई बार फिसल गया। लोकसभा चुनाव में सातों सांसद और एमसीडी में सरकार होने के बावजूद दिल्ली विधानसभा चुनाव बीजेपी पिछले दो दशकों से अधिक समय से कभी कांग्रेस तो कभी आम आदमी पार्टी से हारती आई। अब एमसीडी में हार के बाद चुनावी एक्सपर्ट मान रहे हैं कि अगले 2025 में होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी नए ऊर्जा से ओतप्रोत होकर चुनावी मैदान में उतरेगी। इसके अलावा, दिल्ली विधानसभा के अलावा, एमसीडी में भी नहीं होने की वजह से दिल्ली के मुद्दों को लेकर बीजेपी पर कोई आरोप नहीं लग सकेंगे।

हर मुद्दों पर 'आप' को घेरने का बीजेपी को मिलेगा मौका
नतीजे आने के पहले तक एमसीडी में सरकार होने की वजह से आम आदमी पार्टी कूड़े, गंदगी, स्कूल आदि पर बीजेपी को घेरती रही थी। चुनाव प्रचार के दौरान भी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जनता से वादा करते हुए दावा किया था कि जिस प्रकार से उनकी सरकार ने दिल्ली सरकार के अधीन आने वाले सरकारी स्कूलों, अस्पतालों, बिजली और पानी के मुद्दे पर काम किया है, उसी प्रकार वे एमसीडी में जीत मिलने के बाद कूड़े के पहाड़ों, गंदगी आदि जैसे एमसीडी के तहत आने वाले मुद्दों का भी हाल निकाल देंगे। अब जब एमसीडी में 'आप' की जीत हो गई है, तो अरविंद केजरीवाल पर वादे पूरे करने का दबाव होगा। इसी वजह से यदि दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी को आप आदमी पार्टी को घेरने में मदद मिल सकेगी। बीजेपी के नेता एमसीडी और दिल्ली सरकार के अधीन आने वाले कार्यों को लेकर एक साथ 'आप' पर हमलावर हो सकेंगे। साथ ही, 'आप' को भी सभी वादों को पूरे करने ही होंगे, क्योंकि दिल्ली और नगर निगम, दोनों ही जगह उनकी सरकार है और अब वे काम पूरा नहीं होने की कोई भी वजह नहीं गिना सकेंगे।

सिर्फ 'आप' को ही करना होगा एंटी इनकमबेंसी का सामना
साल 2025 में जब दिल्ली में विधानसभा चुनाव हो रहे होंगे, तब बीजेपी के हाथ से एमसीडी गए हुए तीन साल हो जाएंगे। वहीं, दिल्ली विधानसभा में भी सरकार बनाए हुए आम आदमी पार्टी को तब 12 साल पूरे हो जाएंगे। उल्लेखनीय है कि सबसे पहले साल 2013 में आम आदमी पार्टी ने 49 दिनों की सरकार बनाई थी, जिसके बाद साल 2015 में और फिर 2020 में 'आप' को जबरदस्त जीत मिली। चुनावी राजनीति में हमेशा ही माना जाता रहा है कि इतने सालों की सत्ता के बाद सत्ताधारी दल को सत्ता विरोधी लहर का सामना करना ही पड़ता है। 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी दोनों ही जगह एंटी इनकमबेंसी से बच जाएगी, जिसका उसे चुनाव में फायदा मिल सकता है।
 
लेकिन बीजेपी को लेने कुछ सख्त फैसले
दिल्ली विधानसभा के पिछले कुछ नतीजों पर नजर डालें तो पाएंगे कि जहां 1998 से 2013 तक 15 सालों तक शीला दीक्षित के नेतृत्व में कांग्रेस का राजधानी में कब्जा रहा तो उसके बाद से अब तक अरविंद केजरीवाल की लीडरशिप में आम आदमी पार्टी का कब्जा है। 2015 और 2020 के चुनाव में 'आप' ने बीजेपी को बुरी तरह से हराया तो कांग्रेस को राजधानी से लगभग मुक्त कर दिया। ऐसे में यदि 2025 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को सरकार बनानी है तो उसे दिल्ली यूनिट को लेकर कई सख्त फैसले लेने होंगे। जानकारों की मानें तो दिल्ली बीजेपी के पास कोई ऐसा चेहरा नहीं है, जोकि अरविंद केजरीवाल से टक्कर ले सके। दरअसल, अन्ना आंदोलन से निकले केजरीवाल की छवि भ्रष्टाचार विरोधी रही है तो उनकी सरकार द्वारा लिए गए बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा संबंधी के फैसलों और कामों ने एक बड़ा वोटबैंक अपने साथ जोड़ा है। जो वोटर्स सालों पहले बीजेपी और फिर कांग्रेस की ओर देखते थे, अब वे केजरीवाल का खुलकर समर्थन कर रहे हैं। इसके चलते बीजेपी को दिल्ली यूनिट के लिए न सिर्फ ऐसे चेहरे की तलाश करनी होगी, जोकि केजरीवाल भविष्य में टक्कर दे सके, बल्कि जमीन पर उतरकर पुराने कार्यकर्ताओं को भी वापस पार्टी से जोड़ सके। यदि बीजेपी एमसीडी की हार से सबक लेती है तो 2022 की हार 2025 में पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।